ईरान-इजराइल की लड़ाई में सड़ रहा एमपी का केला:निर्यात ठप; रमजान में मांग बढ़ती थी लेकिन इस बार दाम आधे, चावल पर भी संकट

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का असर अब मध्य प्रदेश के एग्रो प्रोडक्ट पर पड़ने लगा है। युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों के सामान मिडिल ईस्ट के देशों में पहुंचते हैं। इनमें भारत भी शामिल है। भारत के कई प्रोडक्ट मुंबई बंदरगाह पर निर्यात के इंतजार में हैं, इनमें मध्य प्रदेश का केला भी है। ऐसे हालात में केला उत्पादक किसान और व्यापारी चिंता में हैं। भाव सही न मिलने से खेतों में ही केला सड़ने की नौबत आ गई है। 2200 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहे केले के भाव अचानक 1200 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित बड़वानी, बुरहानपुर, धार और खरगोन के किसान-व्यापारी हो रहे हैं। वहीं, चावल के कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि फिलहाल मुंबई पोर्ट पर माल नहीं फंसा है, लेकिन नए ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। अचानक निर्यात ठप होने से किसान और व्यापारी कैसे संकट में आ गए हैं, क्या कोई रास्ता नजर आ रहा है या समस्या और गहरा सकती है…पढ़िए, रिपोर्ट बड़वानी में करीब तीन करोड़ केले के पौधे लगाए गए केला उत्पादक और निर्यातक संतोष लछेटा ने कहा- बड़वानी से केले का निर्यात वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। पिछले साल जिले से करीब 1.6 लाख टन केला निर्यात किया गया, जो मुख्य रूप से समुद्री मार्ग से ईरान और दुबई भेजा गया। दुबई से यह केला सड़क मार्ग के जरिए कई अन्य देशों तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में करीब ढाई से तीन करोड़ केले के पौधे लगाए गए हैं। नर्मदा पट्टी क्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियों के कारण यहां सालभर केले की प्लांटिंग और हार्वेस्टिंग होती रहती है। कीमत में भारी गिरावट, शिपयार्ड में 20 दिन का स्टॉक लछेटा के अनुसार, युद्ध के कारण केले की कीमतों में गिरावट आई है। पहले जहां केले का भाव 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा था, वह अब घटकर 1200 से 1300 रुपए प्रति क्विंटल रह गया है। जो केला बंदरगाहों पर ईरान और अन्य देशों के लिए पैक होकर तैयार था, उसे खराब होने से बचाने के लिए दिल्ली के व्यापारियों को घाटे में बेचना पड़ रहा है। राजलक्ष्मी बनाना ग्रुप के जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि इस समय मुंबई के शिपयार्ड में करीब 15 से 20 दिन का केला स्टॉक पड़ा है। निर्यात रुकने के कारण यह माल घरेलू बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है। किसान बोले- लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान महेश राठौड़ और बलराम यादव ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ जमीन पर केले की खेती की है। इस पर प्रति एकड़ करीब 90 हजार रुपए की लागत आई है। ये कुल मिलाकर पांच लाख रुपए से अधिक हो चुकी है। फसल तैयार होने के बावजूद बाजार में खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कई किसानों को लागत से भी कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ रही है। किसान नितिन यादव का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में जिले के कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा निर्यात हो जाता है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं, लेकिन इस बार निर्यात बंद होने से किसानों और निर्यातकों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। केला निर्यातक बोले- पोर्ट पर खड़े सैकड़ों कंटेनर महाराष्ट्र में सोलापुर के प्रमुख केला निर्यातक किरण ढोके ने बताया कि मुंबई पोर्ट पर करीब 250 कंटेनर केले से भरे खड़े हैं, जिन पर लगातार पोर्ट चार्ज लग रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले कुछ कंटेनर दुबई पहुंच चुके थे, लेकिन वहां भी स्थिति बदल गई है। कई जगह माल की कीमत से अधिक भाड़ा वसूला जा रहा है। सोलापुर के कोल्ड स्टोरेज में भी करीब 24 हजार मीट्रिक टन केला रखा है, जिसे अब घरेलू बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर केला उद्योग को राहत देने की मांग की है। जी-9 किस्म की विदेशों में सबसे अधिक मांग किसान मनोज जाट ने बताया- बड़वानी में हजारों किसान केले की उन्नत किस्में उगाते हैं। जी-9 किस्म की विदेशों में सबसे ज्यादा मांग रहती है। स्थानीय बाजार में जहां केले का भाव 10 रुपए किलो तक मिलता है, वहीं विदेशी बाजारों में यह कई गुना अधिक कीमत पर बिकता है। स्थानीय विधायक राजन मंडलोई का कहना है कि नर्मदा पट्टी का केला अपनी मिठास और आकार के कारण अरब देशों में काफी पसंद किया जाता है। युद्ध के कारण मुंबई पोर्ट पर बड़ी मात्रा में केला फंसा है। निमाड़ के चार जिलों में केला उत्पादन की स्थिति बुरहानपुर: मध्य प्रदेश की केला सिटी
मध्य प्रदेश में केले की खेती सबसे अधिक बुरहानपुर जिले में की जाती है। यहां लगभग 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की फसल उगाई जाती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण बुरहानपुर को प्रदेश की ‘केला सिटी’ भी कहा जाता है। जिले में हर साल करीब 16 लाख मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है, जो राज्य के कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा है। धार: नर्मदा किनारे तेजी से बढ़ी खेती
धार जिले में भी केले की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। खासतौर पर मनावर जैसे नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में किसान बड़े पैमाने पर केले की खेती कर रहे हैं। कई किसान व्यक्तिगत स्तर पर 150 एकड़ यानी करीब 60 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केला उगा रहे हैं। खरगोन: निर्यात हब बन रहा इलाका
खरगोन जिले में भी केले की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, जिले को केला निर्यातक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। यहां टिश्यू कल्चर केले की खेती के लिए 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्रयोगात्मक खेती भी की जा रही है।
चावल के कारोबार पर असर: भाड़ा बढ़ा, एडवांस बुकिंग भी बंद मध्य प्रदेश में दावत फूड्स के लॉजिस्टिक इंचार्ज विनीत वाधवान का कहना है कि कंपनी का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट यूरोप और अमेरिका में होता है, जबकि मिडिल ईस्ट में निर्यात बहुत कम है। फिलहाल उनका कोई भी कंसाइनमेंट कहीं अटका हुआ नहीं है। चावल महासंघ के अध्यक्ष आशु अग्रवाल के मुताबिक, युद्ध की वजह से नए ऑर्डर लगभग बंद हो गए हैं जबकि पुराने ऑर्डर के डिस्पैच में भी पहले जैसी सहज स्थिति नहीं रही। बालाघाट के राइस मिल संचालक अनीश संचेती बताते हैं कि जहाज कंपनियों ने माल ढुलाई का किराया बढ़ा दिया है और कुछ मामलों में आगे की बुकिंग भी सीमित या बंद कर दी गई है। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ ने जारी की एडवाइजरी (इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के वाइस प्रेसिडेंट देव गर्ग के मुताबिक ) ये खबर भी पढ़ें… एमपी के किसान ड्रम-टंकियों में भरवा रहे डीजल इजराइल- अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की वजह से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की अफवाह तेजी से फैली है। इसका असर एमपी के शहरी इलाकों में कम गांवों में ज्यादा दिख रहा है। कुछ जिलों में तो खाद और राशन की तरह लाइन लगाकर डीजल बांटना पड़ा है। पढ़ें पूरी खबर…