छलड़ी के दिन बुजुर्गों का आशीर्वाद लाता है सालभर खुशहाली! उत्तराखंड के गांवों में ऐसे होता है होली का भव्य समापन

Spread the love

Uttarakhand Holi Celebration: उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में जब ढोल-दमाऊं की थाप गूंजती है, तो समझ लीजिए कि देवभूमि की सबसे खास ‘पहाड़ी होली’ का आगाज हो चुका है. यहां होली का असली रंग गुलाल से नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट और बुजुर्गों के आशीर्वाद से चढ़ता है. पहाड़ों में होली का यह उत्सव चार-पांच दिनों तक चलता है, जिसका समापन ‘छलड़ी’ के दिन बड़े ही भावुक और आध्यात्मिक तरीके से होता है. आलू के गुटके, बैठकी होली के शास्त्रीय राग और हर घर की चौखट पर जाकर दी जाने वाली दुआएं, कुमाऊं और गढ़वाल की इस लोक परंपरा को दुनिया भर में मशहूर बनाती हैं.