अपर हिमालय की अनोखी होली! न गुलाल, न शोर, सिर्फ ‘लाल टीके’ से निभाई जाती है सदियों पुरानी परंपरा

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Upper Himalayas Holi Celebration: जहां देश भर में होली का मतलब शोर-शराबा, हुड़दंग और रंगों की बौछार होता है, वहीं हिमालय की ऊंचाइयों पर बसी बस्तियों में यह त्योहार एक अलग ही शांत और दिव्य रूप में नजर आता है. देवभूमि के अपर हिमालयी क्षेत्रों में होली का अर्थ केवल मस्ती नहीं, बल्कि देवी-देवताओं के प्रति अटूट श्रद्धा और सादगी का प्रतीक है. बुजुर्गों के अनुसार, यहां न तो गुलाल उड़ता है और न ही पानी की बौछारें होती हैं, बल्कि सदियों पुरानी ‘लाल टीके’ की परंपरा आज भी जीवित है.