‘इलाहाबाद है, हफ्ता लग जाएगा भांग का नशा उतरने में’:चीफ जस्टिस की टिप्पणी पर लोग हंसे; तारीख देते समय होली की छुट्‌टी याद आई

Spread the love

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक केस की सुनवाई के दौरान दिलचस्प वाकया सामने आया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने केस में अगली तारीख तय करते समय खुली अदालत में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) को लेकर एक हल्की-फुल्की टिप्पणी की, जो चर्चा का विषय बन गई। मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए लिस्टेड था। चीफ जस्टिस की बेंच मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय कर रही थी और कॉज लिस्ट पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान CJI ने कहा, इस मामले को होली की छुट्टियों के बाद लिस्ट किया जाए। इसे अगले सप्ताह के बाद रखा जाए। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा, इलाहाबाद है भाई… एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में। उनकी यह टिप्पणी प्रयागराज में चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, प्रयागराज समेत आसपास के कई जनपदों में होली के दौरान पारंपरिक रूप से कुछ लोग भांग का भी सेवन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुरेश देवी बनाम हाईकोर्ट ऑफ ज्यूडिकेचर एट इलाहाबाद मामले की सुनवाई चल रही थी। मजाकिया लहजा, आदेश का हिस्सा नहीं
अदालत में यह बातचीत पूरी तरह अनौपचारिक थी। यह किसी जुडिशल ऑर्डर का हिस्सा नहीं थी और न ही इसका मामले के कानूनी मुद्दों से कोई संबंध था। ऐसी हल्की टिप्पणियां कभी-कभी नियमित कार्यवाही के दौरान की जाती हैं। इनका उद्देश्य माहौल को हल्का फुल्का रखना होता है। स्पष्ट है कि इस टिप्पणी का केस की मेरिट या सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित
सुरेश देवी बनाम हाईकोर्ट ऑफ ज्यूडिकेचर एट इलाहाबाद मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसकी अगली सुनवाई होली की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई तिथि पर होगी। देशभर में प्रसिद्ध है प्रयागराज की होली
प्रयागराज में होली का त्यौहार बेहद उत्साह पूर्ण तरीके से मनाया जाता है और यहां की होली की चर्चा देश भर में होती है। खास तौर से ऐतिहासिक लोकनाथ चौक की होली अक्सर सुर्खियां बनती हैं। प्रयागराज में होली तीन दिनों तक खेली जाती है। तीसरे दिन कुछ हिस्सों में कपड़ा फाड़ होली खेली जाती है। एक और वाकया पेश आया… जब CJI ने वकील को जमकर फटकार लगाई एक अन्य मामले में CJI सूर्यकांत ने एक वकील को जमकर फटकार लगाई। पूरन चंद्र सेन बनाम राजस्थान राज्य के मामले में CJI सूर्यकांत ने वकील से कहा, इन पर जुर्माना नहीं लगाया हाईकोर्ट ने? बंद वंद पहने नहीं हैं, लग रहा कोई दंगल में उतरने आया है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा, हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। फिर सीजेआई ने पूछा कि आपको वकालत करते हुए कितने साल हो गए है, जिसपर वकील ने कहा कि 1995 से कर रहा हूं। CJI सूर्यकांत इतना सुनते ही भड़क गए और पूछा कि आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज ऐसी पिटीशन फाइल न करें। लोग आप पर विश्वास करते हैं। अगर आप यह सब फाइल करेंगे तो लोग आप पर विश्वास कैसे करेंगे। इस पर वकील ने कहा, RSS आदर्श संविधान के खिलाफ है, जिस पर जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें कॉस्ट बढ़ानी पड़ेगी। आपकी आइडियोलॉजी या पॉलिटिक्स वगैरह से राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे कोई ऑफेंस नहीं होता या आप किसी अथॉरिटी के खिलाफ FIR करने को नहीं कहते। कृपया पीछे हटें, खुद को शर्मिंदा न करें। अब कोर्ट रूम लाइव पढ़िए… CJI सूर्यकांत: इनको कॉस्ट नहीं लगाया हाईकोर्ट ने? बंद वंद पहने नहीं है.. लगा कोई दंगल में उतरने आया है। जस्टिस बागची: HC ने कॉस्ट लगाई है। CJI: कितने साल हो गए वकालत करते आपको? एडवोकेट: 1995 से… CJI: आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज़ ऐसी पिटीशन फाइल न करें। लोग आप पर विश्वास करते हैं.. अगर आप यह सब फाइल करेंगे तो लोग आप पर कैसे विश्वास करेंगे। एडवोकेट: RSS के आदर्श संविधान के खिलाफ हैं। जस्टिस बागची: अगर आप और दबाव डालेंगे.. तो हमें कॉस्ट बढ़ानी पड़ेगी। आपकी आइडियोलॉजी या पॉलिटिक्स वगैरह से राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे कोई ऑफेंस नहीं होता या आप किसी अथॉरिटी के खिलाफ FIR करने को नहीं कहते। आर्गुमेंट के लिए अगर पार्लियामेंट कोई गैर-कानूनी कानून पास करती है.. तो क्या यह क्राइम है? प्लीज़ वापस ले लें, खुद को शर्मिंदा न करें। CJI: पिटीशनर जो एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और खुद मौजूद हैं, उनका कहना है कि अपनी गलती का एहसास होने के बाद, वह BNSS के तहत फाइल की गई पिटीशन को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। वह यह भी वादा करते हैं कि वह किसी भी कोर्ट में ऐसी कोई शिकायत, एप्लीकेशन/पिटीशन फाइल नहीं करेंगे। CJI: पिटीशनर आगे रिक्वेस्ट करता है कि यह कोर्ट नरम रवैया अपनाए और उसे HC द्वारा लगाए गए कॉस्ट से छूट दे और पिटीशनर पर आगे केस चलाए। पिटीशनर के पछतावे और उसके अंडरटेकिंग को ध्यान में रखते हुए, हम निर्देश देते हैं कि HC के विवादित फैसले का पैरा 16 अनिश्चित काल के लिए रोक दिया जाएगा। यह अपील राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ थी जिसमें एक वकील पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया था। वकील ने नागरिकता (संशोधन) एक्ट, 2019 को लेकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और दूसरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने याचिका को बेकार बताया था, सेक्शन 528 BNSS के तहत प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया था और कहा था कि अदालतों का इस्तेमाल “गलत इरादे” से किए गए केस को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता। ——————- ये खबर भी पढ़िए- बांके बिहारी को लगा रंग, नाचते हुए पहुंचे भक्त: वृंदावन में विदेशियों ने भी खेली होली, कहा- मजा आ गया मथुरा के वृंदावन में रंगभरी एकादशी पर शुक्रवार को अनोखा नजारा दिखा। बांके बिहारी जी को रंग और अबीर लगाने के साथ ही ब्रज की होली की शुरुआत हुई। मंदिर रंग-बिरंगे गुलाल में डूबा नजर आया। पुजारियों ने प्रसादी गुलाल भक्तों पर बरसाया। फूल, जलेबी और लड्डू लुटाए। प्रसाद पाने के लिए भक्तों में होड़ मच गई। शरीर पर अबीर पड़ते ही भक्त खुशी से झूम उठे। बांके बिहारी जी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा। पढ़ें पूरी खबर…