भोपाल में करीब 204 करोड़ की लागत से बने स्वास्थ्य प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद भी आम लोगों के किसी काम नहीं आ पा रहे हैं। राजधानी में कहीं अतिक्रमण हटाना बाकी है, तो कहीं एसटीपी-ईटीपी, फायर टैंक और हैंडओवर जैसी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पाईं। दो से तीन बार डेडलाइन निकल चुकी है, लेकिन अस्पताल अब तक शुरू नहीं हुए। इसका सीधा असर शहर के अलग-अलग कोनों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। उन्हें अपने क्षेत्र में इलाज नहीं मिल पा रहा और मजबूरन लंबी दूरी तय कर शहर के गिने-चुने बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। 6 माह से अटके बड़े प्रोजेक्ट राजधानी में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे। इनमें जेपी अस्पताल का पांच मंजिला नया भवन, सुल्तानिया का 300 बिस्तरीय सिविल अस्पताल, बैरागढ़ का 100 बिस्तरीय मॉड्यूलर मेटरनिटी विंग, बैरसिया का 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल और रातीबड़ का 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं, इमारतें लगभग खड़ी हो चुकी हैं, लेकिन छोटी-छोटी अड़चनें बड़ी देरी की वजह बन गई हैं। सुल्तानिया अस्पताल का काम फिनिशिंग पर सुल्तानिया में 300 बिस्तरीय सिविल अस्पताल का निर्माण पीआईयू/पीडब्ल्यूडी द्वारा कराया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत 120 करोड़ रुपए है। अभी भवन का काम फिनिशिंग लेवल पर है। विभाग ने अब इसकी नई संभावित पूर्णता अगस्त 2026 बताई है। अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रक्चर खड़ा हो चुका है, अब इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल काम, एचवीएसी सिस्टम, उपकरण स्थापना और टेस्टिंग का काम चल रहा है। बैरागढ़ का 100 बिस्तरीय मेटरनिटी विंग तैयार, पर शुरू नहीं बैरागढ़ सिविल अस्पताल में 22 करोड़ रुपए की लागत से 100 बिस्तरीय मॉड्यूलर मेटरनिटी विंग बनाया है। भवन लगभग तैयार है, लेकिन औपचारिक हैंडओवर, सेवाओं की टेस्टिंग और स्टाफ तैनाती के कारण उद्घाटन टलता रहा। अब विभाग का कहना है कि फरवरी 2026 तक इसे मरीजों के लिए शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में इमारत तैयार होने के बाद भी महीनों से महिलाएं पुराने और सीमित संसाधनों वाले वार्ड में ही इलाज करा रही हैं। अस्पताल के इंतजार में बैरसिया ग्रामीण क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र के लिए अहम 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल बैरसिया में बनाया जा रहा है। इसकी लागत 20 करोड़ रुपए है। सिविल वर्क लगभग पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग, उपकरण फिटमेंट और यूटिलिटी कनेक्शन का काम बाकी है। नई संभावित तिथि मई 2026 तय की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल शुरू होने से उन्हें शहर आने की मजबूरी खत्म होगी, लेकिन हर बार नई तारीख मिलने से उम्मीद टूट रही है। रातीबड़ में अतिक्रमण बना बड़ी रुकावट रातीबड़ में 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 10 करोड़ रुपए की लागत से बनाया है। भवन लगभग तैयार है, लेकिन आवासीय भवन और फायर टैंक की जमीन पर अतिक्रमण के कारण मामला अटका हुआ है। अतिक्रमण हटाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा है, लेकिन एसडीएम स्तर पर अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी। जब तक जमीन खाली नहीं होगी, फायर सेफ्टी कम्प्लायंस पूरा नहीं हो पाएगा और अस्पताल शुरू नहीं हो सकेगा। जेपी अस्पताल में लागत बढ़ी, डेडलाइन भी बढ़ी भोपाल के जेपी अस्पताल में 26 करोड़ रुपए की लागत से पांच मंजिला नया भवन तैयार हो रहा है। अब इसकी लागत 6 करोड़ रुपए और बढ़ा दी गई है। यानी, यह नया भवन कुल 32 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा। बढ़ी हुई राशि से एसटीपी, ईटीपी और पुराने भवन से जोड़ने के लिए ब्रिज बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की हैंडओवर तिथि पांचवीं बार बढ़ाकर मई 2026 कर दी गई है। यहां एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) जैसे जरूरी कामों में देरी भी बड़ी वजह मानी जा रही है। मरीजों पर इसका सीधा असर हेल्थ एक्सपर्ट की माने तो इन सभी प्रोजेक्ट्स के शुरू न होने का असर सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। बैरसिया, रातीबड़ और बैरागढ़ जैसे इलाकों के लोगों को इलाज के लिए हमीदिया, जेपी या अन्य बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है। इससे बड़े अस्पतालों में भीड़ बढ़ती है, मरीजों को लंबी लाइन में इंतजार करना पड़ता है और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कलेक्टर को लिखा CMHO ने पत्र भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा का कहना है कि सुल्तानिया अस्पताल का निर्माण जारी है। रातीबड़ में अतिक्रमण न हटने के कारण बिल्डिंग हैंडओवर नहीं हो पाई है। अतिक्रमण हटाने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। उनका कहना है कि जैसे ही जमीन मुक्त होगी, अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा। विभाग का दावा है कि चारों प्रोजेक्ट इस साल पूरे करने की कोशिश की जा रही है। यह खबर भी पढ़ें… भोपाल के सरकारी अस्पतालों में 23% डॉक्टरों के पद खाली भोपाल में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का एक चिंताजनक सच सामने आया है। जिला स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित अस्पतालों में 23% डॉक्टरों के पद खाली हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि आज तक एक भी स्किन स्पेशलिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
भोपाल में 204 करोड़ की इमारतें बनीं शोपीस:2-3 बार निकली डेडलाइन; अतिक्रमण और लेटलतीफी में फंसे अस्पताल
