यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से उद्योगों के लिए जमीन आवंटन में करोड़ों रुपए की धांधली हुई। यूपीसीडा के अधिकारियों ने मनमाने ढंग से नियमों की अनदेखी कर जमीन का आवंटन किया। आयुष विभाग में भी अस्पतालों के संचालन से लेकर दवाओं की खरीद में गड़बड़ियां सामने आई हैं। राज्य आयुष सोसायटी ने दवा कंपनियों पर इतना भरोसा जताया कि सैंपल जांच के बिना ही दवा खरीद को मंजूरी दी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। CAG ने यूपीसीडा और आयुष विभाग को कामकाज में सुधार की नसीहत भी दी है। जानिए CAG की रिपोर्ट में क्या है… वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को विधानसभा में आयुष महकमे की साल 2018-19 से 2022-23 तक अवधि और यूपीसीडा की 2017-18 से मार्च 2024 तक की CAG की रिपोर्ट पेश की है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद भी भूमि अधिग्रहण नहीं
योगी सरकार ने फरवरी- 2018 में यूपी में इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें 8 लाख करोड़ से अधिक के एमओयू साइन हुए थे। सरकार ने फरवरी- 2022 में भी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें देशी-विदेशी कंपनियों और औद्योगिक समूहों ने 33.50 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए थे। निवेशकों को औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए सबसे पहली जरूरत जमीन है। उद्योग लगाने के लिए जमीन देना यूपीसीडा की जिम्मेदारी है। CAG रिपोर्ट में सामने आया कि 2019-20 और 2022-23 में एक भी नई जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ। 2017-18 से 2022-23 के बीच सिर्फ एक साल ही लक्ष्य पूरा हुआ। सरकार का कहना है कि किसानों और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण जमीन अधिग्रहण में दिक्कत आई। फर्जी दस्तावेजों पर आवंटन
CAG ने खुलासा किया कि यूपीसीडा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नीलामी में शामिल होने वाले बोली दाताओं को जमीन का आवंटन किया। इतना ही नहीं, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की। ठेकेदारों को 1 करोड़ से 63.41 करोड़ रुपए तक के 27 कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड उनकी बोली क्षमता का आकलन किए बिना जारी किए गए। 11 काम 61 से 2612 दिन की देरी से पूरे हुए। 14 काम मार्च 2024 तक अधूरे थे। सिर्फ 39 फीसदी जमीन का आवंटन
यूपीसीडा को 2017-18 से 2022-23 के बीच 5263 एकड़ जमीन देनी थी, लेकिन सिर्फ 2052 एकड़ (करीब 39%) ही अधिग्रहीत हो सकी। आवंटियों से 6714.4 करोड़ रुपए वसूलने थे, लेकिन 4185.06 करोड़ (करीब 62%) ही वसूले जा सके। CAG रिपोर्ट में खुलासा किया कि इनकम टैक्स छूट हासिल नहीं करने से 184.43 करोड़ रुपए आयकर जमा करना पड़ा। राज्य के दो सार्वजनिक उपकरणों को ऋण समझौते के बिना 52.84 करोड़ रुपए का ऋण दिया। 1.04 लाख की कंपनी, 300 करोड़ की परियोजना के लिए जमीन
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी कोटवन-2 में 300 करोड़ की परियोजना के लिए 28,011.15 वर्गमीटर जमीन उस कंपनी को दे दी गई, जिसकी नेटवर्थ सिर्फ 1.04 लाख रुपए थी। बाद में उसे समय बढ़ाकर सितंबर 2024 तक कर दिया गया। कोसी कोटवन एक्सटेंशन-1 में भी कम आय वाली कंपनियों को 40-41 करोड़ के प्रोजेक्ट के नाम पर भूखंड दे दिए गए। कंपनियां समय पर पैसा जमा नहीं कर सकीं, फिर भी 864 दिन बाद जुर्माना लेकर मामला चलाया गया। आखिर में नीति और दरें बदलने पर आवंटन रद्द करना पड़ा। IRCTC को नजरअंदाज कर अपात्र कंपनी को जमीन
जौनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018 वर्गमीटर के भूखंड आवंटन के लिए मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स और रेलवे की इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड ने आवेदन किया। जमीन आवंटन के लिए बनी पीईसी ने दोनों पक्षों के आवेदनों आंकड़ों पर विचार किए बिना ही मेसर्स भगवती के डीपीआर पर विचार किया। नतीजन आईआरसीटीसी दौड़ से बाहर हो गया, जमीन का आवंटन अपात्र फर्म को हो गया। झांसी में हजारों वर्ग मीटर ज्यादा जमीन आवंटित कर दी
यूपीसीडा के नियमों के अनुसार, एक करोड़ रुपए निवेश करने पर कंपनी को 2000 वर्गमीटर जमीन आवंटित की जा सकती है। लेकिन, यूपीसीडा ने झांसी में हजारों वर्गमीटर जमीन अधिक आवंटित कर दी। बी-02 उरई-2 3.57 करोड़ रुपए का निवेश करने वाली फर्म को 7,140 वर्गमीटर जमीन आवंटित हो सकती थी। लेकिन, फर्म को 11,250 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई। फर्म को 4110 वर्गमीटर अधिक जमीन आवंटित हुई। सुमेरपुर में 2.26 करोड़ रुपए निवेश करने वाली फर्म को 4520 वर्गमीटर जमीन आवंटन करना था, लेकिन 15,062 वर्गमीटर जमीन आवंटित की। 10,542 वर्गमीटर जमीन अधिक आवंटित की गई। उरई-झांसी में 2.71 करोड़ निवेश करने वाली फर्म को 3.629 वर्गमीटर की जगह 3992 वर्गमीटर और एक करोड़ रुपए निवेश करने वाली फर्म को 2000 वर्गमीटर जमीन की जगह 3992 वर्गमीटर जमीन आवंटित की। रोजगार सृजन का प्रमाण नहीं दे सका यूपीसीडा
यूपीसीडा ने 2017 से 2022 तक 322 से 2694 करोड़ रुपए का निवेश कराने का दावा किया है। इस अवधि में 2945 से लेकर 35,545 लोगों के लिए रोजगार सृजन का भी दावा किया। लेकिन दावों का आधार सीएजी को उपलब्ध नहीं कराया। CAG को आयुष विभाग में भी कई अनियमितता मिलीं.. औषधियों के उत्पादन का लक्ष्य पूरा नहीं
2018-19 से 2022-23 के बीच आयुष विभाग को 217 आयुर्वेदिक दवाओं की 525.13 टन उत्पादन करना था। लेकिन, सिर्फ 125 दवाओं की 268.98 टन ही बन सकीं। इसी तरह 145 यूनानी दवाओं की 160.36 टन उत्पादन का लक्ष्य था, लेकिन केवल 88.17 टन ही तैयार हो पाईं। यानी दोनों ही मामलों में लक्ष्य का लगभग आधा ही उत्पादन हुआ। मनमाने ढंग से औषधि खरीद
CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आयुष विभाग ने 2018-19 से 2022-23 तक बिना निविदा आमंत्रित किए फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन से 389.37 करोड़ रुपए की आयुर्वेदिक और यूनानी दवाइयां खरीदीं। गोवा एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड से 108.53 करोड़ रुपए की होम्योपैथिक दवाइयां खरीदीं। टेंडर प्रक्रिया न होने से दवाएं प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी दरों पर नहीं खरीदी जा सकीं। शासन की स्वयं की औषधि निर्माणशाला का कम से कम उपयोग हुआ। औषधि किट में करोड़ों का खेल
2021-22 में 31.14 करोड़ रुपए की होम्योपैथिक औषधियों की अनुचित खरीद का खुलासा हुआ। वहीं, विधानसभा चुनाव 2022 में मतदान दलों को कोविड से बचाव के लिए सेफ्टी किट (मास्क, सैनिटाइजर, फेसशील्ड और दस्ताने) दिए गए। जबकि, चुनाव आयोग की ओर से इसकी मांग नहीं की गई। आयुष महकमे ने 20 करोड़ की लागत से 7.50 लाख आयुरक्षा किट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। फार्मास्यूटिक्ल कॉरपोरेशन ने मतदान पूरा होने के बाद तक 3.71 करोड़ रुपए की 1.48 लाख किट की आपूर्ति की। जबकि 9.38 करोड़ रुपए के 3.75 लाख किट की आपूर्ति ही नहीं हुई। CAG ने खुलासा किया है कि पर्याप्त बजट होने के बाद भी औषधि की लक्ष्य के अनुसार खरीद नहीं की गई और अनुचित खरीद की गई। नियम के मुताबिक, हर बार कम से कम 5 दवाओं के सैंपल जांच के लिए लेने चाहिए थे। लेकिन, राज्य आयुष सोसायटी ने एक भी सैंपल जांच के लिए नहीं लिया। दवाओं को लैब में टेस्ट के लिए भेजा ही नहीं गया। —————— ये खबर भी पढ़ें… सपा विधायक बोले- ब्राह्मणों ने कसम खाई, सत्ता से उखाड़ेंगे:डिप्टी CM ने शिखा पूजी, खिंचवाने वाला कौन था? मंत्री पर भड़के स्पीकर यूपी विधानसभा के बजट सत्र के 9वें दिन कई बार हल्की नोकझोंक और हंसी-खुशी के पल भी देखने को मिले। सपा विधायक अतुल प्रधान ने डिप्टी CM ब्रजेश पाठक के बटुक पूजन पर तंज कसा। कहा, ब्राह्मण समाज के लोग पूज्यनीय हैं। डिप्टी सीएम आज शिखा की पूजा कर रहे थे, अरे चोटी उखड़वाने वाला कौन था? ऐसे ही चाणक्य की घनानंद ने चोटी उखड़वाई थी, तभी चाणक्य ने कसम खाई थी कि मगध के सम्राज्य के उखाड़ के फेंक दूंगा। इसी तरह ब्राह्मणों ने कसम खाई है, जिस तरह से आपने शिखा उखाड़ने का काम किया है, वैसे ही ब्राह्मण सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे। पढ़ें पूरी खबर
कैग का खुलासा-यूपीसीडा ने की करोड़ों की धांधली:उद्योगों को जमीन देने में फेल रहा, आयुष विभाग में भी गड़बड़ी
