इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया है। 1 जनवरी को 70 वर्ष से अधिक उम्र की महिला हरकू बाई कुंवर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि दूषित पानी पीने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। मृतका की बेटी निर्मला ने बताया कि “30 दिसंबर की रात मां को अचानक तेज उल्टी-दस्त शुरू हो गए थे। हालत बिगड़ती चली गई और 1 जनवरी को उनकी मौत हो गई।” सूचना में देरी को लेकर निर्मला ने कहा कि परिवार में तीसरे का कार्यक्रम होने के कारण वे तत्काल प्रशासन को जानकारी नहीं दे सके। “इसी वजह से अब जाकर हम अपनी बात सामने रख पा रहे हैं।” इस मौत के बाद भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। हाईकोर्ट ने कहा- स्वच्छ जल लोगों का मौलिक अधिकार
मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़े मामलों में दायर 5 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार के जवाब को असंवेदनशील बताते हुए कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के नागरिकों का मौलिक अधिकार है। यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि पीड़ित परिवारों को मुआवजा कम मिला है, तो उस पर भी अदालत निर्देश दे सकती है। मंत्री विजयवर्गीय का दावा: हालात सामान्य हो रहे
इधर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि भागीरथपुरा क्षेत्र की स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को उपचार के बाद 19 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया, जबकि केवल 8 नए मरीजों को हल्के लक्षणों के चलते भर्ती किया गया है। वर्तमान में इंदौर के विभिन्न अस्पतालों में 99 प्रभावितों का इलाज चल रहा है। विजयवर्गीय के मुताबिक आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 15 है और उनके स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है। क्षेत्र में लगातार क्लोरीनेशन किया जा रहा है और नागरिकों में पानी उबालकर पीने को लेकर जागरूकता बढ़ी है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सर्वे के दौरान प्रभावितों की संख्या में भी कमी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग घर-घर कर रहा सर्वे
स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। भागीरथपुरा के 5 हजार से अधिक घरों में ओआरएस, जिंक की गोलियां और दवाइयां वितरित की गई हैं। नागरिकों से अपील की जा रही है कि कटे-फटे फल न खाएं और नगर निगम टैंकर का पानी भी 10 मिनट उबालकर ही उपयोग करें। किसी भी तरह के लक्षण आने पर टोल फ्री नंबर 9406505508 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है। कांग्रेस का डेलीगेशन पीड़ित परिवारों से मिला
दोपहर करीब एक बजे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल भागीरथपुरा पहुंचा। इलाके में भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के बीच नेताओं की पुलिस अधिकारियों से बहस भी हुई। बाद में वे दूसरे रास्ते से अंदर पहुंचे और दूषित पानी से जान गंवाने वाले अशोक लाल पवार, जीवन लाल और गीता बाई के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग की। देखिए, 5 तस्वीरें… अब तक 18 लोगों की मौत, 110 भर्ती
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया है। इन्हें मिलाकर कुल 110 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। बीमार होने के बाद कुल 421 मरीजों को अस्पताल लाया गया था, इनमें से 311 डिस्चार्ज हो चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज जारी है। शिकायतों पर ध्यान देते तो मौतें नहीं होतीं
मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रभावित इलाकों में अब भी दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि प्रशासन ने पहले की गई शिकायतों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि ऐसा किया जाता तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। सीनियर काउंसिल ने कोर्ट को यह भी बताया कि वर्ष 2022 में महापौर द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा यह भी दलील दी गई कि 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 पानी के सैंपलों में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नई स्टेटस रिपोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है और इसकी अनदेखी गंभीर विषय है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े मुद्दों को 7 श्रेणियों में बांटा है… इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले के मिनट टु मिनट अपडेट्स के लिए नीचे दिए लाइव ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…
भागीरथपुरा में एक और मौत..अब तक 18 की गई जान:परिजन बोले- उल्टी-दस्त से पीड़ित थीं; हाईकोर्ट बोला- इंदौर की छवि खराब, सरकार का जवाब असंवेदनशील
