पिथौरागढ़: हरड़, जिसे आयुर्वेद में हरितकी कहा जाता है, मुख्य रूप से पहाड़ी और वन क्षेत्रों में पाई जाती है. शुद्ध वातावरण में उगी यह औषधीय गुणों से भरपूर है और आयुर्वेद में इसे तीनों दोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाली माना जाता है. हरड़ पाचन सुधारती है, इम्यूनिटी बढ़ाती है और शरीर को अंदर से शुद्ध रखने में मदद करती है.
आयुर्वेद में हरड़ क्यों कहलाती है ‘औषधियों की माता’? जानिए कारण
