आशाओं के जंगल, उम्मीदों के मंगल

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संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख विशिष्ट एजेंसी खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने 22 अक्टूबर को वैश्विक वन संसाधन आकलन (जीएफआरए) का आंकड़ा प्रस्तुत किया। यह आकलन भारत के पर्यावरण संरक्षण के ईमानदार प्रयासों पर मुहर लगाता है। इससे साफ है कि भारत में पेड़ों को बचाने का अभियान सतत चल रहा है। एफएओ के नवीनतम जीएफआरए-2025 के अनुसार, विश्व का कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 बिलियन हेक्टेयर है। यह कुल भूमि क्षेत्र का लगभग 32 प्रतिशत है। इसमें प्रति व्यक्ति लगभग 0.5 हेक्टेयर वन है। भारत ने कुल वन क्षेत्रफल के मामले में दुनिया भर में नौवें स्थान पर पहुंचकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पिछले आकलन में भारत 10वें स्थान पर था। भारत ने वन क्षेत्रफल में शुद्ध वार्षिक वृद्धि के मामले में भी दुनिया भर में अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है।

इस अभियान की सफलता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उनकी दूरदृष्टि और इच्छाशक्ति का ही नतीजा है-

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर हर नागरिक से एक पौधा मां के नाम रोपने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी मां या धरती मां को सम्मान देने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री को सचमुच कुछ भूलता नहीं है। उन्हें अपना अभियान याद रहा। उन्होंने इस साल भी पांच जून को ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान का देश से आह्वान किया। इस अभियान से स्कूल, सरकारी विभाग और आम जन सीधे जुड़े हैं। लोग मां के नाम पर पौधे रोपकर उनकी देखभाल कर रहे हैं। पौधरोपण या वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने का उनका यह भावनात्मक आह्वान सचमुच कारगर साबित हो रहा है।

एफएओ भुखमरी को दूर करने और वन सहित विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को बेहतर बनाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की अगुवाई करती है। जीएफआरए दुनिया भर में वनों की स्थिति का एफएओ के माध्यम से किया गया आवधिक आकलन होता है। यह आकलन वन क्षेत्र, परिवर्तन, प्रबंधन और उपयोग से संबंधित व्यापक आंकड़े प्रदान करता है। नवीनतम जीएफआरए के अनुसार, विश्व का कुल वन क्षेत्र लगभग 4.14 बिलियन हेक्टेयर है। यह कुल भूमि क्षेत्र का लगभग 32 प्रतिशत है और इसमें प्रति व्यक्ति लगभग 0.5 हेक्टेयर वन है। वैश्विक स्तर पर भारत में लगभग 72,739 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है। यह विश्व के कुल क्षेत्रफल का लगभग दो प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में सबसे बड़ा वन क्षेत्र है। यह दुनिया के कुल वन क्षेत्र का 25 प्रतिशत है। दक्षिण अमेरिका में वनों का अनुपात सबसे अधिक है। यह कुल भूमि क्षेत्रफल का 49 प्रतिशत है। दुनिया के आधे से अधिक (54 प्रतिशत) वन केवल पांच देशों रूस, ब्राजील, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन में हैं।

वन अधिकार अधिनियम, 2006 भारत में वनों को दो श्रेणियों में विभाजित करता है। एक प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित और दूसरी रोपित। रोपित वनों के विस्तार में भारत की सफलता अभूतपूर्व है। बांस के बागान का उदाहरण समझें। वैश्विक स्तर पर अनुमानित रूप से कुल 30.1 मिलियन हेक्टेयर में बांस बागान फैले हैं। इसमें से 21.2 मिलियन हेक्टेयर (70 प्रतिशत) एशिया में है। भारत में 11.8 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र है। वर्ष 1990 और 2025 के बीच बांस के जंगलों का वैश्विक क्षेत्रफल 8.05 मिलियन हेक्टेयर बढ़ा है। इसका मुख्य कारण चीन और भारत में हुई वृद्धि है। इसी तरह कुल 831 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबर के बागानों के साथ भारत दुनिया भर में पांचवें स्थान पर है और वैश्विक स्तर पर रबर के बागानों के कुल क्षेत्रफल 10.9 मिलियन हेक्टेयर में योगदान देता है।

भारत और इंडोनेशिया को मिलाकर एशिया में कृषि वानिकी के तहत आने वाले कुल क्षेत्र का लगभग शत-प्रतिशत हिस्सा आता है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 39.3 मिलियन हेक्टेयर है। भारत और इंडोनेशिया मिलकर वैश्विक स्तर पर कृषि वानिकी के तहत आने वाले कुल क्षेत्र का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यह लगभग 55.4 मिलियन हेक्टेयर है। भारत ने 1990-2025 के दौरान वन क्षेत्र के मामले में शुद्ध वृद्धि दर्ज की है। इस वृद्धि के क्रम में वनीकरण के प्रयासों के कारण हुए नुकसान की तुलना में वन क्षेत्र का विस्तार कहीं अधिक हुआ है। यह वृद्धि कुछ देशों में वनों की कटाई में आई कमी और कुछ अन्य देशों में वन क्षेत्र में हुए विस्तार का परिणाम है। वैश्विक स्तर पर लकड़ी हटाने के मामले में भारत नौ फीसद का योगदान देता है। इस मामले में भारत 2023 तक दुनिया में दूसरे स्थान पर था। यहां लकड़ी हटाने का आशय जंगल से काटी और हटाई गई लकड़ी की मात्रा से है। इस प्रक्रिया के तहत ईंधन में प्रयोग आने वाली गोल लकड़ी ही हटाई जाती है।

वर्ष 2025 के वन संसाधन आकलन के अनुसार, दुनिया के वनों ने 2021-2025 की अवधि के दौरान शुद्ध कार्बन सिंक के रूप में कार्य किया और वन भूमि पर प्रतिवर्ष 3.6 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (गीगाटन CO2) को अवशोषित किया। दुनिया के शीर्ष कार्बन सिंक के रूप में भारत पांचवें स्थान पर है और इसके वन 2021-2025 के दौरान प्रति वर्ष 150 एमटी कार्बन डाइऑक्साइड हटा रहे हैं। भारत सहित एशिया में 2021-2025 के दौरान वन कार्बन निष्कासन बढ़कर 0.9 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड प्रति वर्ष हो गया है। इससे वनों की कटाई से होने वाले उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आई।

भारत में वनों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार, देश का कुल वन आवरण 7,15,343 वर्ग किलोमीटर में फैला है।यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.76 प्रतिशत है। क्षेत्रफल के अनुसार सबसे अधिक वन आवरण वाले शीर्ष तीन राज्यों में मध्य प्रदेश (77,073 वर्ग किलोमीटर), उसके बाद अरुणाचल प्रदेश (65,882 वर्ग किलोमीटर) और छत्तीसगढ़ (55,812 वर्ग किलोमीटर) हैं। भारत में मैंग्रोव का आवरण लगभग 4,992 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह मुख्यतः अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में केंद्रित है। मैंग्रोव उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले पेड़ और झाड़ियां होते हैं। यह खारे पानी में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं। उनकी जटिल जड़ प्रणाली अकसर पानी के ऊपर निकलती है। उन्हें कीचड़ में स्थिर रखती है और नमक को छानने में मदद करती है। मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं और तटीय क्षरण से बचाते हैं। देश में जैव विविधता के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान, 573 वन्यजीव अभयारण्य, 115 संरक्षण रिजर्व और 220 सामुदायिक रिजर्व हैं। यह विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीवों की रक्षा करते हैं।