झारखंड आंदोलनकारी बुधराम लागुरी ने कहा कि सरकार द्वारा सारंडा को सेंचुरी घोषित करने का प्रयास आदिवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जबरन आईपीसी और सीआरपीसी की धाराएँ लागू की जा रही हैं, जो संविधान की भावना के विपरीत है। लागुरी ने मांग की कि झारखंड की पाँचवीं अनुसूची को पूरी शक्ति के साथ लागू किया जाए ताकि आदिवासियों के स्वशासन और अधिकारों की रक्षा हो सके।
लागुरी ने यह भी कहा कि सारंडा को सेंचुरी घोषित करने या इस पर सुप्रीम कोर्ट में कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल और राष्ट्रपति की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों संवैधानिक पद संविधान में निहित प्रावधानों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, जिससे आदिवासी समुदाय के हितों को नुकसान पहुँच रहा है।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएसी) को अनुसूचित जनजातियों से जुड़े सभी मामलों पर राज्यपाल को सलाह देनी चाहिए और उसी के बाद सरकार को सारंडा को सेंचुरी घोषित करने पर विचार करना चाहिए।
सभा के दौरान “कोल्हान–पोड़ाहाट, सारंडा बचाओ समिति” का गठन किया गया। समिति में लागोड़ा देवगम को अध्यक्ष, अमर सिंह सिद्धू, बिरसा मुंडा और बामिया माझी को उपाध्यक्ष, बुधराम लागुरी को महासचिव तथा कुसु देवगम को सचिव चुना गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी और मूलवासी समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और एक स्वर में ‘सारंडा बचाओ’ का संकल्प दोहराया।
