मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेटियों के शिक्षित होने से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी संवरता है।इस वर्ष भी बेटियों ने अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के बल पर बोर्ड परीक्षाओं में अद्भुत प्रदर्शन किया है। इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा में कुल 90 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए, जिसमें बालिकाओं का सफलता प्रतिशत 93 प्रतिशत से अधिक रहा और इंटरमीडिएट परीक्षा में 83 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे, जिनमें बालिकाओं का सफलता प्रतिशत 86 से अधिक रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2013 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अब तक प्रदेश की कुल 2029 मेधावी बालिकाएं तकनीकी रूप से सशक्त बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बालिकाओं, महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास में जुटी है।मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की तरक्की नारी शक्ति से होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना,मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना,नंदा गौरा योजना जैसी योजनाएं प्रारम्भ की हैं। इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश की बेटियां सरकारी सेवाओं में चयनित हो रही हैं और स्वयं सहायता समूहों, स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों के माध्यम से भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण की दिशा में कई ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड सरकार बेटियों के सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश की बेटियों को चुनौतियों का सामना करते हुए खुद अपने रास्ते गढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी बालिकाओं को रोटी कपड़ा और मकान जैसी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, राज्य मंत्री प्रताप सिंह पवार, उपनिदेशक विक्रम सिंह, सचिव चन्द्रेश कुमार,परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी, नीतू फुलेरा एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे
