अब समय आ गया है कि न्यायालय क्रिकेट सहित अन्य खेलों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप न करे : सुप्रीम कोर्ट

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मसला यह है कि इन सभी मामलों में नतीजों में काफी हित जुड़े हुए हैं। जिस किसी भी खेल का व्यवसायीकरण हो गया है, तो ऐसा होना तय है। जस्टिस विक्रम नाथ ने विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों से पूछा कि आज हम क्रिकेट खेल रहे हैं। तीन-चार मामले हैं। एक मामला पहले ही दूसरे दौर के लिए स्थगित हो चुका है। यह दूसरा मामला है। दो और मामले हैं। आज आप कितने टेस्ट मैच खेलेंगे। तब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि देश में क्रिकेट के प्रति जुनून है। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि इस कोर्ट को क्रिकेट और बैडमिंटन, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कुछ चिंताओं के कारण ये मामले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आ रहे हैं। तब जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि इन सभी मामलों के नतीजों में काफी हित जुड़े हुए हैं। जिस किसी भी खेल का व्यवसायिकरण हो गया है तो ऐसा होना तय है।