कई बार मरीज की बीमारी बढ़ जाता है। दवाएं बेअसर हो जाती हैं। ऐसे में मरीज का जीवन बचाने से ज्यादा उसके कष्टों को कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि लाइलाज बीमारी से पीड़ित मरीजों की अंत तक बेहतर देखभाल की जा सके। यह जानकारी चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने दी। SGPGI के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से शुक्रवार को एंड-ऑफ-लाइफ- केयर पर कार्यशाला हुई। अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने कहा कि लाइलाज बीमारी से पीड़ित मरीजों को सम्मानजनक मृत्यु के लिए चिकित्सा संस्थानों में जीवन के अंत तक देखभाल की आवश्यकता होती है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सभी डॉक्टरों के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। निदेशक डॉ. आरके धीमान ने कहा कि संस्थान के लिए जीवन के अंत तक देखभाल के लिए एक एसओपी की आवश्यकता है। इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है। आईसीयू में जीवन के अंतिम चरण की देखभाल गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार है। चिकित्सा विज्ञान हमें बताता है कि हमारे द्वारा इलाज ले रहे कुछ मरीज असाध्य रोग से ग्रसित हैं। डीन डॉ.शालीन कुमार ने कैंसर मरीजों में पैलिएटिव देखभाल के बारे में अपना अनुभव साझा किए।
SGPGI में क्रिटिकल केयर मेडिसिन पर वर्कशॉप:एक्सपर्ट्स ने लाइफ केयर पर दी टिप्स, ICU केयर पर सबसे ज्यादा रहा फोकस
