‘गंगा में मुर्गा खाकर टांग फेंकने की इजाजत किसने दी?’:मंत्री बोलीं-मस्जिदों में हड्‌डी फेंको तो दंगे हो जाएंगे, अखिलेश को सिर्फ वोटबैंक की चिंता

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झांसी में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा- गंगा हमारी मां हैं। गंगा मां पर जाकर रोजा इफ्तार पार्टी करते, लेकिन मु़र्गे खा-खाकर टांगे फेंकने की इजाजत किसने दे दी? क्या इनकी मस्जिदों में जाकर जानवरों की हड्‌डी फेंक सकते हैं? दंगे हो जाएंगे। अखिलेश को हिंदुओं की आस्था की चिंता नहीं है। वे गलत बोल रहे हैं। तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं। 2 दिन पहले अखिलेश यादव ने गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था- नाव पर इफ्तार पार्टी क्यों नहीं कर सकते? इसी को लेकर बेबी रानी मौर्य ने निशाना साधा है। कांशीराम की जयंती मनाना चुनावी स्टंड
मंत्री बेबी रानी मौर्य शनिवार को दीनदयाल सभागार में आयोजित ‘नवनिर्माण के 9 वर्ष विकास की गति अपार-डबल इंजन की सरकार’ कार्यक्रम में पहुंची। अखिलेश के सरकार के 9 साल पूरे होने पर बीजेपी के मुक्ति के समय वाले बयान पर कहा- सपा और कांग्रेस को लगता होगा कि ये विध्वंश का दौर है। लेकिन ये प्रगति और उन्नति का दौर है। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी देश के लिए और मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के लिए काम कर रहे हैं, इससे पहले इतने कार्य कभी नहीं हुए। 2017 से पहले के आंकड़े देखिए। तब क्या होता था और अब क्या हो रहा है। ये सबको पता है। चुनाव नजदीक आते ही कांशीराम की जयंती मनाना चुनाव स्टंड है। उनको कांशीराम की याद पहले क्यों नहीं आई। इसी साल क्यों याद आई है। यूपी को नई पहचान मिली
बेबी रानी मौर्य ने कहा- 9 साल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और माफियावाद खत्म हुआ है। 9 साल में उपद्रव से उत्सव, समस्या से समाधान और अविश्वास से आत्मविश्वास के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिली है। 2017 से पहले एजेंडा था कि जाति में बांटकर आपस में लड़ाई कराते रहो। जिससे प्रदेश की उन्नति नहीं हो पाई थी। ‘न महिलाएं सुरक्षित थीं और न ही व्यापारी सुरक्षित थे’
दंगे, माफियाराज, वन डिस्टिक वन माफिया, गुंडा टैक्स, अवैध वसूली होती थी। सत्ता के संरक्षण में गुंडा-माफिया पलते थे और एक समांतर से सरकार चलाते थे। न महिलाएं सुरक्षित थी, न ही व्यापारी सुरक्षित था। मगर मुख्यमंत्री योगी की अगुवाई में यूपी में भयमुक्त समाज की स्थापना हुई है। यूपी उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश बना है। सरकार बनने के बाद हमने पहली प्राथमिकता अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरा टोलरेंस की नीति अपनाई। 2017 से पहले दंगे अक्सर होते थे, लेकिन 2017 के बाद 9 साल में कोई दंगा नहीं हुए। व्यापारी भी शाम 6 बजे के बाद अपनी दुकान आराम से बैठकर चलाता है। महिलाएं भी सुरक्षित हैं। निवेश के नए रास्ते खुले। इससे उत्तर प्रदेश लगातार उन्नति की ओर बढ़ रहा है। जाने बेबी रानी मौर्य के बारे में… घर लाने से पहले ही बांट देती थीं पूरा राशन
बेबी बचपन से ही एक संपन्न परिवार से थीं। उनके पिता की जूते की फैक्ट्री और कई बीघा खेत थे। उनके घर के पास की बस्ती में गरीब लोग रहते थे। तो बेबी के खेत से जो भी खाने का सामान आता था, वो पहले बस्ती के सभी लोगों में बांटती थीं, उसके बाद जो बचा वो अपने घर लाती थीं। बचपन से ही लोगों की सेवा करना उनकी आदतों में शामिल हो चुका था। पति से बोलीं- “मुझे चुनाव लड़ना है”
साल 1990 में बेबी की शादी बैंक अधिकारी प्रदीप कुमार मौर्य से हुई। शादी के 5 साल तक वो राजनीति में सक्रिय नहीं थीं। साल 1995 में उस समय आगरा मेयर की सीट महिला के लिए रिजर्व हुई थी। बेनी रानी मौर्य ने अपने ससुराल के लोगों और अपने पति से कहा- “मुझे चुनाव लड़ना है”। सब लोग मान गए। यही वो समय था, जब बेबी रानी ने राजनीति में अपना पहला कदम रखा। लड़ेंगे तो बीजेपी से ही
बेबी के पिता कांग्रेसी थे, लेकिन ससुर संघ से थे। उन्होंने राजनीति में आने से पहले ही सोच लिया था कि चुनाव लड़ेंगी तो बीजेपी से ही। संयोग की बात थी कि उस समय बीजेपी भी आगरा के लिए मेयर प्रत्याशी ढ़ूंढ रही थी। तो उनकी नजर बेबी पर पड़ी और बात आगे बढ़ गई। आगरा की पहली महिला मेयर बनने से शुरू हुआ राजनीतिक सफर पहली बार चुनाव लड़ीं, हार गईं
2007 में उन्होंने आगरा की एत्मादपुर सीट से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। इसके बाद साल 2019 में उन्हें उत्तराखंड का गवर्नर बनाया गया। फिर वो उत्तराखंड की दूसरी महिला राज्यपाल भी बनी।
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