मध्य प्रदेश के भोपाल से उड़ा एक गिद्ध 24 दिन में उज्बेकिस्तान पहुंच गया। गिद्ध ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को पार कर करीब 3 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। वन विभाग ने जीपीएस से उसकी निगरानी की। वन विहार के मुताबिक, सिनेरियस गिद्ध का रेस्क्यू 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से किया था। घायल और कमजोर अवस्था में मिले इस दुर्लभ गिद्ध का उपचार वन विहार नेशनल पार्क में हुआ। वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) केरवा में विशेषज्ञों ने गिद्ध का इलाज किया। स्वस्थ होने के बाद इसी साल 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे रायसेन जिले के हलाली डैम स्थित प्राकृतिक आवास में मुक्त किया था। मुक्त किए जाने के बाद यह गिद्ध लगभग एक माह तक हलाली डैम क्षेत्र में ही रहा और प्राकृतिक वातावरण में स्वयं को पुनः अनुकूलित करता रहा। जीपीएफ से ट्रेकिंग की
WWF India एवं BNHS के सहयोग से वन विहार ने इस गिद्ध की GPS ट्रेकिंग शुरू की। जिसके जरिए इसकी गतिविधियों एवं प्रवास की वैज्ञानिक निगरानी की जा रही है। ट्रेकिंग से मिली जानकारी के अनुसार, इस गिद्ध ने 10 अप्रैल को हलाली डैम से अपनी लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रारंभ की। राजस्थान से होते हुए यह पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान की सीमा पार कर 4 मई को उज्बेकिस्तान पहुंच गया। इस दौरान इसने 3000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। एक गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गया
इससे पहले अप्रैल में भोपाल से उड़ा एक गिद्ध पाकिस्तान पहुंच गया था। राजस्थान के रास्ते पाक के खानेवाल जिले में गिद्ध मिला था। वन विहार नेशनल पार्क को इसकी तब जानकारी लगी, जब गिद्ध में लगे GPS का सिग्नल नहीं मिला। गिद्ध को भोपाल के पास हलाली डैम से 30 मार्च को छोड़ा गया था। यह गिद्धों को उनके बसेरों में छोड़ने के लिए एक वैज्ञानिक रूप से चयनित स्थल है। रिलीज के बाद यह गिद्ध राजस्थान होते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच गया। 7 अप्रैल को जब इसके मूवमेंट का सिग्नल प्राप्त नहीं हुआ, तब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया को तत्काल सूचित किया गया। इसके बाद WWF-India ने अपने समकक्ष संगठन डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से संपर्क स्थापित किया। पाकिस्तान वन विभाग एवं WWF-पाकिस्तान ने खानेवाल जिले में इस गिद्ध को सफलतापूर्वक स्थानीय निवासियों से बरामद किया था।
3000Km दूर उज्बेकिस्तान पहुंचा भोपाल से उड़ा गिद्ध:24 दिन में पाकिस्तान-अफगानिस्तान को पार किया; GPS से हुई निगरानी
