विप्र फाउंडेशन ने नयी कार्य संस्कृति को जन्म दिया -चंद्रशेखर

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चंद्रशेखर ने पटना से विप्र फाउंडेशन की विशेष जूम बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक भवन शिक्षा के मंदिर बनें, संस्कारों का बीजारोपण हो, संस्कृति का संवर्द्धन हो, हमारी कार्य शैली में ऐसा युगानुकूल परिवर्तन अनुकरणीय और वंदनीय हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि विप्र फाउंडेशन द्वारा जयपुर में नवनिर्मित श्रीपरशुराम ज्ञानपीठ नामक सेंटर फॉर एक्सीलेंस एंड रिसर्च में कन्या छात्रावास, शोध संस्थान, कौशल विकास, कोचिंग सहयोग, आदि शंकर ई-लाइब्रेरी जैसे प्रकल्पों से समाज की दिशा और दशा को नया आयाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि सामर्थ्य का सदुपयोग ही अस्तित्व को सार्थकता प्रदान करता है।

चंद्रशेखर ने कहा की भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर संतों की सन्निधि में शोध कार्य अत्यावश्यक विषय है। मुगल काल से ही सनातन विरोधियों द्वारा गलत नैरेटिव सेट करने का दुष्चक्र चलाया जा रहा है। ऐसे शोध कार्यों से भ्रांतियाँ दूर होंगी और परंपराओं का वास्तविक स्वरूप सामने आयेगा। विशेष संबोधन में देश के विभिन्न राज्यों और राजस्थान के सभी जिलों से बड़ी संख्या में लोगों को ऑनलाइन जुड़ा देखकर चन्द्रशेखर ने प्रसन्नता व्यक्त की एवं लोककल्याणी कार्यों के प्रति सदैव अपना सहयोग समर्थन दोहराया। डॉ विजय बासोतिया, आर बी शर्मा, डॉ हेमंत शर्मा, मनीष पारीक ने विप्र फाउंडेशन की ओर से भावाभिव्यक्ति की। सुशील ओझा ने विशेष उद्बोधन सभा का संचालन करते हुए उपस्थिति एवं विशेष संबोधन के लिए चंद्रशेखर का अभिनंदन कर आभार जताया। परमेश्वर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।