NIT में पहली बार अचानक छुट्टी-हॉस्टल खाली करने के आदेश:स्टूडेंट्स का आरोप- 23 को आ रही जांच टीम, बात ना हो इसलिए बहाने से निकाला

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हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र में स्टूडेंट्स के सुसाइड मामले की जांच के लिए पांच मेंबरी कमेटी बनाई गई है। ये कमेटी स्टूडेंट, प्रोफेसर, वार्डन और मामले से जुड़े कर्मियों से बातचीत करेगी। हालांकि इस कमेटी की जांच पर सवाल उठने लगे हैं। NIT में पहली बार अचानक छुट्‌टी और हॉस्टल खाली करने के आदेश जारी किए गए हैं। दरअसल, NIT प्रशासन की ओर से अगले आदेश आने तक सभी स्टूडेंट्स की छुटि्टयां कर दी गई। साथ ही आज रविवार यानी 19 अप्रैल तक हॉस्टल खाली करने के आदेश जारी किए गए। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन की ओर से NIT में छुटि्टयां कर दी गई है, तो कमेटी जांच किस तरह से करेगी। 23 अप्रैल को आएगी टीम उधर, स्टूडेट्‌स ने आरोप लगाया कि पिछले महीने 29 मार्च को केंद्रीय मंत्रालय की ओर से लेटर जारी कर NIT के डायरेक्टर प्रो. बीवी रमना रेड्‌डी की प्रशासनिक और वित्तीय पावर छीन ली गई थी। इसके अगले दिन ही मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। अप्रैल के पहले सप्ताह में इस कमेटी ने NIT की विजिट कर जांच-पड़ताल की थी। यह कमेटी 23-24 अप्रैल को NIT की विजिट करेगी। अब स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि कमेटी की जांच को देखते हुए NIT प्रशासन ने छुट्‌टी नोटिस जारी कर माहौल खराब होने का बहाना बनाकर उनको बाहर कर दिया, ताकि टीम स्टूडेंट्स से बातचीत ना कर पाए।
हालांकि इससे पहले NIT प्रशासन ने 17 अप्रैल को जारी नोटिस में 4 मई तक छुट्टियां घोषित थी, जिसके बाद कई स्टूडेंट अपने घर के लिए रवाना हो गए थे। उसके बाद उनके वाइवा और एग्जाम होने थे। अब उनको NIT की वेबसाइट पर नजर रखनी होगी, क्योंकि अचानक जैसे छुट्‌टी कर दी गई। इसी तरह कभी भी उनको बुलाया जा सकता है। ढाई हजार बच्चों ने छोड़ा हॉस्टल NIT के हॉस्टल में देश-विदेश के करीब 5300 स्टूडेंट्स रह रहे थे। कल हॉस्टल छोड़ने के आदेश आने के बाद ढाई हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स हॉस्टल खाली करके अपने घर चले गए। स्टूडेंट्स का यह भी आरोप है कि NIT प्रशासन का पूरा फोकस डायरेक्टर से जुड़े मामले पर है। स्टूडेंट्स की समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं है। दूसरे देश के स्टूडेंट्स परेशान इस सिचूवेशन में सबसे ज्यादा परेशानी दूसरे देश से आए स्टूडेंट्स के लिए खड़ी हो गई। NIT में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, दुबई, ओमान, बहरीन, बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान के कई स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। आदेश आने के बाद उनका घर लौटना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि फ्लाइट की टिकट काफी महंगी पड़ रही है। दुबई और बहरीन वाले मुश्किल में दुबई और ओमान के दो स्टूडेंट्स ने बताया कि इरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रही टेंशन के बीच उनका घर लौटना काफी मुश्किल है। अभी फ्लाइट की टिकट करीब 70 हजार रुपए की पड़ रही है, लेकिन वे इसका खर्च नहीं उठा सकते हैं। हॉस्टल से बाहर रहना भी उनके लिए मुश्किल है। पहली बार हॉस्टल करना पड़ा खाली सुसाइड, सुसाइड अटेम्प्ट और डायरेक्टर के मामले को लेकर NIT में पहली बार छुटि्टयां घोषित की गई है। यह भी पहली बार हुआ कि हॉस्टल खाली करने के आदेश् दिए गए। हालांकि इस सबके पीछे NIT के कार्यकारी डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने माहौल और बच्चों के भले को देखते हुए छुट्टियां करने के आदेश जारी करने की बात कही। मीडिया के सामने आए NIT डायरेक्टर इस पूरे मसले के बीच NIT के कार्यकारी डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत सिंह मीडिया के सामने आए और अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया स्टूडेंट्स को अकेलेपन की तरफ ले जा रहा है। उनका अपने पेरेंट्स, फ्रेंड्स और टीचर से संवाद कम हो रहा है। इससे स्टूडेंट्स कमजोर हो रहे हैं। बच्चों की समस्या समझ रहे डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि स्टूडेंट्स की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। सबसे पहले हर छात्र को एक फैकल्टी मेंबर से जोड़ा गया है। वो फैकल्टी मेंबर उस छात्र से नियमित बात करेगा। अगर कोई समस्या है तो उसे समझने की कोशिश करेगा और उसे सुलझाएगा। स्टूडेंट्स की समस्याएं हल करने के लिए तीन कमेटियां बनाई गई है। पहली कमेटी में वार्डन रोज हॉस्टल जाते हैं और छात्रों से बात करते हैं। दूसरी कमेटी फैकल्टी कोऑर्डिनेटर या मेंटरशिप की है। इसमें 20-25 छात्रों के साथ एक मेंटर जुड़ा है। वो रोज फोन पर भी बात करते हैं। तीसरी कमेटी हर हॉस्टल के लिए दो फैकल्टी मेंबर्स। वे आज भी हॉस्टल जा रहे हैं और छात्रों से उनकी समस्या जानते हैं। पांच मेंबरी कमेटी कर रही जांच NIT में बच्चों के सुसाइड को देखते हुए जांच के लिए 5 मेंबरी कमेटी बनाई है। डीन स्टूडेंट वेलफेर प्रो. लीली दीवान इस कमेटी की अध्यक्ष हैं। साथ ही प्रो. जेके कपूर, प्रो. प्रवीण् अग्रवाल, डॉ संदीप सिंघल और डॉ मनोज सिन्हा भी जांच कमेटी में शामिल है। हालांकि उन्होंने सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से जांच करवाने की बात से साफ मना कर दिया।