‘ब्राह्मण भला न वेश्या’ बयान से घिरी सपा:भाजपा फ्रंटफुट पर आई, मायावती ब्राह्मणों को सम्मान दे रहीं; 12% वोट की लड़ाई

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तारीख 5 मई। दिल्ली का जवाहर भवन। ‘जाति और सांप्रदायिकता के विषाणु’ नाम की एक किताब का लोकार्पण कार्यक्रम था। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को लेकर टिप्पणी की। कहा- ब्राह्मण भला न वेश्या भली…। उनके इस बयान पर बवाल मचना ही था, हुआ भी यही। चोटी कांड और शंकराचार्य के अपमान जैसे मुद्दों पर पिछले दिनों घिरी भाजपा को अचानक कमबैक का मौका मिल गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक तक सपा को ब्राह्मण और हिंदू विरोधी साबित करने में जुट गए। सपा के अपने ब्राह्मण नेता भी इस बयान से खफा हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस मुद्दे पर सपा पर निशाना साधा। बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो भाजपा और सपा, दोनों को ब्राह्मण विरोधी बता दिया। कहा- ब्राह्मणों का असली सम्मान और सुरक्षा केवल बसपा में है। पढ़िए 12% वोट बैंक के लिए कैसे सियासी नैरेटिव बदल रहे हैं… पहले VIDEO देखिए… भाजपा बोली- सपा की मानसिकता ‘फूट डालो, राज करो’
सपा प्रवक्ता के विवादित बयान पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा- ये बयान केवल एक व्यक्ति का नहीं है। ये सपा के ‘DNA’ और ‘फूट डालो और राज करो’ की दूषित मानसिकता का प्रमाण है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले- राजकुमार भाटी की टिप्पणी सपा की मानसिकता को दिखाती है। उन्होंने कहा- ब्राह्मण समाज ने देश को ज्ञान, संस्कृति, संविधान और राष्ट्र निर्माण की दिशा दी। उनके लिए ऐसी भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है। सपा नेता आजम खान ने भारत माता को डायन कहा था। स्वामी प्रसाद मौर्या ने रामचरित मानस जलाई थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। मायावती बोलीं- ब्राह्मणों का सम्मान सिर्फ बसपा में
‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ नाम से पार्टी बना चुके अलंकार अग्निहोत्री ने 12 मई को सपा दफ्तर के बाहर धरना दिया। राजकुमार भाटी को तुरंत पार्टी से बर्खास्त करने की मांग की। अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य के अपमान पर पीसीएस अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया था। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी राजकुमार भाटी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 12 मई को उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा- राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पूरे समाज को अपमानित करना ठीक नहीं। केवल माफी से काम नहीं चलेगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ऐसे नेताओं पर एक्शन लेना होगा। बसपा प्रमुख मायावती ने राजकुमार भाटी के बयान को अशोभनीय बताया। 15 मई को एक एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा- सपा प्रवक्ता के बयान से ब्राह्मण समाज को ठेस पहुंची। सपा मुखिया को संज्ञान लेना चाहिए। ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए। सपा ने पहले दलितों, अति-पिछड़ों और मुस्लिम समाज को नाराज किया। अब ब्राह्मणों को टारगेट कर रही है। गाजियाबाद में FIR, ब्राह्मण समाज ने दी चेतावनी भाजपा नेता डॉ. अजय शर्मा ने भाटी के बयान को लेकर गाजियाबाद के कविनगर थाने में FIR दर्ज कराई। दादरी सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ब्राह्मण समाज से जुड़े संगठन प्रोटेस्ट कर रहे हैं। कई जगह भाटी का पुतला फूंका। परशुराम सेना ने महापंचायत बुलाकर इस बयान की निंदा की। करणी सेना के दीपक पंडित ने तो भाटी को फोन करके विरोध जताया। फिर पूरी बातचीत का ऑडियो वायरल कर दिया। कई संगठनों ने चेतावनी दी कि सपा को 2027 के चुनाव में ब्राह्मण समाज का जवाब मिलेगा। सपा की 27 सीटें भी नहीं आएंगी। ‘ब्राह्मण समाज ऑप्शन तलाश रहा है’ सीनियर जर्नलिस्ट योगेश मिश्रा के मुताबिक, ब्राह्मणों ने लंबे समय तक कांग्रेस को वोट दिया। फिर राम मंदिर मुद्दे से भाजपा के साथ जुड़े। इनमें अटल बिहारी वाजपेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अहम भूमिका रही। अब भाजपा में ओबीसी की राजनीति हो रही है। चोटी कांड और शंकराचार्य का अपमान हुआ। इससे ब्राह्मण निराश हैं। ब्राह्मण समाज ऑप्शन तलाश रहा है। ऐसा ऑप्शन, जो सत्ता में आ सके और इसका श्रेय ब्राह्मणों को मिले। सपा जरूर ब्राह्मणों के लिए एक विकल्प बनती दिख रही थी। लेकिन, पीडीए की मजबूती और लोकसभा में मिली सफलता के बाद लगता है कि उसे ब्राह्मणों की जरूरत नहीं है। सपा के ब्राह्मण नेता भड़के, अखिलेश फिर भी शांत सपा के ब्राह्मण नेताओं ने भाटी के बयान पर विरोध जताया है। कानपुर में आर्यनगर से विधायक अमिताभ बाजपेयी ने कहा- भाटी का बयान दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और अक्षम्य है। सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा। सपा प्रमुख से मिलकर कार्रवाई की मांग करेंगे। सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने कहा कि ब्राह्मण समाज पर ऐसी बदजुबानी अस्वीकार्य है। सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। सपा के पूर्व विधायक संतोष पांडेय ने कहा कि भाटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। ‘सपा प्रमुख को अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए’ सीनियर जर्नलिस्ट अखिलेश वाजपेयी कहते हैं- माघ मेले में बटुकों की चोटी खींचकर की गई पिटाई, शंकराचार्य अपमान मुद्दे पर भाजपा बैकफुट पर थी। ब्राह्मण समाज भी इसे लेकर नाराज था। सपा ने तब भाजपा को खुलकर घेरा था। इससे बचने के लिए ही भाजपा ने सपा के बागी डॉ. मनोज पांडेय को यूपी कैबिनेट में मंत्री बनाया। सपा प्रवक्ता भाटी का बयान ऐसे समय में आया, जब भाजपा बंगाल और असम में प्रचंड जीत के बाद यूपी पर अपना फोकस कर चुकी है। इस मामले में सपा प्रमुख को अपना कन्फ्यूजन दूर करना चाहिए। अखिलेश यादव खुद को कभी हिंदू दिखाने की कोशिश करते हैं, तो कभी टोपी पहनकर खुद को मुस्लिम हितैषी बताते हैं। यूपी में ब्राह्मण कितने बड़े गेमचेंजर हैं? यूपी में ब्राह्मणों का वोटबैंक 10-12% के आस-पास है। ब्राह्मण समाज लोकसभा की 17, विधानसभा की 100 से ज्यादा सीटों पर हार-जीत का अंतर तय करते हैं। पूर्वांचल में गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, भदोही, वाराणसी, बस्ती, बलरामपुर की कुछ सीटों पर ब्राह्मण आबादी 15% से 20% तक है। सेंट्रल यूपी की कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, लखनऊ, प्रयागराज के ग्रामीण इलाकों में ब्राह्मणों का दबदबा है। प्रदेश में मुस्लिम और जाटव के बाद ब्राह्मण बड़ा वोटबैंक है। जिसके साथ ब्राह्मण एकमुश्त गया, उसकी सूबे में सरकार बनी। 2014 से ब्राह्मण वोट भाजपा को मिल रहा है, लेकिन पार्टी अब ओबीसी वोटबैंक को टारगेट कर रही है। बहुत हद तक पार्टी ने ठाकुरों को अपने पक्ष में कर रखा है। ब्राह्मण नए ऑप्शन की तलाश कर रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, 2027 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण आखिरी समय में एकमुश्त उसके साथ चले जाएंगे, जो सरकार बदलने की स्थिति में हो। या फिर वे टैक्टिकल वोटिंग करके ब्राह्मण प्रत्याशियों का समर्थन करेंगे, भले ही वे अलग-अलग दलों से ही क्यों न लड़ रहे हों।

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