एमपी के मऊगंज जिले के बेलौही गांव में बागेश्वर धाम की तर्ज पर ‘दिव्य दरबार’ लगाया जा रहा है। लक्ष्मी नारायण बाबा दावा करता है कि वह झाड़-फूंक से चौथे स्टेज के कैंसर तक का इलाज कर सकता है। इस दावे के कारण मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से लोग यहां पहुंच रहे हैं। मंगलवार और शनिवार को सैकड़ों की भीड़ जुटती है। दावों की जांच के लिए भास्कर टीम रीवा से करीब 100 किमी दूर बेलौही पहुंची और प्रक्रिया देखी। टीम ने तीन रियलिटी चेक किए, जिनमें बाबा असफल रहा। पड़ताल में सामने आया कि ‘पर्ची सिस्टम’ पहले से तय और मैनेज है। इसमें चुनिंदा लोगों को नाम लेकर बुलाया जाता है। भरोसा बढ़ाने के लिए बाबा के परिवार के सदस्य ही उसकी प्रशंसा करते दिखे। लक्ष्मीनारायण बाबा दिव्य दरबार लगाकर आस्था के नाम पर भ्रम फैला रहा है। पढ़िए संडे स्टोरी… खुले आसमान के नीचे दिव्य दरबार
दिव्य दरबार तक पहुंचते ही जगह-जगह पोस्टर नजर आते हैं। गांव के पास खेतों के बीच आयोजन हो रहा था, जहां गाड़ियां खड़ी थीं और माइक पर बाबा की आवाज गूंज रही थी। अंदर जाने से पहले लोग जूते-चप्पल उतार रहे थे। अंदर करीब 100 लोग दरी पर बैठकर हाथ जोड़े थे। इनमें आसपास के जिलों के साथ छत्तीसगढ़ से आए श्रद्धालु भी शामिल थे। पर्ची निकालने और लोगों से मिलने का सिस्टम
पर्ची और मिलने की प्रक्रिया तय समय के अनुसार चलती है। लक्ष्मीनारायण बाबा सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक दरबार लगाता है, जहां श्रद्धालु पहले से पहुंच जाते हैं। बाबा मंच पर छोटे लकड़ी के मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को ‘विज्ञान धर्म सरकार’ बताकर रखता है और कुछ समय तक तथाकथित शक्तियों से संवाद करता है। इसके बाद दो पेड़ों के बीच बांस पर नारियल बंधवाकर माहौल बनाया जाता है। बाबा लोगों से नारे लगवाता है। फिर आंखें बंद कर बिना सीधे नाम लिए संकेत देता है कि किस गांव का व्यक्ति मौजूद है और उसकी ‘अर्जी’ लग चुकी है। समाधान देने का एक सा पैटर्न
बाबा के समाधान देने का एक तय पैटर्न दिखा। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि वह अधिकांश मामलों को ‘प्रेत बाधा’ और ‘काला जादू’ से जोड़ता है, लेकिन जिम्मेदार व्यक्ति का नाम बताने से बचता है। श्रद्धालुओं की स्थिति देखकर वह तय बातें बार-बार दोहराता है, जैसे- टीम को देखकर बाबा का रवैया बदला
भास्कर टीम ने दरबार की सच्चाई जांचने की बात रखी। शुरुआती झिझक के बाद उसने सहमति दी। टीम ने दो शर्तें तय कीं- यहीं से दावों की जांच शुरू हुई.. तीन रियलिटी चेक में खुली दावों की पोल 1. समस्या धन की, बताई बीमारी
भास्कर टीम ने एक बुजुर्ग को मंच पर बुलाया। बाबा ने आंखों में जलन, सिरदर्द और ‘किसी प्रभाव’ की बात कही, लेकिन बुजुर्ग ने साफ किया कि वह आर्थिक समस्या लेकर आया है। बाबा ने उस पर अपनी बात जोड़ने का आरोप लगाया। टीम के दखल के बाद बुजुर्ग ने पूरी बात कही। भास्कर ने जब बाबा का लिखा पर्चा देखा, उसमें धन संबंधी कोई जिक्र नहीं था। अंत में बाबा ने नारियल बांधने की सलाह देकर स्थिति संभालने की कोशिश की। इस तरह वह पहले रियलिटी चेक में नाकाम रहा। 2. बाहरी व्यक्ति पर चुप्पी
दूसरे टेस्ट में एक ऐसे व्यक्ति को लाया गया, जिसे न बाबा जानते थे, न टीम। शुरुआत में बाबा ने आनाकानी की, लेकिन बाद में उसे बुलाने की इजाजत दी। इसका नाम ब्रजभान साहू था। उसके मंच पर पहुंचते ही बाबा ने ‘सामूहिक अर्जी’ का हवाला देकर उससे बचने की कोशिश की। बाकी श्रद्धालुओं को मंच पर बुला लिया। टीम के आग्रह पर भी बाबा ने सिर्फ इतना कहा कि उसमें भूत-प्रेत बाधा नहीं है और अगली बार बताने की बात कही। लंबे इंतजार के बाद भी वह उस व्यक्ति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाया। 3. आध्यात्मिक ज्ञान की परीक्षा में फेल
बाबा खुद को भागवत, रामायण और गीता का जानकार बताता है, लेकिन सवालों का साफ जवाब नहीं दे सका। गोपी गीत, भागवत के श्लोकों की संख्या और नवधा भक्ति जैसे प्रश्नों पर वह टालमटोल करता दिखा। पहला सवाल: भागवत पारायण करने वालों को गोपी गीत याद होता है। जवाब: आता है, लेकिन अभी नहीं सुना सकता। दूसरा सवाल: भागवत में श्लोक, स्कंध और अध्याय कितने हैं? जवाब: शायद 18,000 श्लोक हैं, बाकी अभी नहीं बता सकता। तीसरा सवाल: राम कथा के संदर्भ में नवधा भक्ति की चौपाई बताइए। जवाब: संतों का संग और ईश्वर की चर्चा करने की बात कही गई है। चौथा सवाल: राम रक्षा स्त्रोत का कोई श्लोक सुनाइए। जवाब: इसे कथा के दौरान ही सुना पाऊंगा। नाम कैसे पता चलता है? 500 रुपए का ‘राज’ बाबा दावा करता है कि दरबार में कोई शुल्क नहीं है, लेकिन जांच में सामने आया कि ‘रजिस्ट्रेशन’ के नाम पर प्रति व्यक्ति 500 रुपए लिए जाते हैं। इसी दौरान नाम दर्ज किया जाता है। बाद में यही नाम मंच से पुकारा जाता है, जिससे ‘दिव्य ज्ञान’ का आभास होता है। दरबार में पहुंचे प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उनसे 500 रुपए लिए गए और अगली बार आने को कहा गया। जो नाम नहीं बताते, उन्हें मंच नहीं मिलता
जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और नाम नहीं बताया, उन्हें दरबार में नहीं बुलाया गया। पहली बार आए लक्ष्मीकांत मिश्रा ने कहा, मैंने जानबूझकर नाम नहीं बताया, इसलिए मुझे मौका नहीं मिला। उम्मीद थी, लेकिन निराशा हुई। चेक: बिना नाम बताए लोगों को नहीं बुलाया
दावे की पुष्टि के लिए रिपोर्टर ने प्रवीण त्रिपाठी और सलिल मिश्रा से रजिस्ट्रेशन न कराने और नाम न बताने को कहा। दोनों दरबार में बैठे, लेकिन उन्हें नहीं बुलाया गया। सूचना और भीड़ प्रबंधन के लिए टीम
जांच में सामने आया कि बाबा के साथ दो प्रमुख सहयोगी हैं। एक लोगों की जानकारी जुटाता है, दूसरा भीड़ और व्यवस्था संभालता है। जानकारी जुटाने का काम विकास चतुर्वेदी करता है, जो लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं समझकर बाबा तक पहुंचाता है। भीड़ प्रबंधन शिव प्रसाद शुक्ला संभालता है, जो पहले भजन मंडलियों में गाता था। परिवार के लोग ही करते हैं ‘चमत्कार’ का प्रचार
दरबार में बाबा की प्रशंसा करने वालों में मुद्रिका प्रसाद मिश्र भी शामिल था, जो खुद को ‘भूत-प्रेत बाधा’ से ठीक होने का उदाहरण बता रहा था। जांच में सामने आया कि वह बाबा के परिवार का सदस्य है। वह किस्से सुनाकर लोगों को प्रभावित करता है। डॉक्टर बोले-‘भूत-प्रेत’ दावे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यत्नेश त्रिपाठी के मुताबिक ‘भूत-प्रेत’ जैसे दावे अक्सर मानसिक समस्याओं से जुड़े होते हैं। इन्हें बढ़ावा देने से मरीज डिप्रेशन में जा सकता है। उन्होंने कहा कि इलाज काउंसलिंग और दवाओं से संभव है, जबकि भभूत से कैंसर ठीक होने जैसे दावे भ्रामक हैं। धर्माचार्यों ने भी उठाए सवाल
भागवत कथा वाचक कृष्णकांत शास्त्री ने कहा, “जिन्हें श्लोक और चौपाई का ज्ञान नहीं, वे कथा कहने के अधिकारी नहीं हैं। इससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान होता है।
रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर का बेटा बना ‘ढोंगी बाबा’:बागेश्वरधाम की तर्ज पर लगा रहा दिव्य दरबार, भास्कर के रियलिटी चेक में खुली बाबा की पोल
