जीएसटी कार्रवाई के तहत ज़ब्त रेलवे माल को छोड़ने का आदेश

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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि ज़ब्त की गई वस्तुएं रेलवे की अनन्य सम्पत्ति थीं, जिनका निजी उपयोग या बिक्री नहीं की जा सकती थी और यह जब्ती कर चोरी के किसी इरादे के बिना एक प्रक्रियात्मक चूक के कारण हुई थी। यह तर्क दिया गया कि माल की आवाजाही आंतरिक थी और सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 7 के तहत “आपूर्ति“ नहीं मानी जा सकती।

न्यायालय ने माना कि तथ्यों पर विचार किया जाना चाहिए और ऐसे मामले में कर चोरी का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अंतरिम राहत प्रदान करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि जमा राशि की वसूली के लिए कोई बलपूर्वक उपाय न किया जाए और ज़ब्त माल को तुरंत रेलवे के पक्ष में वापस करने का आदेश दिया।

यह निर्णय जीएसटी अधिनियम की धारा 129 के तहत दंड प्रावधानों के यांत्रिक अनुप्रयोग के विरुद्ध न्यायिक संयम को रेखांकित करता है। विशेष रूप से जहां संप्रभु सरकारी विभाग शामिल हों।