दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर ऊपर गाड़ियां चलेंगी, नीचे जानवर निकलेंगे:135KM यूपी से गुजरेगा, 6 घंटे का सफर 3 घंटे में पूरा होगा

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पीएम नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्धाटन करेंगे। इसकी सबसे खास बात यह है कि शुरुआत के 18 किलोमीटर तक कोई टोल नहीं देना होगा। 212 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का करीब 135 किलोमीटर (64%) हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। इसी वजह से ये जितना फायदेमंद उत्तराखंड के लिए है, उतना ही यूपी के लिए भी है। 12 हजार करोड़ की लागत करीब करीब 4 साल में एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हुआ है। जरूरी जगहों पर इंटरचेंज बनाए गए हैं। जहां जंगल है, वहां पूरा का पूरा हिस्सा एलीवेटेड कर दिया गया है। मतलब, नीचे जंगली जानवर और ऊपर फर्राटा भरती गाड़ियां। आज हम इस एक्सप्रेस-वे के बारे में सब कुछ जानेंगे। ये भी समझने की कोशिश करेंगे कि इसके बनने से दिल्ली-देहरादून का सफर कितना आसान हो जाएगा… एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर अभी दिल्ली से देहरादून जाने के लिए लोग नेशनल हाईवे-58 का इस्तेमाल करते हैं। ये रास्ता दिल्ली से गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार होते हुए देहरादून पहुंचता है। हाईवे पर करीब 10 ऐसे पॉइंट हैं, जहां ट्रैफिक जाम मिलता ही है। इस सफर में 6 से 7 घंटे का वक्त लग जाता है। इन सब मुश्किलों को देखते हुए फरवरी, 2020 में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला हुआ। लेकिन रूट में पड़ने वाले जंगलों की वजह से प्रोजक्ट का विरोध होने लगा। बाद में उसका भी हल निकाल लिया गया। 4 दिसंबर, 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया। उस वक्त पीएम मोदी ने कहा था- यह एक्सप्रेस-वे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ, हमारे विकास का भी प्रमाण होगा। इसमें एक तरफ उद्योगों का कॉरिडोर होगा। वहीं, एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी बनेगा। लोगों के जीवन को तो सरल करेगा ही, जंगली जीवों के सुरक्षित आने-जाने में मदद करेगा। तब इसकी अनुमानित लागत 11,868 करोड़ रुपए थी और दिसंबर, 2024 तक पूरा हो जाना था। शुरुआत के 18 किलोमीटर तक कोई टोल नहीं इस 6 लेन एक्सप्रेस-वे की शुरुआत दिल्ली में अक्षरधाम से होती है। यहां पहले से हाईवे था, उसे रि-डेवलप किया गया। यहां एक्सप्रेस-वे पर कुल 12 लेन हो जाती हैं। इसमें 6 लेन का एक्सप्रेस-वे और 6 लेन की ही सर्विस रोड है। दिल्ली-NCR के लोकल ट्रैफिक की वजह से एक्सप्रेस-वे पर भीड़ न बढ़े, इस वजह से शुरुआत के 32 किलोमीटर तक एक्सप्रेस-वे के अगल-बगल 6 लेन की सर्विस रोड बनाई है। दिल्ली में यह एक्सप्रेस-वे करीब 15 किलोमीटर का है। इसमें गीता कॉलोनी से खजूरी खास तक 6.4 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड है। लोनी के पास से एक्सप्रेस-वे यूपी में प्रवेश करता है। यहां तक (कुल 18 km) एक्सप्रेस-वे को टोल फ्री रखा गया है। यहां से आगे बढ़ने पर मंडोला में एक इंटरचेंज है। यहां दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से जोड़ा गया है। गाजियाबाद में 20 से 22 किलोमीटर चलने के बाद एक्सप्रेस-वे बागपत में प्रवेश कर जाता है। यहां 45 से 50 किलोमीटर का हिस्सा है। ये किसी एक जिले में सबसे ज्यादा है। यहां एक्सप्रेस-वे ग्रीनफील्ड है, यानी ये जिस जगह से गुजरा है वहां पहले सड़क नहीं, खेत हुआ करते थे। इसके आगे खेकड़ा, बागपत और बड़ौत में इंटरचेंज बनाए गए हैं। एक्सप्रेस-वे को डिजाइन करते वक्त इस चीज का ध्यान रखा गया है कि कोई भी शहर छूटे नहीं। जैसे शामली में एक्सप्रेस-वे 35 से 40 किलोमीटर गुजरा है। यहां इंटरचेंज तो बना ही है, साथ ही कैराना में भी बनाया गया है। यहां हरियाणा-यूपी बॉर्डर होने की वजह से यह जरूरी हो जाता है। शामली से आगे बढ़ते हुए एक्सप्रेस-वे यूपी के आखिरी जिले सहारनपुर में प्रवेश करता है। यहां इसकी कुल लंबाई 45 से 50 किलोमीटर है। देवबंद के आगे सहारनपुर में इंटरचेंज बनाया गया है। जहां ट्रैफिक की समस्या, वहां एक्सट्रा रोड बनाई 212 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे में 113 अंडरपास बनाए गए हैं। 5 रेलवे ओवरब्रिज हैं। 62 बस शेल्टर भी बनाए गए हैं, जहां यात्रियों से जुड़ी सुविधाएं रहेंगी। बीच-बीच में इमरजेंसी लेन बनाए गए हैं। पूरे रास्ते में 16 एंट्री-एग्जिट पॉइंट हैं। सिक्योरिटी और निगरानी की लिहाज से जगह-जगह कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों में अगर कोई एक्सिडेंट ट्रेस होता है तो वहां तक मदद पहुंचने सिर्फ 10 मिनट लगेंगे। एक्सप्रेस-वे पर 100 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से वाहन चलाए जा सकते हैं। इससे ज्यादा स्पीड होने पर चालान कट सकता है। इसके लिए एक्सप्रेस-वे पर हाई-टेक सेंसर लगाए गए हैं। सहारनपुर क्रॉस करके एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड में प्रवेश करता है। यहां से आगे रुड़की और हरिद्वार पड़ता है। हरिद्वार महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए सहारनपुर के हल्गोया गांव के पास से हरिद्वार-रुड़की तक करीब 50 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे के साथ 6 लेन का अलग रास्ता बनाया गया है। इसका मकसद ये है कि हरिद्वार जाने वालों को एक्सप्रेस-वे के ही सहारे न रहना पड़े। कुंभ के वक्त एक्सप्रेस-वे जाम मुक्त रहे। जंगल में सड़क बनाने को लेकर हुआ था विरोध हरिद्वार से देहरादून के बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। यहां से देहरादून जाने के लिए लोग NH-58 या NH-307 का सहारा लेते हैं। यह पहाड़ी रास्ता है, जो रफ्तार कम कर देता था। 50 किलोमीटर का सफर करने में करीब 2 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन, अब इसके लिए एक्सप्रेस-वे के रूप में नया विकल्प है। ये रास्ता राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस एक्सप्रेस-वे बनने का विरोध हुआ था। पर्यावरणप्रेमियों का कहना था- जंगल से सड़क गुजरेगी तो जानवरों का परेशानी होगी। इंसान और जानवरों के बीच संघर्ष बढ़ जाएगा। साथ ही हजारों पेड़ काटने पड़ेंगे। इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। इन्हीं दलीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लगाई गईं। नवंबर, 2021 में कोर्ट ने पेड़ कटाई पर अस्थाई रोक लगा दी और NGT को नए सिरे से जांच करने के निर्देश दिए। जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल बनाया गया। पैनल का जिम्मा पर्यावरण मंत्रालय के डीजी फॉरेस्ट दिया गया। सरकार और NHAI ने पैनल के सामने अपना पक्ष रखा। NHAI ने कहा- एक्सप्रेस-वे बनाने में पेड़ों की कटाई को कम से कम रखने की कोशिश की जाएगी। कॉरिडोर पूरी तरह से वन्यजीवों के अनुकूल बनाया जाएगा। पैन की रिपोर्ट और सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक्सप्रेस-वे बनाने की परमिशन दे दी थी। जंगल में पूरा रास्ता एलिवेटेड बनाया गया राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक क्षेत्र में बाघ, शेर, हाथी, हिरण जैसे जानवर पाए जाते हैं। यहां सड़क निकालने का मतलब था, इनके जीवन को डिस्टर्ब करना। इसलिए यहां एक्सप्रेस-वे को एलिवेटेड बनाया गया। जंगल के बीच 12 किलोमीटर लंबा एलीवेटेड एक्सप्रेस-वे बनाया गया है। एशिया में कहीं भी जंगल में इतनी लंबी एलिवेटेड रोड नहीं बनी है। इसके बनने से जंगली जानवरों को परेशान किए बिना गाड़ियां चलेंगी। इस एलिवेटेड रोड में कई चीजें अनोखी नजर आती हैं। जैसे रात में जानवरों के डायरेक्शन के लिए लाइटिंग लगी है। यहां सफेद नहीं, पीली टाइटिंग का प्रयोग हुआ है। गाड़ियों की आवाजें रोकने के लिए स्पेशल दीवारें बनाई गई हैं। यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है, जिसे बनाने के लिए वाइल्टलाइफ प्रोटेक्शन पर इतना ज्यादा फोकस किया गया है। वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में क्या खास, 3 पॉइंट्स… 1. 12 किमी एलिवेटेड सेक्शन- गणेशपुर (हरिद्वार) से आशारोड़ी (देहरादून) के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। इसके ऊपर से वाहन और नीचे से जानवरों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहेगी। 2. हाथियों के लिए फ्री मूवमेंट- पूरे कॉरिडोर की ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है, ताकि हाथी जैसे ऊंचे जानवर भी आराम से गुजर सकें। इसका डिजाइन हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 3. नॉइज बैरियर और लाइट कंट्रोल- वाहनों का शोर और तेज रोशनी को रोकने के लिए कॉरिडोर में नॉइज बैरियर और लाइट कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं। अब बात टोल की… हर किलोमीटर का 3 रुपए टोल देना होगा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर टोल की दरें भी सामने आ गई हैं। कार के लिए करीब 3 रुपए/किलोमीटर टोल तय है। इसे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप अपनी कार से दिल्ली से देहरादून जा रहे हैं। जाते वक्त आपको 675 रुपए टोल देना होगा। अगर आप 24 घंटे में ही वापसी करते हैं, तो आपको 675 नहीं, 335 रुपए ही देने होंगे। मिनी बस जैसी लाइट कमर्शियल गाड़ियों के लिए एक तरफ का टोल करीब 1100 रुपए है। बड़ी बस और ट्रक के लिए ये 2275 रुपए रखा गया है। इससे ज्यादा भारी वाहनों का टोल करीब 4 हजार रुपए हो जाता है। जिन लोगों को बाकी एक्सप्रेस-वे पर टोल में छूट मिलती है, वही छूट यहां भी लागू होगी। ————————– ये खबर भी पढ़ें… 40 मंत्रियों के लिए फाइनल वोटर लिस्ट खतरे की घंटी, यूपी में जितने वोट से चुनाव जीते थे, उससे 10 गुना कट गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के आंकड़े बताते हैं कि कि यूपी के 40 मंत्री 2022 विधानसभा चुनाव में जितने वोट मार्जिन से जीते थे, उसके 2 से 10 गुना वोटर उनकी सीट पर कम हो गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की सीट लखनऊ कैंट से करीब 1.25 लाख नाम कटें है, जबकि पिछले चुनाव में वे करीब 39 हजार वोट से ही जीते थे। पूरी खबर पढ़ें…