Saturday, 27 June 2026
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पटना में प्लास्टिक दाना सस्ते में दिलाने का झांसा देकर कारोबारी से 3.82 करोड़ की ठगी, जांच में जुटी पुलिस

INT News26 June 2026 at 06:12 pm

पटना से नितिश सिंह की रिपोर्ट

Patna Cyber Fraud: राजधानी पटना के खाजेकलां इलाके के रहने वाले कारोबारी धीरज से 3 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. धीरज मुख्य रूप से प्लास्टिक के कचरे को रीसायकल कर प्लास्टिक दाना तैयार करने का काम करते हैं, जिनकी रानीपुर में धीरज प्लास्टिक वर्क्स नाम से रजिस्टर्ड फैक्ट्री है. कुछ दिनों पहले उनकी कंपनी के कार्यालय में संजय पॉल नाम का एक अज्ञात व्यक्ति आया और उसने खुद को प्लास्टिक दाना के कच्चे माल का बड़ा ब्रोकर बताया. उसने कारोबारी को बाजार रेट से काफी कम कीमत पर थोक में कच्चा माल सप्लाई करने का लुभावना प्रस्ताव दिया.

दो कंपनियों के बैंक खातों में मंगाए करोड़ों रुपये

संजय पॉल के झांसे में आकर कारोबारी धीरज ने उसे भारी मात्रा में कच्चा माल सप्लाई करने का बड़ा ऑर्डर दे दिया. इसके बाद आरोपी ब्रोकर ने माल भेजने के नाम पर एडवांस और पेमेंट के लिए ‘बालाजी ट्रेडर्स’ एवं ‘ट्रिनिटी ब्रॉडवे कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ नामक दो कंपनियों के बैंक खातों के डिटेल्स कारोबारी को सौंपे और उनमें पैसा ट्रांसफर करने को कहा. शातिर के बताए अनुसार कारोबारी धीरज ने व्यापारिक भरोसा करते हुए दोनों कंपनियों के बैंक अकाउंट्स में विभिन्न तिथियों में कई बार में कुल 3 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपये की बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी.

फर्जी जीएसटी बिल देकर कारोबारी को जीता भरोसा

करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने के बाद आरोपी संजय पॉल ने कारोबारी धीरज को पूरी तरह आश्वस्त करने के लिए एक बकायदा जीएसटी (GST) बिल भी थमा दिया. इस आधिकारिक दिखने वाले बिल को पाकर पीड़ित व्यवसायी को पूरा भरोसा हो गया कि अब उन्हें उनका कच्चा माल जल्द ही डिलीवर हो जायेगा. लेकिन इस प्रक्रिया के कुछ दिनों बाद ही आरोपी संजय पॉल का मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गया और उससे हर प्रकार का संपर्क पूरी तरह टूट गया. माल की डिलीवरी न होने और ब्रोकर का फोन बंद होने के बाद पीड़ित कारोबारी के मन में अनहोनी की आशंका गहरा गई.

धोखाधड़ी के लिए बनाई गई थीं फर्जी कंपनियां

पीड़ित कारोबारी धीरज ने पुलिस को दी जानकारी में बताया है कि जब उन्होंने अपने स्तर से उन दोनों कंपनियों के संबंध में गहराई से जानकारी जुटाना शुरू किया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. जांच में पता चला कि जालसाजों ने उन शेल कंपनियों का निर्माण केवल लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से ही किया था और वे संगठित रूप से साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क चला रहे हैं, जिसमें संजय पॉल मुख्य ब्रोकर की भूमिका निभा रहा था. जब धीरज को पूरी तरह पता चल गया कि उनके साथ ठगी हो गयी है, तो उन्होंने तुरंत ही मामले की जानकारी साइबर थाना पुलिस को दी, जिसने केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है.

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