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सरकारी योजनाओं से दूर है गुमला का गेतुपानी गांव, कुआं का गंदा पानी पीते हैं 31 परिवार

INT News27 June 2026 at 10:17 am

गुमला से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट

Gumla Drinking Water Crisis: रायडीह प्रखंड की नवागढ़ पंचायत स्थित आदिवासी बहुल गेतुपानी गांव में 31 परिवार रहते हैं. प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किमी दूर बसे इस गांव लोग आज भी कुआं का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. गांव के लोगों के लिए शुद्ध पीने के पानी की सुविधा बिल्कुल नहीं है. गांव के लोगों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य और केंद्र सरकार की ओर से नल जल योजना, जल जीवन योजना सहित इस तरह की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन यह गांव इन योजनाओं से अब तक अछूता है. बरसात के दिनों में तो तीन-चार महीनों तक गांव के लोग गंदा पानी ही पीते हैं.

गांव की संदीपा देवी, सोमारी देवी, सुकरी देवी, मांगो देवी, सारे देवी, सुकरमुनी देवी, सलमा देवी, शोभा देवी, लाजवंती देवी, फगनी देवी, झालो देवी, कौशल्या देवी, पूर्णिमा देवी, जितनी देवी, सुनीता देवी, गुड़िया देवी, सुंबी देवी, सुमंती देवी, जयमती देवी, फूलमुनी देवी, पानो देवी, बुधनी देवी, ननकी देवी, रूकमनी देवी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि गांव में शुद्ध पानी की भारी समस्या है. पेयजल के लिए एकमात्र सहारा कुआं है. लेकिन बरसाती पानी जमा होकर कुआं में घुसता रहता है. जिससे पानी गंदा हो जाता है. गांव के लोगों का मानना है कि गंदा पानी पीने के कारण ही गांव में हमेशा लोग बीमार पड़ते रहते हैं. अगर गांव में जलमीनार लगा दिया जाए तो पीने के लिए साफ पानी मिलेगा और बार-बार बीमार होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी. गांव के ग्रामीणों ने उपायुक्त गुमला से पेयजल के लिए जलमीनार, चलने के लिए सड़क, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी केंद्र बनाने व बिजली सेवा से गांव को जोड़ने की गुहार लगाई है.

बीमार पड़ने पर बहंगी बनती है एंबुलेंस

गांव में आज तक सड़क नहीं बनी. पगडंडी सहारा बना हुआ है. ग्रामीण कहते हैं कि सड़क उनके गांव के विकास में सबसे बड़ा बाधक बना हुआ है. प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए पगडंडियों के सहारे आवागमन करना पड़ता है. बरसात के दिनों में तो पगडंडी रास्ता भी टूट जाता है. बार-बार श्रमदान कर सड़क को फिर से बनाते हैं. ग्रामीण कहते हैं कि गांव में लोग हमेशा बीमार पड़ते रहते हैं. कई बीमारों को इमरजेंसी में अस्पताल लेकर जाना पड़ता है. सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाता है. बहंगी में ढोकर करीब दो किमी दूर तक ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए तहंगी ही दो किमी तक एंबुलेंस का काम करती है.

सोलर प्लांट खराब होने पर चंदा से करते हैं मरम्मत

गांव के लोग आज भी बिजली सेवा से महरूम हैं. हालांकि प्रदान द्वारा पांच केवी का सोलर प्लांट लगाया गया है. लेकिन प्लांट को 10 साल पहले लगाया गया है. वर्तमान में सोलर प्लांट खराब होते रहता है. ग्रामीण कहते हैं कि अधिक लोड होने के कारण जल्दी-जल्दी खराब हो जाता है. खराब होने के बाद गांव के ही लोग चंदा और श्रमदान से उसकी मरम्मत करते हैं. रात में बच्चे को पढ़ाई करने में बहुत परेशानी होती है. ग्रामीण कहते हैं कि गांववासियों का जीवन भगवान भरोसे चल रहा है. कभी कोई अधिकारी हमारे गांव की तरफ आते भी नहीं हैं. आते तो गांव की समस्याओं को देख उसे दूर करते.

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