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तृणमूल कांग्रेस का विवाद और गहराया, ममता बनर्जी गुट की डोला सेन ने बागियों के खिलाफ पुलिस में की शिकायत

खास बातें
त्रिपुरा की पार्टी NCPI में विलय के दावों को डोला सेन ने बताया फर्जीवाड़ा
ममता बनर्जी के चेहरे पर जीते, अब पीठ में छुरा घोंप रहे : सेन
TMC Crisis Escalates: लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी निगाहें
TMC Crisis Escalates: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में छिड़ा गृहयुद्ध अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है. बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुट की राज्यसभा सांसद डोला सेन (Dola Sen) ने बागी गुट के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोला है. डोला सेन ने बागी सांसदों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास धोखाधड़ी (Forgery) और प्रतिरूपण (Impersonation) की लिखित शिकायत दर्ज करायी है.
त्रिपुरा की पार्टी NCPI में विलय के दावों को डोला सेन ने बताया फर्जीवाड़ा
पूरा विवाद टीएमसी के 20 बागी सांसदों के उस कदम के बाद शुरू हुआ, जब काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी एनसीपीआई (NCPI) में तृणमूल कांग्रेस का विलय करने और संसद में भाजपा नीत एनडीए (NDA) को समर्थन देने का दावा किया. डोला सेन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बागी गुट ने इस तथाकथित विलय के लिए फर्जी दस्तावेजों, जाली हस्ताक्षरों और तकनीकी हेरफेर का सहारा लिया है. यह आपराधिक कृत्य है.
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ममता बनर्जी के चेहरे पर जीते, अब पीठ में छुरा घोंप रहे : सेन
सांसद डोला सेन ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इन सभी सांसदों ने महज डेढ़ महीने पहले ममता बनर्जी के नाम, उनकी तस्वीरों और टीएमसी के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर लोकसभा का चुनाव जीता था. जनता ने इन्हें ममता बनर्जी की नीतियों के लिए वोट दिया था, लेकिन संसद पहुंचते ही इन्होंने अपनी मूल पार्टी और नेतृत्व के साथ विश्वासघात किया है. डोला सेन ने कहा कि जालसाजी के सहारे किये गये इस कथित विलय को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और कानूनन इन सभी की संसद सदस्यता रद्द होनी चाहिए.
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TMC Crisis Escalates: लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी निगाहें
पुलिस में की गयी इस शिकायत के बाद बंगाल से लेकर दिल्ली सियासी पारा चढ़ गया है. कानून के जानकार कहते हैं कि यदि डोला सेन के जालसाजी और फर्जीवाड़े के आरोप जांच में सही पाये जाते हैं, तो बागी सांसदों पर आपराधिक मुकदमा चलने के साथ-साथ दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत उनकी संसद सदस्यता रद्द हो सकती है. फिलहाल, बागी गुट के इस विलय प्रस्ताव और ममता गुट की इस शिकायत पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अंतिम फैसले का इंतजार है.
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