Saturday, 27 June 2026
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यूपी में को-लोकेशन अभियान को मिली रफ्तार, अब आंगनबाड़ी से सीधे स्कूल के लिए तैयार होंगे नौनिहाल

INT News26 June 2026 at 07:01 pm

UP News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में योगी सरकार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. इसके तहत प्रदेश के बच्चों को आंगनबाड़ी स्तर से ही स्कूल शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा. इसके लिए राज्यभर के आंगनबाड़ी केंद्रों और कक्षा-1 संचालित परिषदीय विद्यालयों की ‘को-लोकेशन’ और ‘वैज्ञानिक मैपिंग’ का अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है.

नौनिहालों के सर्वांगीण विकास की पहल

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त दिशा-निर्देशों के तहत यह अभियान शुरू किया गया है. इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी से प्राथमिक विद्यालय तक बच्चों का सफर आसान बनाना है. इस पहल से शुरुआती शिक्षा को मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा. इससे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. सरकार का लक्ष्य नौनिहालों के सर्वांगीण विकास के लिए एकीकृत व्यवस्था तैयार करना है.

30 जून तक मिशन मोड में पूरी होगी मैपिंग

इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है और इसे 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी और निदेशक बाल विकास सेवा हर्षिता माथुर ने संयुक्त निर्देश जारी किए हैं. मैपिंग पूरी होने के बाद संबंधित विद्यालयों का यू-डायस (U-DISE) कोड दर्ज किया जाएगा. इसके साथ ही यू-डायस और हॉट कुक्ड मील पोर्टल पर जरूरी जानकारी अपडेट की जाएगी. इससे बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास विभाग के आंकड़ों में एकरूपता आएगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी.

क्या हैं साइंटिफिक मैपिंग के तय मानक?

इस अभियान के लिए साइंटिफिक मैपिंग के स्पष्ट मानक तय किए गए हैं, जो आंगनबाड़ी केंद्र पहले से ही विद्यालय परिसर में संचालित हैं, उन्हें ‘को-लोकेटेड आंगनबाड़ी सेंटर’ के रूप में दर्ज किया जाएगा. परिसर से बाहर संचालित केंद्रों को निकटतम प्राथमिक विद्यालय से जोड़ा जाएगा. 200 मीटर के दायरे में स्थित केंद्रों की मैपिंग उसी विद्यालय से की जाएगी, ताकि बच्चों को समय पर हॉट कुक्ड मील और अन्य सुविधाएं मिल सकें. यदि किसी विद्यालय में स्थान उपलब्ध नहीं है, तो शहरी क्षेत्रों में 500 मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के भीतर स्थित विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर चयनित किया जाएगा.

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