मुख्य वक्ता डॉ. बर्नवाल ने बच्चों के मूल अधिकारों, सुरक्षित वातावरण, मानसिक व शारीरिक विकास, नाम एवं राष्ट्रीयता, सरकारी संरक्षण और आवश्यक सहयोग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की सुरक्षा और स्वस्थ विकास समाज, परिवार और सरकारी संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) रमेश चन्द्र उप्रेती ने भारतीय न्याय संहिता और यूनिफॉर्म सिविल कोड में बच्चों से संबंधित प्रावधानों पर प्रकाश डाला। डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल ने बच्चों के शारीरिक, मानसिक व यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई, पॉक्सो और जेजे एक्ट की प्रमुख धाराओं की जानकारी दी।
साइबर सेल पुलिस विभाग ने बढ़ते साइबर अपराधों, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, गैजेट्स के सही प्रयोग और बच्चों में नशे से बचाव पर जागरूकता प्रदान की। एआरटीओ टनकपुर ने मोटर वाहन अधिनियम, यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा पर उपयोगी सुझाव दिए।
शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की मुख्य बातें समझाईं। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष ने सीएनसीपी और सीआईसीएल बच्चों के लिए जेजे अधिनियम के तहत चल रही कार्य योजनाओं की जानकारी दी।
श्रम विभाग ने बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति के बचाव और पुनर्वास योजनाओं पर प्रकाश डाला। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने संरक्षण तंत्र व पोषण सेवाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, एस.के. सिंह, आर.एस. टोलिया, अनूप बमोला, मेहरबान सिंह बिष्ट, पी.एस. बृजवाल, आनन्दी अधिकारी, सुरेंद्र कुमार, सुनील तिवारी, मनीष खत्री और पुष्पा चौधरी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेन्द्र प्रसाद बिष्ट ने किया।
