अंबाला के नारायणगढ़ थाने में लखनऊ निवासी धर्मगुरु महामंडलेश्वर योगी आनंद गिरी महाराज और उसके सहयोगी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। दोनों पर आरोप है विधवा से उनके बेटे को केंद्र सरकार में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर 10 लाख 50 हजार रुपए और सोने के जेवरात हड़प लिए। कालाअंब निवासी पीड़िता सुनीता रानी के मुताबिक आरोपियों ने उनके बेटे ऋषभ बंसल को एक जाली नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। यही नहीं जॉइनिंग के लिए कई दिल्ली में चक्कर कटवाए। बाद में दोनों आरोपी फरार हो गए। एक आरोपी का फर्जी आधार कार्ड भी सामने आया है। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि सितंबर 2024 में उनकी बातचीत आनंद गिरी से हुई थी। आनंद गिरी ने खुद को मानवाधिकार सुरक्षा संघ का संस्थापक बताया। यही नहीं पीड़िता को हरियाणा में संघ की महिला विंग का अध्यक्ष बना दिया, ताकि उनका विश्वास जीता जा सके। जानिये…FIR के मुताबिक कैसे भरोसा जीतकर ठगी हुई
ब्लड डोनेशन कैंप में आए, घर पर रुके सुनीता के अनुसार, 21 दिसंबर 2025 में काला अम्ब में आयोजित एक रक्तदान शिविर रखा गया जिसमें आनंद गिरी अपने सहयोगी मनीष मिश्रा के साथ मुख्य अतिथि थे। दोनों 20 दिसंबर को ही दोनों पहुंच और पीड़िता के घर पर रुके। आनंद गिरी ने सुनीता रानी से कहा कि उनका एक शिष्य दिल्ली में बहुत बड़ी सरकारी पोस्ट पर है।
बेटे को बिना एग्जाम एएसओ बनवाने का झांसा दिया पीड़िता के मुताबिक, आनंद गिरी ने कहा कि वह उनके छोटे बेटे ऋषभ बंसल को Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions में ASO के पद पर बिना परीक्षा के सीधे लगवा सकता है। इसके बदले में ₹10 लाख का खर्च बताया गया। महिला ने झांसे में आकर उसको 50,000 नगद शगुन के तौर पर तुरंत दे दिए। इसके बाद 5 लाख रुपए अपने एक परिचित धर्मबीर शेरगिल से उधार लेकर 29 दिसंबर 2025 को आनंद गिरी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए। महिला ने बताया कि इसके बाद 5 लाख रुपए और जिसमें ₹2.5 लाख रुपए बड़े बेटे की कंपनी के मालिक से उधार लिए और ढ़ाई लाख पुत्रवधू के खाते से फरवरी 2026 में ट्रांसफर किए। गाजियाबाद के फ्लैट में दिया फर्जी जॉइनिंग लेटर महिला ने बताया कि 16 जनवरी 2026 को आनंद गिरी ने उन्हें और उनके बेटे ऋषभ को गाजियाबाद स्थित अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां उन्हें एक बंद लिफाफे में जॉइनिंग लेटर दिया गया, जो पूरी तरह से सरकारी लग रहा था। सहयोगी मनीष मिश्रा ने ऋषभ से कुछ खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए और कहा कि किसी आईएएस/आईपीएस अधिकारी से इसे अटेस्टेड करवाकर 19 जनवरी तक जॉइनिंग करवा दी जाएगी। महिला के गहने तक उतरवा लिए पीड़िता ने आगे बताया, 19 जनवरी बीत गई और जॉइनिंग नहीं हुई, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। मार्च में आरोपियों ने उनको दिल्ली बुलाया। वहां आनंद गिरी ने फोन बंद कर दिया। जब महिला गाजियाबाद स्थित फ्लैट पर पहुंची, तो बाबा ने कहा कि अधिकारी 5 लाख रुपए और मांग रहे हैं। महिला ने असमर्थता जताई तो मजबूरी का फायदा उठाकर आनंद गिरी ने उसकी स्वर्गीय माता के दिए हुए गहने सोने की अंगूठी, 1 गले की चेन और 2 बालियां यह कहकर रख लिए कि कल जॉइनिंग हो जाएगी। नकली आधार कार्ड से खुली पोल, अब मिली धमकी सुनीता के अनुसार, जब उसको शक हुआ और वह दोबारा गाजियाबाद फ्लैट पर पहुंची, तो पता चला कि दोनों आरोपी 16 मार्च से ही फरार हैं। वहां मिले अन्य लोगों से आनंद गिरी का एक नकली आधार कार्ड भी बरामद हुआ। महिला ने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी आनंद गिरी ने उन्हें फोन पर धमकाया कि- “तुम्हारे पास गिने-चुने लोग हैं, मेरे पास लाखों लोगों का सहारा है, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” इतना ही नहीं, आरोपी ने मानवाधिकार संघ के वॉट्सएप ग्रुप में महिला के खिलाफ अभद्र और अश्लील संदेश भेजे। पुलिस ने कई धाराओं में दर्ज किया केस महिला की शिकायत को जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अंबाला को भेजी गई। जांच में शिकायत सही पाई गई है। जांच में सामने आया कि आरोपी आनंद गिरी उर्फ आनंद पंडित और मनीष मिश्रा ने सरकारी नौकरी के नाम पर ₹10.50 लाख और गहने ठगे हैं और फर्जी नियुक्ति पत्र दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत थाना नारायणगढ़ में मुकदमा नंबर 155 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
