‘पुलिस विभाग में कोई सिपाही नहीं चाहता- रिश्वतखोरी में लिप्त हो, लेकिन अफसर 10 रुपए देकर भिंडी लाने भेजेंगे और भिंडी है- 12 रुपए की। फिर रास्ते में फोन पर बोलेंगे कि कद्दू भी लाना। अगर नहीं लाएंगे तो हटा दिए जाएंगे, दिक्कत आने लगेगी। बाथरूम धोना पड़ेगा। बाथरूम नहीं धोना है तो साहब की सारी व्यवस्था कीजिए।’ यह कहना है यूपी पुलिस के एक सिपाही का, जो अपने डिपार्टमेंट में घूसखोरी के राज खोल रहा है। दरअसल, पिछले दिनों लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने वीडियो जारी कर पुलिस अफसरों को ‘काला अंग्रेज’ बताया था। सुनील ने कहा था- पुलिस अफसर हर काम का पैसा लेते हैं। खुद मुझे भी रिश्वत देनी पड़ी है। कॉन्स्टेबल सुनील की बातों में कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने इन्वेस्टिगेशन किया। हमने कई पुलिस वालों से हिडन कैमरे पर बातचीत की। उनमें से कुछ ने साफ बताया कि किस तरह से मलाईदार और आरामदायक जगह पर ड्यूटी लगवाने का रेट तय है। ऊपर से नीचे तक करप्शन कैसे काम करता है? पढ़िए, पूरा खुलासा… सबसे पहले जानिए कॉन्स्टेबल सुनील ने क्या कहा था कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने कहा- लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में काले अंग्रेजों अर्थात आततायी अधिकारियों द्वारा लूट की जमींदारी व्यवस्था चलाई जा रही है। सिपाही-दीवान अपनी ड्यूटी लगवाने के लिए 2 हजार रुपए देता है। RI (रिजर्व निरीक्षक) महोदय अपना हिस्सा काटकर बाकी के पैसों को इन काले अंग्रेज अधिकारियों के कदमों में पेश करता है। भास्कर से बातचीत में सुनील ने लेनदेन के 3 किस्से बताए किस्सा-1 : HRA लगवाने के लिए देना पड़ता है पैसा ड्यूटी लगवाने के नाम पर तो पैसा देना ही पड़ता है, HRA लगवाने के लिए भी साल में दो बार जाना पड़ता है। इसके लिए भी 200-200 रुपए देना पड़ेगा। जिसकी सेटिंग है, वो 100 रुपए में ही करा लेता है। मतलब यह मानकर चलिए आपको 100-200 रुपया देना ही पड़ेगा। किस्सा-2 : मेडिकल बाबू ने मुझसे 4500 रुपए घूस ली मेरी पत्नी की रायबरेली में डिलीवरी हुई। मैं 50 हजार रुपए की चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए मेडिकल बाबू शैलेंद्र कुमार के पास बिल लेकर गया। उन्होंने कहा- 45 हजार रुपए दिलवा दूंगा। इस तरह मैंने शैंलेद्र कुमार को 5000 रुपए की घूस दी। (इस मामले में सीतापुर में तैनात बाबू शैलेंद्र कुमार का कहना है कि मैं सुनील शुक्ला को नहीं जानता, इसलिए कुछ कह नहीं सकता) किस्सा-3 : गार्द कमांडर के जरिए ऊपर तक जाता है पैसा लखनऊ में भी ड्यूटी के नाम पर पैसा लिया जाता है। आपको किसी गार्द (स्पेशल ड्यूटी) पर जाना है तो 2 हजार रुपए महीना देना पड़ेगा, ये सब जानते हैं। सिपाही देते हैं और गार्द कमांडर लेते हैं। गार्द कमांडर के माध्यम से पैसा इकट्ठा कराया जाता है। फिर ये पैसा अफसरों तक पहुंचता है। क्या सुनील सच बोल रहे हैं, यह जानने के लिए हमने कुशीनगर में तैनात कॉन्स्टेबल मोहित कुमार (बदला हुआ नाम) से बात की। कॉन्स्टेबल के अनुरोध पर हम यहां उनका नाम और पहचान उजागर नहीं कर रहे हैं। कॉन्स्टेबल: सुनील शुक्ला ने काफी कुछ बताया है, चीजों को लेकर। सही बताया है। ऐसा होता है। रिपोर्टर: चल रही हैं, मतलब ये चीजें? कॉन्स्टेबल: हां-हां, चल रही हैं। कहीं थोड़ी बहुत चलती हैं। कहीं-कहीं नहीं चलती हैं। हर जगह की अलग-अलग चीजें हैं। रिपोर्टर: ड्यूटी कैसे लगती है? कॉन्स्टेबल: ड्यूटी ऐसे लगी है कि मुंशी ड्यूटी जो होता है न, हेड मोहर्रिर ही लगाता है। जो रुपए दे देता है, उसकी ड्यूटी अच्छी जगह लग जाती है। जो नहीं देता है, उसकी चौराहे पर धूप में लग जाएगी। रिपोर्टर: अगर चौराहे पर आप ड्यूटी लगवाएंगे तो उसका कम लगता है या थाने पर? कॉन्स्टेबल: जितनी सुविधा की ड्यूटी लोगे, उतने रुपए ज्यादा लगेंगे, मुख्य बात यह है कि सब सेट मामला चलता है। रिपोर्टर: अगर चौराहे पर ड्यूटी लगवानी हो तो उसका अलग सिस्टम रहता है क्या? कॉन्स्टेबल: जिसको रुपए ज्यादा कमाने होते हैं, उसी हिसाब से वो ड्यूटी के लिए रुपए देता है। उसकी ड्यूटी लग जाती है। यही कंडीशन है। सब रुपए का मामला है। जो ज्यादा रुपए देगा, उसकी ड्यूटी उतनी अच्छी जगह पर लग जाएगी। रिपोर्टर: क्या पैसे बड़े अधिकारियों को भी देने पड़ते हैं? कॉन्स्टेबल: यह तो चैनल वाली व्यवस्था है। सीढ़ी दर सीढ़ी। मतलब नीचे से ऊपर की ओर चलता है। तुम दोगे किसी और को, वो पहुंचाएगा किसी और को, ऐसे ही चैनल वाइज पूरी व्यवस्था है। रिपोर्टर: अगर चौकी या थाना किसी को लेना हो तो पैसे देने पड़ते हैं क्या? कॉन्स्टेबल: चौराहे और चौकी में अंतर इतना है कि चौकी के रुपए ज्यादा होते हैं। चौराहे के कम होते हैं। जो कुछ नहीं देता है, वो पोस्टमॉर्टम में भेज दिया जाता है। रिपोर्टर: पोस्टमॉर्टम में क्या ड्यूटी रहती है? कॉन्स्टेबल: पोस्टमॉर्टम में यह होता है कि हर काम के लिए अपनी जेब से रुपए खर्च करो। उनका पोस्टमॉर्टम फार्म भरवाओ। रात में भी ड्यूटी लग जाती है, अगर कोई बॉडी आ जाती है तो सब देखना पड़ता है, बहुत सारे काम होते हैं। इसके बाद हमारी मुलाकात गोरखपुर पुलिस में तैनात कॉन्स्टेबल विवेक कुमार (बदला हुआ नाम) से हुई। ये 10 साल से तैनात हैं। इन्होंने भी कॉन्स्टेबल सुनील के आरोपों को सही बताया। कॉन्स्टेबल: शुक्ला जी के जो वीडियो आ रहे हैं, उसमें जो बातें हैं, एक मात्रा भी गलत नहीं है, शब्द की बात तो छोड़ दीजिए। वो जो कुछ बता रहे हैं, बिल्कुल सच बता रहे हैं। रिपोर्टर: पुलिस अफसरों में रिश्वतखोरी की कितनी सच्चाई है? कॉन्स्टेबल: विभाग में कोई भी नया कर्मचारी नहीं चाहता है कि वह रिश्वतखोरी में लिप्त हो, लेकिन अगर आप 10 रुपए देकर मुझे भिंडी लाने भेजेंगे और भिंडी है 12 रुपए की। इसके बाद फिर रास्ते में एक फोन आ जाएगा कि कद्दू भी लेते आना, फिर आप क्या करेंगे? अगर आप नहीं लाएंगे तो आप हट जाएंगे और आपको दिक्कत आने लगेगी। बाथरुम धोने वाला काम फिर मिल जाएगा। अगर आपको बाथरूम नहीं धोना है तो फिर सारी व्यवस्था आप करते चलिए। रिपोर्टर: मतलब जो दूसरे खर्च होते हैं, वो आप लोगों को अपनी जेब से करना पड़ता है? कॉन्स्टेबल: दूसरे खर्चों में अभी बहुत कुछ है। अगर इलाके में कोई लावारिस लाश मिल गई और आपकी ड्यूटी लग गई तो फिर उस लाश की पूरी जिम्मेदारी आपकी होगी। उसके पोस्टमॉर्टम के खर्च से लेकर उसके दाह संस्कार तक का खर्च सब कुछ हम लोगों को अपनी जेब से ही भरना पड़ता है। रिपोर्टर: मतलब सभी अफसर एक जैसे ही हैं क्या? कॉन्स्टेबल: नहीं, अजय पाल शर्मा हैं आईपीएस, रोहित सिंह सजवाण हैं, दुर्गा शक्ति नागपाल, आकाश कुलहरी, नवनीत सिकेरा, असीम अरुण थे, ऐसे बहुत अफसर हैं, जो अगर आपको 10 रुपए की भिंडी लेने भेजेंगे तो 10 रुपए का ही सामान मंगाएंगे। अगर 12 रुपए का कोई सामान आया तो आपको बाद में 2 रुपया देंगे भी और किसी भी तरह के काम के लिए कोई गलत दबाव कभी नहीं बनाएंगे और जिला भी बढ़िया चलाते हैं ऐसे अफसर। रिपोर्टर: शुक्ला जी का यह भी आरोप है कि अगर ईमानदारी से कोई काम करना भी चाहे तो वह पुलिस विभाग में नहीं टिक सकता? कॉन्स्टेबल: बिल्कुल! सही बात है। ईमानदार आदमी पुलिस विभाग में टिक ही नहीं सकता और अगर आप किसी तरह से टिकना भी चाहेंगे तो अन्य लोगों के लिए सारी व्यवस्थाएं गड़बड़ हो जाएंगी। हमारी इन्वेस्टिगेशन ये बातें सामने आईं- अब जानिए, कौन हैं कॉन्स्टेबल सुनील? लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला 2015 बैच के कॉन्स्टेबल हैं। अमेठी जिले के गौरीगंज स्थित पूरे रामसेवक मिश्र गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता दिवंगत हरिकरण शुक्ला होमगार्ड थे। पत्नी सुधा त्रिपाठी रायबरेली में दीवान पद पर तैनात हैं। सुनील सवा महीने में 7 वीडियो जारी कर चुके हैं। पुलिस के भ्रष्टाचार पर वीडियो बनाकर वायरल कर विभागीय छवि धूमिल करने और नियमों की अनदेखी के मामले में विभागीय जांच के बाद कॉन्स्टेबल सुनील को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि, निलंबन के बाद भी उनके तेवर नरम नहीं पड़े हैं। 10 मई को जारी वीडियो में सुनील ने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि क्या वह कोई अपराधी, आतंकवादी या नक्सलवादी हैं, जो उनके घर रात 1 बजे पुलिस भेजी गई। जांच कर रहे हैं, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे ——————————- पूरी खबर पढ़ें… यूपी में डिटर्जेंट पाउडर से बना रहे दूध:20 लीटर दूध मिनटों में 80 लीटर बना देते हैं; पहली बार कैमरे पर खुलासा एक बर्तन में सोया ऑयल और डिटर्जेंट पेस्ट लेकर हाथों से रगड़ें। इस सफेद पेस्ट को 60 लीटर पानी में मिलाएं। ऊपर से 20 लीटर शुद्ध दूध, 2 किलो शीरा पाउडर या ग्लूकोज मिलाएं। गाढ़ा करने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाएं। लीजिए 80 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार है। एक लीटर नकली दूध 25 रुपए में तैयार हो जाता है, जिस पर यह गिरोह 25 से 30 रुपए तक मुनाफा कमा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
रिश्वत लेकर साहब को नहीं देंगे तो बाथरूम धोना पड़ेगा:कुशीनगर का जवान बोला- जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग; पुलिस अफसर क्या वाकई ‘काले अंग्रेज’ हैं
