महाकुंभ खत्म हुए सालभर से ज्यादा बीत चुका है। लेकिन, 3 चेहरे आज भी चर्चा में बने हैं। पहला- माला बेचने वाली एक लड़की, जो अपनी आंखों की वजह से वायरल हो गई। दूसरा- आईआईटीएन बाबा, जिन्होंने IIT बॉम्बे से पढ़ाई की, फिर सब छोड़कर संन्यास ले लिया। तीसरी- हर्षा रिछारिया, जो निरंजनी अखाड़े के रथ पर भगवा पहनकर सवार हुईं तो सबकी नजरें उनकी ओर टिक गईं। माला बेचने वाली लड़की ने मुस्लिम युवक से शादी कर ली। बाद में पता चला, वो नाबालिग है और प्रेग्नेंट भी। आईआईटीएन बाबा ने संन्यास के बीच ही शादी कर ली, घर भी लौट आए। हर्षा ने अपना पिंडदान करके विधिवत संन्यास ले लिया। आज की संडे बिग स्टोरी में हम इन्हीं तीन चेहरों की बात करेंगे। सबसे पहले उस माला बेचने वाली लड़की की बात, जिसकी चर्चा पूरे देश में है। 1. महाकुंभ गर्ल भूरी आंखों से चर्चा में आई, फिल्म में काम मिला मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की 16 साल की लड़की महाकुंभ में परिवार के साथ माला बेचने आई। भूरी आंखों वाली इस लड़की के चेहरे पर नेचुरल ब्यूटी नजर आती थी। महाकुंभ में आए कुछ यूट्यूबर्स उसके साथ वीडियो बनाने लगे। लोग सेल्फी लेने लगे। कुछ ही दिन में सोशल मीडिया सेंसेशन बन गई। लड़की पॉपुलर हो गई। मेन स्ट्रीम मीडिया ने भी इंटरव्यू लेना शुरू किया। लोग इतना पीछे पड़े कि पिता ने बेटी को घर वापस भेज दिया। बॉलीवुड फिल्मों के डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने मीडिया में उस लड़की की चर्चा सुनी, तस्वीरें देखीं। इसके बाद सनोज लड़की से मिले और फिल्म में काम करने का ऑफर दे दिया। लड़की ने स्वीकार कर लिया। अभिनेता राजकुमार राव के भाई अमित राव फिल्म में लीड रोड निभा रहे थे। फिल्म का नाम था ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग देहरादून में हुई। 2025 के आखिर में फिल्म बनकर तैयार हो गई। 10 फरवरी को टीजर लॉन्च हुआ। लेकिन, इसके बाद से विवाद शुरू हुआ और फिल्म अभी तक रिलीज नहीं हो पाई। परिवार से बगावत कर मुस्लिम युवक से शादी की 11 मार्च को लड़की अचानक फिर सुर्खियों में आ गई। उसने केरल में तिरुवनंतपुरम के श्री नैनार देवा मंदिर में मुस्लिम साथी फरमान खान से शादी कर ली। बाद में कोर्ट मैरिज भी की। लड़की के पिता बेटी से मिलने केरल गए, लेकिन मुलाकात नहीं करने दी गई। वापस आए तो मीडिया के सामने फूट-फूटकर रोने लगे। बोले- मेरी बेटी ने अपनी मर्जी से नहीं, फरमान के दबाव में शादी की है। उससे गलत काम करवाया जा रहा। डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने इस शादी को लव जिहाद बताया। उन्होंने कहा- इस शादी के पीछे एक बड़ा षड्यंत्र है। जिस तरह केरल ले जाकर शादी करवाई गई, ये कई सवाल खड़ा करता है। सनातन को बदनाम करने की कोशिश है। मैं सीएम मोहन यादव से मुलाकात करूंगा और हस्तक्षेप की मांग करूंगा। इस बयान पर लड़की ने कहा- सनोज मिश्रा अच्छा आदमी नहीं है। उसने मुझे फिल्म के दौरान कई बार गलत तरीके से छुआ। परिवार को बताया तो उन लोगों ने भी मेरा साथ नहीं दिया। लड़की नाबालिग निकली, अब पति पर पॉक्सो का केस लड़की के परिवारवालों ने दावा किया कि बेटी नाबालिग है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत की। जांच में पता चला कि लड़की का जन्म 30 दिसंबर, 2009 को हुआ था। वो अभी 16 साल की है। इसके बाद खरगोन के महेश्वर थाने में लड़की के पति फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। इसमें कहा गया कि लड़की को बालिग बताकर शादी कराई गई, जबकि शादी के वक्त उसकी उम्र 16 साल 2 महीने 12 दिन थी। कोर्ट ने पति फरमान को पेश होने का आदेश दिया। फरमान पत्नी के साथ कोर्ट में पेश नहीं हुआ। मध्यप्रदेश पुलिस केरल पहुंची, तो फरमान ने कहा कि लड़की प्रेग्नेंट है, अभी यात्रा नहीं कर सकती। डॉक्टरों ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। इसलिए पुलिस और कोर्ट के सामने पेश नहीं हो सकती। मध्यप्रदेश पुलिस ने फरमान के इस दावे के बाद स्थानीय प्रशासन से मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा है। 2. हर्षा रिछारिया (हर्षानंद गिरि) महाकुंभ में नजर आईं, अगले दिन 3 लाख फॉलोवर बढ़ गए महाकुंभ का दूसरा चर्चित चेहरा हर्षा रिछारिया हैं। हर्षा अब इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि उन्होंने 19 अप्रैल, 2026 को उज्जैन में संन्यास ले लिया। पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महराज ने उन्हें संन्यास दीक्षा दी। अक्षय तृतीया के दिन शिप्रा दिन के तट पर एक विशेष अनुष्ठान हुआ और हर्षा का नया नाम ‘साध्वी हर्षानंद गिरि’ रखा गया। हर्षा यूपी के झांसी जिले के मऊरानीपुर इलाके की रहने वाली हैं। 26 मार्च, 1994 को उनका जन्म हुआ था। कुछ वक्त बाद पूरा परिवार भोपाल में बस गया था। हर्षा के पिता दिनेश रिछारिया बस कंडक्टर हैं और मां किरण बुटीक चलाती हैं। हर्षा कार्यक्रमों में एंकरिंग करती थीं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फोटो-वीडियो शेयर करती थीं। कुछ ब्रांड के प्रमोशन भी करती थीं। महाकुंभ से पहले किसी धार्मिक आयोजन में नहीं दिखी थीं। 4 जनवरी, 2025 को हर्षा निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आईं। तस्वीरें वायरल हो गईं। लोग हर्षा को खोजने लगे। उस दिन हर्षा के इंस्टाग्राम पर 6.67 लाख फॉलोवर थे। अगले दिन यह आंकड़ा 10 लाख को पार कर गया। हर्षा निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महराज के आश्रम में उनकी शिष्या बनकर रहने लगीं। उस दौरान हर्षा के खूब इंटरव्यू छपे। यह सब साधु-संतों को खराब लगा। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महराज ने हर्षा के रथ पर बैठने को लेकर सवाल खड़े किए। बोले- इससे समाज में गलत संदेश गया। धर्म का रास्ता छोड़ने की बात कही, फिर संन्यास ले लिया हर्षा 2026 के प्रयागराज माघ मेले में भी पहुंची। 12 जनवरी को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा- मैं सनातन धर्म का प्रचार छोड़ रही हूं। पिछले एक साल में मुझे बहुत विरोध झेलना पड़ा। किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठाना आसान है। मैं सीता नहीं हूं, जो अग्निपरीक्षा दूं। अब मैं अपने पुराने प्रोफेशन में वापस चली जाऊंगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। 3 महीने बाद ही हर्षा ने उज्जैन में संन्यास ले लिया। हर्षा के संन्यास पर मध्यप्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने ऐतराज जताया। कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। प्रयागराज महाकुंभ के बाद सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास स्वीकार्य नहीं है। सुमनानंद महराज की भी जांच होनी चाहिए, उन्होंने दीक्षा कैसे दिलवाई। अनिलानंद ने हर्षा के पीछे विदेशी फंडिंग तक की बात कही। इससे नाराज हर्षा ने एक वीडियो जारी किया। बोलीं- अगर एक भी आरोप साबित हुआ, तो मैं अपनी पूरी संपत्ति अर्पित कर दूंगी। आरोप गलत हुए तो 1 करोड़ रुपए की मानहानि का दावा करूंगी। मैं बैंक डिटेल्स देने को तैयार हूं। लगातार चश्मा पहनने की बात पर हर्षा ने कहा कि वे डॉक्टर की सलाह पर ऐसा करती हैं। अपनी सेहत का ख्याल रखना जरूरी है, बाकी लोग कुछ भी सोचें। 3. IITian बाबा उर्फ अभय सिंह मोह-माया त्याग संन्यासी बने IITian बाबा, फिर से गृहस्थ हो गए महाकुंभ में तीसरे सबसे चर्चित व्यक्ति IITian बाबा रहे। इनका नाम अभय सिंह है। हरियाणा के झज्जर शहर के अभय ने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और कनाडा चले गए। वहां एक एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम किया। सैलरी 3 लाख रुपए महीने के आस-पास थी। 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लगा तो अभय वहीं फंस गए, लेकिन कुछ दिन के बाद भारत लौट आए। नौकरी से अभय का मोह भंग हो चुका था। घूमने का शौक बढ़ा। कभी केरल गए, तो कभी हिमाचल। 2024 में अभय ने घर से नाता तोड़ लिया। किसी से कोई बातचीत नहीं। परिवार के लोगों ने काफी कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। काशी में अभय को गुरु के रूप में सोमेश्वर पुरी मिले। अभय वहां फक्कड़ों की तरह घूम रहे थे। जिज्ञासावश सोमेश्वर पुरी से बात शुरू की और उनके शिष्य बन गए। महाकुंभ में अभय जूना अखाड़े के शिविर में रहने लगे। एक दिन बातचीत में उन्होंने अपनी पुरानी जिंदगी के बारे में बताया। जैसे ही लोगों को पता चला कि IIT बॉम्बे से पढ़े हैं, अब मोह-माया त्याग दी तो लोग इन्हें देखने आने लगे। शुरुआत में अभय ने मीडिया से बात की, लेकिन धीरे-धीरे वे चिड़चिड़े होते चले गए। कई बार उन्होंने उल्टे-सीधे बयान दिए। नोएडा के एक स्टूडियो में मार-पीट की। 19 जनवरी, 2025 को जूना अखाड़ा ने उन्हें अपने शिविर से निकाल दिया। इसके बाद अभय महाकुंभ में घूम-घूमकर अलग-अलग टेंट में रहने लगे। महाकुंभ के बाद मार्च, 2025 में जयपुर पुलिस ने अभय को गांजे के साथ पकड़ा। NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। अभय ने कहा- ये नशे के लिए नहीं, साधुओं की परंपरा के अनुसार ‘प्रसाद’ के रूप में रखा था। हिमाचल में शादी की और घर पहुंच गए महाकुंभ के बाद अभय सिंह कहां गए, किसी को कुछ खबर नहीं थी। फिर अचानक पता चला कि अभय ने 15 फरवरी, 2026 को प्रीतिका नाम की लड़की से हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज कर ली। प्रीतिका ने भी इंजीनियरिंग की है। वो कर्नाटक की रहने वाली हैं। 5 अप्रैल को अचानक दोनों झज्जर पहुंच गए। अभय के मां-बाप दोनों खुश हो गए। पिता कर्ण सिंह बोले- मुझे पहले नहीं पता था कि अभय ने शादी कर ली है। उसके इस फैसले से हम खुश हैं। मां शीला ने अपने बेटे और बहू की आरती उतारी। पत्नी प्रीतिका कहती हैं- अभय सरल नेचर के ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं इनसे 1 साल पहले मिली थी। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाएं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… शैतानी करता था, इसलिए गुरुकुल में पीट-पीटकर मार डाला, लखनऊ में 6 दिन पहले एडमिशन हुआ था; पढ़िए आरोपी महंत का कबूलनामा दिव्यांश गुरुकुल की परंपरा के मुताबिक ढल नहीं पा रहा था, दिनभर शैतानी करता था। 3-4 दिनों से उसकी शैतानियां बढ़ गई थीं। मुझे चिढ़ होने लगी थी। लात-घूसों से पिटाई की। कपड़े उतरवाकर पीठ पर डंडे मारे। वह बेसुध हो गया, देखा तो दिव्यांश मर चुका था। ये गुरुकुल संचाकल हत्यारोपी महंत सौरभ मिश्रा का कबूलनामा है। पूरी खबर पढ़ें…
हर्षा ने संन्यास लिया, IITian बाबा ने शादी की:माला बेचने वाली लड़की शादी करके फंसी; महाकुंभ के 3 चेहरे फिर से चर्चा में
