पहलगाम हमले में शहीद लेफ्टिनेंट की पहली बरसी:करनाल के स्कूल में दी श्रद्धांजलि, जन्मदिन पर लगेगा रक्तदान शिविर; पिता बोले-आज भी दर्द नहीं भूले

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22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें करनाल के सेक्टर-6 निवासी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे। शादी के कुछ ही दिन बाद पत्नी के साथ घूमने गए विनय को आतंकियों ने गोली मार दी थी। एक साल बाद भी परिवार उस दर्द से बाहर नहीं निकल पाया है, लेकिन देशभर से मिले साथ ने उन्हें संभालने का हौसला दिया है। वहीं विनय को श्रद्धांजलि देने के लिए आज उसके स्कूल की तरफ से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। वहीं परिवार के द्वारा आने वाली 1 मई यानी विनय के जन्मदिन के दिन रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शादी के 5-6 दिन बाद उजड़ गया परिवार
शहर के सेक्टर-6 निवासी विनय नरवाल की शादी 16 अप्रैल 2025 को हुई थी। शादी के बाद वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर जाने की तैयारी कर रहे थे। पहले उनका प्लान यूरोप जाने का था, लेकिन वीजा नहीं मिलने के कारण उन्होंने अंतिम समय में जम्मू-कश्मीर जाने का फैसला लिया। शादी के करीब 5-6 दिन बाद वे अपनी पत्नी के साथ वहां पहुंचे और 21 अप्रैल के आसपास पहलगाम घूमने गए। यह उनकी शादी के बाद पहली यात्रा थी, जो उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन गई। 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुआ हमला
22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 1 से 3 बजे के बीच पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने अचानक पर्यटकों पर हमला कर दिया। हमलावर आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने सुनियोजित तरीके से लोगों को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने कई लोगों से धर्म पूछकर या पहचान की पुष्टि कर गोली मारी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पत्नी के सामने मारी गई गोली
हमले के समय विनय नरवाल अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। आतंकियों ने उन्हें नजदीक से गोली मारी। उनके शरीर के कई हिस्सों जैसे गर्दन और छाती में गोलियां लगीं। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि जिसने भी सुना, वह सन्न रह गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। पिता राजेश नरवाल बोले-आज भी नहीं भूल पाया वह दिन
विनय नरवाल के पिता राजेश नरवाल ने बेटे को याद करते हुए कहा कि 22 अप्रैल 2025 का दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन है। उन्होंने कहा कि वह आज तक इस घटना से उबर नहीं पाए हैं, लेकिन परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पोस्टिंग पहले दिल्ली और पंजाब में रही, जिसके कारण वह घर पर कम रह पाते थे। इस दौरान विनय और उसकी बहन की परवरिश दादा-दादी ने की। शादी के बीच बेटे ने बताए थे भविष्य के सपने
राजेश नरवाल ने बताया कि शादी की तैयारियों के दौरान एक दिन वे, विनय और उसके मामा दिल्ली शॉपिंग के लिए जा रहे थे। रास्ते में विनय ने अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया था। उसने कहा था कि वह बच्चों के नाम क्या रखेगा, उनकी पढ़ाई कहां होगी, निवेश कैसे करेगा और 50 साल की उम्र के बाद जिंदगी कैसी होगी। उसने घर को दोबारा बनाने की भी बात कही थी। पिता ने कहा कि उसकी हर बात आज भी याद आती है और दिल को झकझोर देती है। धार्मिक आस्था से मिल रहा सहारा
इस गहरे दुख के बीच परिवार को श्रीमद्भागवत गीता के पाठ से सहारा मिल रहा है। राजेश नरवाल ने कहा कि यही एक ऐसा सहारा है, जिससे उन्हें मानसिक मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि दुख कभी कम नहीं होगा, लेकिन इसे सहने की ताकत जरूर मिली है। ऑपरेशन सिंदूर और महादेव पर जताया गर्व
राजेश नरवाल ने कहा कि सरकार ने आतंकियों के खिलाफ जो कार्रवाई की, उस पर उन्हें गर्व है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के जरिए आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया गया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक इच्छा है कि विनय नरवाल के नाम पर किसी मेडिकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी का नाम रखा जाए, ताकि उसकी सेवा भावना हमेशा जीवित रहे। दादा-दादी से था गहरा जुड़ाव
राजेश नरवाल ने बताया कि विनय का अपने दादा-दादी के साथ गहरा लगाव था। वह उनके साथ ज्यादा समय बिताता था और उनसे बहुत जुड़ा हुआ था। परिवार में उनका रिश्ता बेहद भावनात्मक था और वह हमेशा उनका सम्मान करता था। देशभर से मिला साथ, जताया आभार
हमले के बाद पूरे देश से लोगों ने परिवार का साथ दिया। राजेश नरवाल ने बताया कि आज भी देश-विदेश से लोगों के फोन आते हैं, जो उनका हालचाल पूछते हैं। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें वे जानते तक नहीं, लेकिन फिर भी उनका हाल जानने के लिए संपर्क करते हैं। उन्होंने इस सहयोग के लिए सभी लोगों का दिल से आभार जताया। आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
राजेश नरवाल ने कहा कि सरकार ने हमले के बाद जो कदम उठाए, वे सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने कायराना हरकत की थी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अगर कहीं भी कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत एजेंसियों को सूचना दें। करनाल में शहीदों के नाम पर बना स्मारक
उन्होंने बताया कि करनाल में विनय नरवाल समेत अन्य शहीदों की याद में एक स्मारक पट बनाया गया है। इसमें जिले के उन सभी लोगों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है। यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को शहीदों की बहादुरी और बलिदान की याद दिलाता रहेगा। 1 मई को जन्मदिन पर लगेगा रक्तदान शिविर
राजेश नरवाल ने बताया कि 1 मई को विनय नरवाल का जन्मदिन है। इस मौके पर हर साल की तरह इस बार भी रक्तदान शिविर लगाने की योजना है, यदि सब कुछ ठीक रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से बेटे की याद को जीवित रखा जाता है और समाज की सेवा भी होती है। देशवासियों को दिया सतर्क रहने का संदेश
राजेश नरवाल ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए सभी को अपना फर्ज निभाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कहीं भी कोई शक हो, तो तुरंत इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन आम लोगों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। एक साल बाद भी जिंदा है दर्द, लेकिन गर्व भी उतना ही
पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन विनय नरवाल की शहादत आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। परिवार के लिए यह दर्द कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन उन्हें अपने बेटे पर उतना ही गर्व भी है। यह घटना न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरी चोट बनकर सामने आई, जिसने सभी को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया।