झज्जर के गिरावड़-बिरधाना में खेतों में लगी आग:20 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख; बिजली की लाइनों में शॉर्ट-सर्किट

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झज्जर जिले में दो गांव के खेतों में ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने किसानों के दिल झकझोर दिए। खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल, जो कुछ ही दिनों में घरों तक पहुंचने वाली थी, अचानक आग की भेंट चढ़ गई। गांव बिरधाना में खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों में शॉर्ट सर्किट हुआ और एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते तबाही का रूप ले लिया। सूखी खड़ी गेहूं की फसल ने आग को और भड़काया, ऊपर से तेज हवाओं ने लपटों को ऐसा रफ्तार दी कि कुछ ही मिनटों में करीब 20 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। आग यहीं नहीं रुकी बिरधाना से उठी लपटें शाम तक पास के गांव गिरवाड़ तक पहुंच गईं, जहां किसान नेत्रपाल डबास की करीब 5 एकड़ खड़ी फसल भी जलकर खाक हो गई। फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह जल चुकी थी। पीछे बचा सिर्फ राख, धुआं और किसानों की टूटी हुई उम्मीदें। मायाराम की दर्द भरी कहानी आग ने सबसे ज्यादा चोट किसान मायाराम को दी। उनकी जिंदगी दो सहारों पर टिकी थी एक छोटी सी नौकरी, जिससे करीब 6 हजार रुपए महीना मिलता है और दूसरी उनकी खेती। इस बार उनकी पूरी उम्मीद गेहूं की फसल पर थी। करीब 6 से 7 एकड़ में खड़ी फसल अच्छी थी, और उन्हें लगा था कि इस बार घर की हालत सुधर जाएगी, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ खत्म हो गया। टूटी हुई आवाज में मायाराम ने कहा कि पूरे साल मेहनत की थी अब कुछ नहीं बचा। नौकरी से घर नहीं चलता, फसल ही सहारा थी। मायाराम की आंखों में आंसू हैं और सामने बिखरी पड़ी है उनकी मेहनत नजर आ रही हैं। बिजली की लाइनों में शॉर्ट सर्किट खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। चिंगारी सीधे सूखी फसल पर गिरी और गर्मी व तेज हवा ने आग को विकराल बना दिया। किसानों ने खुद भी आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि उनके सामने बेबसी के अलावा कुछ नहीं बचा। हर साल की यही परेशानी किसान नेत्रपाल व अन्य ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल गर्मियों में जर्जर बिजली तार और सूखी फसल मिलकर ऐसी घटनाओं को जन्म देते हैं। शिकायतें होती हैं, लेकिन समाधान नहीं और हर बार किसान ही अपनी मेहनत की कीमत चुकाते हैं। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा घटना के बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लेना शुरू कर दिया है। प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया की बात कही जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि नुकसान इतना बड़ा है कि मुआवजा भी उनकी भरपाई नहीं कर सकता। सरपंच ने की उचित मुआवजे की मांग गांव गिरवाड़ के सरपंच सोनू भी हादसे के बाद किसानों के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि आग से प्रभावित सभी किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए। सरपंच सोनू का कहना है कि यह नुकसान किसी एक किसान का नहीं, बल्कि पूरे इलाके की मेहनत और आजीविका पर पड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों ने सालभर खून-पसीना बहाकर फसल तैयार की थी, जिसे एक चिंगारी ने खत्म कर दिया। उन्होंने प्रशासन से अपील की, कि नुकसान का सही आकलन कर तुरंत राहत राशि जारी की जाए, ताकि किसान दोबारा अपनी जिंदगी और खेती को संभाल सके।