कहते हैं कि पुलिस की वर्दी बाहर से जितनी सख्त होती है, उसके भीतर कभी-कभी उससे कहीं ज्यादा संवेदनशील और कोमल दिल धड़क रहा होता है। कुछ ऐसा ही नजारा कानपुर के ग्वालटोली थाने में देखने को मिला, जहां अपनों से बिछड़ी एक मूक बधिर और भूखी मासूम बच्ची जब महिला कॉन्स्टेबल मंदाकिनी के पास आई, तो उनके भीतर की ममता जाग उठी। खुद दो बेटों की मां मंदाकिनी को उस बिछड़ी बच्ची में बेटी की ममता दिखी, उसे अपने हाथों से नहलाया, खाना खिलाया और दुलारा। इतना ही नहीं, साथी महिला दरोगा कंचन रागिनी बच्ची के लिए कपड़े लेकर आईं। घरवालों से मिलाने के लिए बच्ची को दुलराते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट की। रील पोस्ट करने के 24 घंटे के भीतर बच्ची की मां थाने पहुंच गई। मां को देख बच्ची हंसते हुए दौड़ पड़ी, अपनी मां के गले लग गई, तो थाने में मौजूद कॉन्स्टेबल मंदाकिनी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भावुक होकर कहा- बच्ची में मुझे अपनी बेटी दिखी। बुधवार दोपहर एक बजे बच्ची अपनी मां के साथ घर गई। दैनिक भास्कर ने उस कॉन्स्टेबल से बात की तो वह बताते-बताते रो पड़ीं, विस्तार से पढ़िए- अलम का जुलूस देखते हुए बच्ची घर से दूर चली गई कानपुर के बेकनगंज, नाजिरबाग निवासी काबुल शेख कबाड़ बीनने का काम करते हैं। परिवार में पत्नी रेशमा खातून और तीन बच्चे मायनरा (20), शब्बीर (13) और 8 साल की परवीन है। रेशमा ने बताया कि परवीन मूक बधिर है। जबकि मायनरा का निकाह हो चुका है। 22 जून, सोमवार को उनकी बेटी की डिलीवरी होनी थी, जिसके लिए वह बेटी के पास गई थीं। पति काम पर गए थे, इस दौरान घर में बेटी परवीन और शब्बीर अकेले थे। दोपहर में बेटी घर के बाहर खेल रही थी, तभी तलाक महल से अलम का जुलूस निकला। 8 साल की बेटी परवीन जुलूस के पीछे–पीछे चली गई। देर शाम वह घर पहुंची तो बेटी घर में नहीं मिली। बेटे शब्बीर से जानकारी की तो उसने इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने आसपास के घरों में खोजबीन की, लेकिन बेटी का कोई पता नहीं चला। फिर उन्होंने बेकनगंज पुलिस को मामले की जानकारी दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 3 तस्वीरें देखिए- गश्त के समय पुलिस को सड़क किनारे बच्ची मिली ग्वालटोली पुलिस सोमवार देर रात इलाके में गश्त कर रही थी। सिविल लाइंस स्थित शीलिंग हाउस स्कूल के सामने से पेट्रोलिंग करते हुए पुलिस निकली तो उन्हें एक बच्ची सड़क किनारे पीली फ्रॉक पहने बैठी मिली। पुलिसकर्मियों ने बच्ची से पूछताछ की, लेकिन मूक बधिर होने के कारण वह कुछ बता न सकी। इस पर पुलिसकर्मी उसे थाने लेकर पहुंचे और महिला हेल्प डेस्क में तैनात दरोगा कंचन रागिनी के सुपुर्द कर दिया। कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ड्यूटी पर पहुंचीं तो बच्ची ने हाथ पकड़ लिया कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने बताया- मैं मंगलवार सुबह 9 बजे महिला हेल्प डेस्क में पर ड्यूटी पर पहुंचीं, तो गंदे कपड़े पहने बच्ची ने मेरा हाथ पकड़ खाना खिलाने का इशारा किया। मैंने उससे इशारे में पूछा कि भूख लगी है? जिस पर उसने हां में सिर हिलाया। फिर मैंने आनन–फानन में थाने की मेस से बच्ची के लिए छोले, चावल, रोटी लेकर आई। उसे प्यार से बैठा कर खाना खिलाया। पेट भरने के बाद बच्ची मंदाकिनी को दुलारा। फिर बच्ची ने नहलाने का इशारा किया। फिर थाना परिसर में लगे हैंडपंप पर बच्ची को अपने हाथों से नहलाया। यह नजारा देख थाना परिसर में मौजूद हर पुलिसकर्मी अचंभित था। इतने बीच में ही थाने में तैनात दरोगा रचना भी मंदाकिनी का हाथ बंटाने पहुंची। यह सब नजारा हेल्प डेस्क में तैनात दरोगा कंचन रागिनी ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया। इसके बाद दरोगा कंचन रागिनी अपनी स्कूटी लेकर बच्ची के लिए खरीदारी करने निकल गईं और उसके लिए दो टीशर्ट, पैंट खरीद कर लाई। कपड़े देखकर परवीन खुश हो गई और झट से उसने नए नवेले कपड़े पहन लिए। कुछ देर बाद दिन ढलने लगा, लेकिन बच्ची के परिजनों का पुलिस को कोई सुराग नहीं लगा। जिस पर मंदाकिनी की चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने बच्ची को अपने साथ घर ले जाने की सोची, लेकिन कर्तव्यों की बेड़ियों के कारण वह उसे अपने साथ नहीं ले सकी। कर्नलगंज पुलिस ने दिखाया वीडियो, भागते हुए पहुंची मां इसके बाद उन्होंने बच्ची को उसके परिजनों से मिलाने की ठानी और दरोगा कंचन रागिनी के बनाए गए वीडियो को उनके ही इंस्टाग्राम आईडी Si_Kanchan_ragini से पोस्ट किया। कुछ ही देर में पोस्ट वायरल होने लगा। इधर बच्ची की तलाश में भटक रही रेशमा बेकनगंज, बजरिया थाने की खाक छानने के बाद कर्नलगंज थाने पहुंची, जहां पुलिस ने उन्हें दरोगा कंचन रागिनी का पोस्ट किया हुआ वीडियो दिखाया। वीडियो देखते ही रेशमा की आंखों से आंसू छलक पड़े, उन्होंने हामी भरते हुए कहा– हां साहब, यही मेरी बेटी है। बुधवार दोपहर करीब 1 बजे बच्ची की मां रेशमा, बुआ संजेमा खातून, मौसी साबिया, रोशन ग्वालटोली थाने की महिला हेल्प डेस्क पहुंचीं। यहां उनकी मासूम बच्ची बैठी थी। अचानक से तो रेशमा बेटी को पहचान नहीं सकी, लेकिन मां को देखते ही बच्ची खिलखिला उठी और झट से उन्हें गले लगा लिया। मां–बेटी का प्यार देख कॉन्स्टेबल मंदाकिनी भावुक हो गईं। कॉन्स्टेबल मंदाकिनी बोलीं- भगवान ने मुझे बेटी नहीं दी कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा- मैं मूलरूप से मैनपुरी की रहने वाली हूं, जबकि ससुराल फिरोजाबाद में है। एक साल पहले ग्वालटोली थाने में तैनाती हुई थी। मेरे दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 2 और एक साल है। भगवान ने मुझे बेटी नहीं दी है। हमने सोचा था कि अगर इस बच्ची का कोई नहीं होगा तो इसे मैं पालूंगी। उन्होंने रोते हुए कहा कि मुझे इस बच्ची में अपनी बेटी दिख रही थी, इसलिए मैंने बेटी की तरह इसे नहलाया, खिलाया। हमें इस बात की खुशी है कि इस वीडियो के जरिए बच्ची अपने माता–पिता से मिल गई और सुरक्षित उनके साथ गई। ——————– ये खबर भी पढ़िए- मेरठ में लड़की को XUV से उठा ले गए: रात 11 बजे वारदात, स्कूटी सवारों ने पीछा किया तो टक्कर मारी
मेरठ में मंगलवार को बदमाश एक लड़की को XUV कार से उठा ले गए। ब्रह्मपुरी मेट्रो स्टेशन के पास देर रात करीब 11.30 बजे कार से आए बदमाशों ने लड़की को कार में घसीट लिया। लड़की चीखने-चिल्लाने लगी। चीख-पुकार सुनकर स्कूटी सवार लड़कों ने पीछा किया। पढ़ें पूरी खबर…
कॉन्स्टेबल मंदाकिनी ने लापता मूक-बधिर बच्ची को मां से मिलाया:रोते हुए बोलीं- बच्ची में मुझे बेटी दिखी; कानपुर में REEL देख घरवाले पहुंचे
