13 राज्यों में खराब मौसम की मार, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

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असमय बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से गेहूं, सरसों व अन्य फसलों को भारी नुकसान, लाखों किसान आर्थिक संकट में

भारत की कृषि व्यवस्था एक बार फिर मौसम की अनिश्चितता के सामने कमजोर पड़ती नजर आ रही है। देश के 13 राज्यों में हाल ही में खराब हुए मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर गहरा आघात पहुंचाया है। असमय बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे लाखों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

यह मौसम परिवर्तन ऐसे समय में आया जब रबी फसलें कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थीं। खेतों में लहलहाती गेहूं, सरसों, चना और अन्य फसलें किसानों की सालभर की मेहनत का परिणाम थीं। लेकिन अचानक बदले मौसम ने कुछ ही घंटों में इस मेहनत को तबाही में बदल दिया। कई इलाकों में तेज बारिश और ओलों के कारण फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे उनकी कटाई मुश्किल हो गई और उत्पादन में भारी गिरावट आई।

गेहूं की फसल पर इसका सबसे अधिक असर देखा गया है। जब फसल पककर तैयार होती है, उस समय बारिश होने से दानों में नमी बढ़ जाती है और उनका रंग बदल जाता है। इससे न केवल पैदावार घटती है, बल्कि बाजार में भी उसकी कीमत कम मिलती है। सरसों की फसल में दाने झड़ने की समस्या सामने आई है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है। दलहन और तिलहन की फसलें भी इस मौसम की मार से बच नहीं सकीं।

बागवानी क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। आम, अंगूर और सब्जियों की फसलें तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पेड़ों से फल गिर गए हैं और सब्जियों में सड़न बढ़ गई है। इसका असर बाजार में आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे कीमतों में अस्थिरता देखने को मिल रही है।

किसानों के लिए यह स्थिति केवल फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी पूरी आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करती है। खेती में पहले से ही बढ़ती लागत—बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई—किसानों पर भारी बोझ डालती है। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी आय लगभग समाप्त हो जाती है। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, और इस नुकसान के बाद उनके लिए कर्ज चुकाना बेहद कठिन हो जाता है।

इस संकट का सामाजिक प्रभाव भी गहरा है। लगातार नुकसान और अनिश्चितता के कारण किसानों में मानसिक तनाव बढ़ता है। कई बार यह तनाव गंभीर रूप ले लेता है, जिससे आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा, गांवों से शहरों की ओर पलायन भी तेज होता है, क्योंकि लोग रोजगार की तलाश में खेती छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इससे ग्रामीण सामाजिक ढांचा भी प्रभावित होता है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी इस खराब मौसम के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। फसल उत्पादन में कमी आने से खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित होती है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। सब्जियों और अनाज की कीमतों में वृद्धि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ