हरियाणा ह्यूमन राइट्स कमीशन (HHRC) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) कुरुक्षेत्र में स्टूडेंट्स के लगातार सुसाइड और अटेम्प्ट मामले में सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में कमीशन ने खुद संज्ञान लिया है। साथ ही NIT समेत DC और SP से जवाब तलब किया है। कमीशन ने लेटर में एक खबर का जिक्र किया कि 19 अप्रैल को NIT कुरुक्षेत्र में कम समय के भीतर कई स्टूडेंट्स की मौत और सुसाइड की कोशिश हुई। इसमें यह भी बताया गया कि NIT ने स्टूडेंट्स को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए थे। हाल ही में एक फर्स्ट ईयर की छात्रा ने हॉस्टल की 5वीं मंजिल से कूदकर सुसाइड का प्रयास किया, जिसे समय रहते बचा लिया गया। 16 अप्रैल को किया था सुसाइड 16 अप्रैल को सेकेंड ईयर की छात्रा का शव उसके कमरे में मिला था। इससे पहले फरवरी और मार्च में भी 2 स्टूडेंट्स की मौत के मामले सामने आए। 8 अप्रैल को भी एक और मामला सामने आया था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने स्टूडेंट्स की सुरक्षा और मेंटली हेल्थ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नहीं दिख रही पर्याप्त कार्रवाई कमीशन के चेयरमैन जस्टिस ललित बत्रा और मेंबर कुलदीप जैन व दीप भाटिया का कहना है कि लगातार घटनाओं के बावजूद NIT की कार्रवाई पर्याप्त नहीं दिखती। सिर्फ प्रोफेसरों के ट्रांसफर जैसे कदम काफी नहीं हैं। यह मामला NIT में मेंटली हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की कमी की ओर इशारा करता है। कमीशन ने गंभीर मानवाधिकार मुद्दा माना कमीशन ने साफ कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। कमीशन ने इसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दा माना है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) से जुड़ा है। साथ ही UDHR (मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा) के अनुच्छेद 3 और 26 का भी उल्लंघन हो सकता है। NIT डायरेक्टर से 9 प्वाइंट पर मांगी जानकारी कमीशन ने NIT कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर से 9 प्वाइंट पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पहला प्वाइंट चार स्टूडेंट की मौत और एक आत्महत्या प्रयास की पूरी परिस्थितियां, कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग की व्यवस्था और तनाव या आर्थिक परेशानी झेल रहे स्टूडेंट की पहचान कैसे होती है। इसके अलावा मेंटर-मेंटी सिस्टम लागू हुआ या नहीं, हॉस्टल सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, हॉस्टल खाली कराने के फैसले का कारण, प्रोफेसरों के ट्रांसफर और किसी आंतरिक जांच का विवरण मांगा है। इसके अलावा DC और SP से निर्देश दिए हैं। DC से मांगे 4 प्वाइंट कमीशन ने DC कुरुक्षेत्र से 4 प्वाइंट पर जवाब मांगा है। इसमें पूछा गया कि अब तक क्या कार्रवाई की गई, छात्रों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए, जिले में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं क्या हैं और आर्थिक मदद के लिए क्या व्यवस्था है। इसके अलावा SP कुरुक्षेत्र से 2 प्वाइंट सभी मामलों की जांच की स्थिति और मौत के कारणों को लेकर अब तक निकले निष्कर्षों पर जवाब मांगा गया। 19 से पहले मांगी रिपोर्ट कमीशन ने संबंधित अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट 19 मई 2026 की सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के सामने पेश करनी होगी। उधर, मामले को लेकर NIT कुरुक्षेत्र के प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने कहा कि उनको कमीशन से आए किसी लेटर की जानकारी नहीं है। रिव्यू टीम कर रही जांच NIT के डायरेक्टर प्रो. बीवी रमना रेड्डी से जुड़े मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी फोरम (NETF) के अध्यक्ष और नेक के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे की अगुआई में रिव्यू टीम ने दूसरी बार NIT की विजिट की। इस टीम में VNIT नागपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष रिटायर्ड IAS एम. मदन गोपाल और MANIT भोपाल के डायरेक्टर प्रो. केके शुक्ला बतौर मेंबर शामिल हुए। टीम ने अधूरे फैक्ट और तथ्य की जानकारी ली। टीम ने मामले से जुड़े कर्मियों के साथ भी बातचीत की। NIT में बनाई गई वेलविंग टीम से मुलाकात की इसके अलावा सुसाइड मामले को लेकर दूसरी टीम पहली बार NIT पहुंचीं। इस टीम की अगुआई भी नेक चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने की। इस टीम ने सुसाइड मामले की जांच के लिए NIT में बनाई गई वेलविंग टीम से मुलाकात की। साथ ही टीम ने NIT के हॉस्टल में ठहरे कुछ स्टूडेंट्स से भी तथ्य और घटना के पीछे की वजह जानी। इस टीम में NIT जालंधर के डायरेक्टर प्रो. बिनोद कुमार कनोजिया और डॉ. नागपाल शामिल रहे, जबकि रीना सोनवल ऑनलाइन तरीके से जुड़ीं। 29 मार्च से हुई घटनाक्रम की शुरुआत इस घटनाक्रम की शुरुआत 29 मार्च को हुई, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से NIT कुरुक्षेत्र के डायरेक्टर प्रो. बीवी रमना रेड्डी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी। इसके अगले ही दिन प्रो. ब्रह्मजीत सिंह को कार्यकारी डायरेक्टर बनाया गया, जबकि प्रो. विनोद मित्तल को रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया। 7 अप्रैल NIT पहुंची थी टीम इससे पहले 7 अप्रैल को टीम ने जांच के लिए NIT की विजिट की थी। पहली जांच में टीम ने कई फाइलें खंगाली थीं। इस बार जांच को अंतिम चरण माना जा रहा है। टीम इस बार और अधिक फाइलों की जांच करेगी और इसके बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी, जिस पर आगे की कार्रवाई तय होगी। भर्ती, प्रमोशन से लेकर वेकेंट पोस्ट की जांच रिव्यू टीम NIT में हुई भर्ती, प्रमोशन, शिकायतें, रैंकिंग में आई गिरावट और वेकेंट पोस्ट को लेकर जांच कर रही है। इसके अलावा डायरेक्टर पर अपने होम स्टेट तेलंगाना से ज्यादा स्टाफ भर्ती का आरोप भी है। छात्रों के आरोप, कैंपस करवाया खाली इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्टूडेट्स ने NIT प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप लगाए कि टीम की दूसरी विजिट से पहले NIT प्रशासन ने अगले आदेश आने तक छुट्टियों का नोटिस जारी दिया। साथ ही माहौल खराब होने का हवाला देकर कैंपस भी खाली करवा लिया गया, ताकि टीम स्टूडेंट्स से बातचीत ना कर सके।
कुरुक्षेत्र NIT के सुसाइड केस में मानवाधिकार आयोग का एक्शन:कमीशन ने मांगा जवाब, DC-SP और डायरेक्टर से मांगी अलग-अलग रिपोर्ट, 19 तक सबमिट करनी होगी
