राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के 3 जिम्मेदार:चंपत राय ने ट्रस्ट के सदस्यों से चोरी छिपाई; गोपाल राव ने CCTV चेक नहीं किए

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला देशभर की सुर्खियों में है। ट्रस्ट अपने स्तर पर छापेमारी और कैश रिकवरी की कार्रवाई कर रहा है। लेकिन, अब तक FIR दर्ज नहीं कराई गई है। सवाल उठ रहे हैं कि मंदिर परिसर में लगी 14 दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव के नाम सबसे ज्यादा लिए जा रहे हैं। हेरा-फेरी के बाद भी पुलिस नहीं बुलाई चंपत राय अयोध्या के कारसेवकपुरम में रहते हैं। मंदिर संचालन के लिए 15 सदस्यीय ट्रस्ट बना है। लेकिन, मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी चंपत राय की मानी जाती है। कुछ दिन पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ था। 7 जून, 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। उसकी यह हरकत CCTV में रिकॉर्ड हो गई। पूछताछ होने पर उसने चढ़ावे की रकम में हो रही चोरी से जुड़ी कई बातें बताईं। 9 जून को यह जानकारी सार्वजनिक हो गई और मामला सुर्खियों में आ गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसे मुद्दा बनाकर सरकार और ट्रस्ट को घेरा। हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर चंपत राय ने बाकी ट्रस्टियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हेरा-फेरी की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई। चढ़ावा चोरी मामले का मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि टिन्नू चंपत राय के करीबी लोगों में शामिल था। मंदिर परिसर की कई व्यवस्थाएं चंपत के कहने पर वही देखता था। चंपत राय ने 12 जून को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। कहा- ट्रस्ट समय-समय पर चढ़ावे की राशि को ऑडिट कराता है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। इस पर धर्म सेना के संस्थापक संतोष दुबे सवाल पूछते हैं- चंपत राय की कमाई का जरिया क्या है? फॉर्च्यूनर गाड़ी, Y-श्रेणी सुरक्षा, लक्जरी वाहन, बड़े मकानों में रहने वाले व्यक्ति की कमाई का जरिया क्या है? या उस ट्रस्ट में जो लोग हैं, उनकी कमाई का क्या जरिया है? कहां से इतनी महंगी गाड़ियां आती हैं? उनका रोज का खर्च लाखों रुपए है, वह कहां से आता है? वीआईपी दर्शन के नाम पर इसी चंपत राय ने कमाई का जरिया बना लिया। वह कहते हैं- ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग अपने रिश्तेदारों और करीबियों के साथ मिलकर अयोध्या को लूट रहे हैं। जो काम मुहम्मद गौरी, बाबर, अकबर और अंग्रेज नहीं कर सके, वह काम अब ट्रस्ट के लोग कर रहे हैं। पूर्व लेखाकार ने कहा- जेवरों का हिसाब नहीं रखते थे इस बीच श्रीराम मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने दावा किया कि चढ़ावा चोरी का मामला नया नहीं है। यह 2020-21 से ही चल रहा है। उनका कहना है कि 2021 में उन्होंने खुद चोरी पकड़ी थी। इसकी शिकायत महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव से की थी। लेकिन, कार्रवाई के बजाय उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया। महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि श्रद्धालु चढ़ावे में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात भी चढ़ाते हैं। लेकिन, उनका कभी कोई पूरा हिसाब-किताब नहीं रखा जाता। टिन्नू यादव ये गहने सीधे चंपत राय के पास लेकर जाता था। इस मामले में अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार इंदुभूषण पांडेय कहते हैं- महिपाल सिंह ने जो आरोप लगाए, ट्रस्ट या चंपत राय की ओर से खंडन क्यों नहीं किया गया? महिपाल ने 2021 में सिर्फ एक दानपेटी की गिनती में ही 5 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी पकड़ी थी। अब आप सोचिए ये मामला कितना बड़ा है। 21 मार्च की बैठक में दान के गहनों का जिक्र नहीं इंदुभूषण पांडेय आगे कहते हैं- महिपाल के आरोपों पर अब तक चंपत राय या ट्रस्ट की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगर ये आरोप गलत हैं, तो इस पर सफाई आनी चाहिए थी। 21 मार्च की बैठक में 1 अप्रैल, 2025 से 28 फरवरी, 2026 तक के आय-व्यय का रिकॉर्ड पेश किया गया था। इसमें भी चढ़ावे में मिले गहनों का कोई जिक्र नहीं था। सिर्फ यह बताया गया कि इस अवधि में भक्तों ने करीब 82 करोड़ रुपए का दान दिया, जिसमें 54 करोड़ रुपए दानपेटियों से मिले। दैनिक भास्कर की टीम ने टिन्नू यादव और चंपत राय से इन आरोपों पर बात करने की कोशिश की, चंपत राय ने कोई जवाब नहीं दिया। टीम को श्रीराम मंदिर परिसर में बने कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया। जबकि टिन्नू यादव ने कहा- यह सिर्फ बदनाम करने के लिए बनाई गई कहानी है। अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो उसे सार्वजनिक करे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मेरी और मेरे बेटे की संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध है। जिसे देखना हो, देख सकता है। गोपाल राव ने दान गिनने वाले कर्मियों से पूछताछ नहीं की महिपाल सिंह के दावे के मुताबिक, चढ़ावे की चोरी मामले की जानकारी उन्होंने गोपाल राव को भी दी थी। लेकिन, कार्रवाई की जगह मामले को दबा दिया गया। यही वजह रही कि टिन्नू समेत सारे आरोपी चढ़ावे की रकम गायब करके करोड़पति बनते गए। व्यवस्थापक होने के नाते गोपाल राव पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने CCTV फुटेज की जांच क्यों नहीं कराई। दान गिनने वाले कर्मियों से पूछताछ क्यों नहीं की। इस मामले में बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार कहते हैं- चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को सबसे पहले ट्रस्ट से अलग करके सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए। इस मामले में एफआईआर दर्ज करके जांच हाेनी चाहिए। आखिर टिन्नू किसका ड्राइवर था? जो कुछ भी है, वो खुलकर सामने आना चाहिए। डॉ. अनिल मिश्रा के कई रिश्तेदार मंदिर में कर्मचारी बने डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या में जलकल के पास नगर निगम से आवंटित आवास में रहते हैं। उनका अपना घर अवधपुरी में बन रहा है, जहां लिफ्ट भी लगाई जा रही है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि अयोध्या में नहीं रहते। इसलिए मंदिर परिसर के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज में डॉ. अनिल मिश्रा की भी अहम भूमिका मानी जाती है। चंपत राय के बाद उन्हें सबसे प्रभावशाली लोगों में गिना जाता है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे और उससे जुड़े पैसों की निगरानी की जिम्मेदारी भी उनकी रहती थी। आरोप ये भी हैं कि उनके कई रिश्तेदार मंदिर में कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम अनिल मिश्रा से बात करने उनके आवास पर पहुंची, लेकिन वे बाहर नहीं निकले। 3 घंटे इंतजार के बाद कर्मचारी से मैसेज भिजवाया कि मंदिर में आकर मिलें। मंदिर में मुलाकात की कोशिश की तो इजाजत ही नहीं मिली। अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह कहते हैं- सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का है। फिर भी अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है। ट्रस्ट की बैठकों में RSS-VHP के लोग भी शामिल होते हैं, उनका ध्यान इस पर क्यों नहीं गया? —————————- ये खबरें भी पढ़िए- ऑटो ड्राइवर ने राम मंदिर मैनेजमेंट में कैसे ली एंट्री, टिन्नू यादव पर चढ़ावे की चोरी के आरोप; 28 साल पहले चंपत राय से जुड़ा था अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में टिन्नू यादव सुर्खियों में है। कहने को टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खास सहयोगी है, लेकिन श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में वह बहुत पावरफुल बताया जाता है। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराना हो, टिन्नू ही सब कुछ मैनेज करता आया है। पढ़िए पूरी खबर… राम मंदिर ट्रस्ट ने योगी से कहा-SIT गठित करें, चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी के घर से 10 लाख मिले, गोबर में दबाए था अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के 7 करोड़ रुपए की चोरी के दावे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार को सीएम योगी से चोरी के दावे की जांच SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराने की मांग की है। इधर, मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा (27) के घर से 10 लाख रुपए बरामद हुए हैं। उसने पैसे गोबर में दबाकर छिपाए थे। हालांकि, ये रुपए किसके हैं? इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है। पढ़िए पूरी खबर… ‘राम मंदिर ट्रस्ट में धर्माचार्य रहते तो गड़बड़ी नहीं होती’, शंकराचार्य बोले- चंपत राय ईमानदार नहीं, दान का एक-एक पैसा भगवान का ‘राम मंदिर के दान पर सबसे ज्यादा सवाल उठने चाहिए। दान का एक-एक पैसा भगवान का पैसा होता है। सनातन धर्म में देवस्व (चढ़ावा) को अत्यंत पवित्र माना गया है। अगर उस पैसे के उपयोग को लेकर सवाल हैं, तो जवाब भी होना चाहिए और जांच भी होनी चाहिए। चंपत राय ईमानदार नहीं हैं। पहले से एक ट्रस्ट मौजूद था, जिसमें चार शंकराचार्य, पांच वैष्णवाचार्य और 13 अखाड़ों के प्रमुख थे। जब वह ट्रस्ट था, तो नया ट्रस्ट बनाने की क्या जरूरत थी? अगर शंकराचार्य और धर्माचार्य ट्रस्ट में रहते, तो कोई गड़बड़ी नहीं कर पाता।’ पढ़िए पूरी खबर…