‘6 लाख कर्ज लेकर शिवानंद को शिप पर भेजा था’:देवरिया में पिता बोले–चीन में उतर जाता तो जिंदा होता मेरा लाल, बेटा पूछ रहा- पापा कब आएंगे

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‘मेरे बेटे शिवानंद की मर्चेंट नेवी में 9 महीने पहले जॉब लगी थी। मैंने 6 लाख रुपये कर्ज लेकर उसका सीडीसी सर्टीफिकेट यानी समुद्री पासपोर्ट बनवाया था। उसकी सिंगापुर में ज्वाइनिंग हुई थी। वहां से पहली बार ही वो ऑयल शिप पर सवार हुआ था। लेकिन पहली यात्रा ही उसकी आखिरी यात्रा बन जाएगी, ऐसा कभी सपने में भी नहीं सोचा था। मेरे घर का एकलौता कमाऊ पूत था जो अब नहीं रहा। हम लोगों का क्या होगा, अब भगवान ही जाने…।’ ये दर्द है देवरिया के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया के पिता रामजी चौरसिया का। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिकी मिसाइल हमले में तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई। इनमें से एक शिवानंद भी थे। वह सिंगापुर के जहाज ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर सवार थे। शिवानंद के गांव में सन्नाटा पसरा है। घर में चीख पुकार मची है। हर कोई शिवानंद को याद कर रो रहा है। उनका शव आने का इंतजार कर रहा है। पहले घर की तस्वीरें देखिए पढ़िए शिवानंद के गांव से रिपोर्ट… देवरिया जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर गांव सुरौली है। यहां गांव के बीच में रामजी चौरसिया का घर है। रामजी खेती और पशुपालन से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में पत्नी कलावती के अलावा दो बेटे शिवानंद (38) और राम प्रवेश व बहन सोनी है। घर में सोनी और शिवानंद की शादी हो चुकी है। शिवानंद की शादी 2017 में सुशीला के साथ हुई थी। दोनों का पांच साल का बेटा राजवीर और दो साल की बेटी वानिका हैं। 2012 में शिवानंद ने छोड़ दिया था घर रामजी बताते हैं– शिवानंद ने 2006 में मझगांवा के गंगा प्रसाद इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और 2008 में इंटरमीडिएट किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद शिवानंद ने 2012 में रोजगार की तलाश में घर छोड़ दिया। उन्होंने दुबई, मुंबई, लखनऊ, पुणे और सोलापुर सहित कई शहरों में काम किया। इसी दौरान उन्होंने मर्चेंट नेवी का कोर्स किया। समुद्री जहाज पर नौकरी के लिए जरूरी सीडीसी (Continuous Discharge Certificate) प्रमाणपत्र भी लिया। इसके लिए गांव और रिश्तेदारों से उधार लेकर लगभग छह लाख रुपये खर्च किए गए थे। सितंबर 2025 में शिवानंद मुंबई से सिंगापुर पहुंचे और एक शिपिंग कंपनी के जहाज पर काम शुरू किया। चीन में रेस्ट के लिए साथियों ने कहा था पिता ने बताया– शिवानंद जहाज पर इंजन फिटर थे। 23 मई को चीन में तेल उतारने के बाद कुछ साथियों ने शिवानंद को शिप छोड़कर रेस्ट लेने की सलाह दी थी। लेकिन कर्ज चुकाने की उम्मीद में शिवानंद ने जहाज पर ही रुकने का फैसला किया। ताकि जल्द से जल्द पैसे भेजकर कर्ज उतरवा सके। इसी शिप कंपनी का एक शिप होर्मुज से पहले तकनीकि खराबी के चलते रुक गया था। उसमें तेल लदा हुआ था। जिसके चलते कंपनी के अफसरों ने खराब खड़े शिप से माल अनलोड कर चीन से लौट रहे खाली शिप MT सेत्तेबेल्लो में लोड करने को कहा था। बुधवार को जहाज होर्मुज के पास से गुजर रहा था, तभी अमेरिका ने मिसाइस से हमला कर दिया। जिसमें शिवानंद की मौत हो गई। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने गुरुवार सुबह घटना की जानकारी सबसे पहले दुबई में रहने वाले शिवानंद के छोटे भाई राम प्रवेश चौरसिया को दी। केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने उनकी मौत की पुष्टि की। शिवानंद की 45,000 रुपये सैलरी थी। संजय बोले- मेरे जीजा का शव जल्द भिजवा दे सरकार शिवानंद के भाई रामप्रवेश चौरसिया ने गुरुवार सुबह मौत की जानकारी पिता रामजी चौरसिया और सुनीता के भाई संजय चौरसिया को दी। उस समय सुनीता गर्मी के छुटि्टयों के चलते दोनों बच्चों के साथ अपने मायके रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के रामलक्षन गांव में थीं। पति की मौत की सूचना सुनते ही सुनीता बदहवाश हो गईं। सुनीता के भाई संजय ने उन्हें संभाला लेकिन खुद के आंसू भी नहीं रोक सके। उनका कहना है कि सरकार मेरे जीजा की लाश हमें जल्द से जल्द दे दे। अभी तक किसी अफसर ने ये नहीं बताया है कि शव इंडिया कबतक आएगा। बच्चों को सुलाने के बाद कॉल करने को कहा था सुनीता ने बताया – पति शिवानंद से आखिरी बार 9 जून की रात बात हुई थी। पति ने बच्चों का हालचाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि बच्चों का अच्छी तरह ख्याल रखना। इसी दौरान बच्चे रोने लगे तो सुनीता ने उन्हें शांत कराने की बात कही। इस पर शिवानंद ने कहा कि बच्चों को सुलाने के बाद फिर बात कर लेना और फोन कट गया। दोबारा कॉल नहीं लगा सुनीता के मुताबिक, कुछ देर बाद जब बच्चे सो गए तो उन्होंने दोबारा फोन मिलाया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अगले दिन भी कई बार प्रयास करने के बावजूद बात नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने इस बारे में अपने देवर रामप्रवेश चौरसिया को जानकारी दी थी। मुझे नहीं पता था कि पति से वो बातचीत ही आखिरी बातचीत होगी। बेटा बार-बार पूछ रहा पापा कब आएंगे शिवानंद चौरसिया का बड़ा बेटा समर अभी इस हादसे की गंभीरता से पूरी तरह अनजान है। करीब 5 साल का समर लिटिल लोशन स्कूल में कक्षा एक का छात्र है। पिता की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मचा हुआ है, लेकिन मासूम समर बार-बार अपने पिता के घर लौटने की बात पूछ रहा है। गांव के लोग और परिजन उसे संभालने का प्रयास कर रहे हैं। समर के अलावा छोटी बेटी भी वानिका भी पिता की मौत से अंजान है। एडीएम ने परिवार को बंधाया ढांढस शिवानंद चौरसिया की मौत की खबर पाकर गुरुवार देर शाम एडीएम प्रशासन प्रेम नारायण सिंह गांव पहुंचे और परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि शव को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया जारी है और संभावना है कि एक-दो दिन में शव गांव पहुंच जाएगा। इस दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। एडीएम ने उन्हें संभाला। शाम तक दुबई से घर पहुंचेगा छोटा भाई रामप्रवेश शिवानंद चौरसिया के छोटे भाई रामप्रवेश 3 महीने पहले दुबई गए हैं। 6 महीने काम सीखने के बाद वो प्लाईवुड फैक्ट्री में हेल्पर के रूप में काम करेंगे। शिवानंद की मौत की सूचना पर राम प्रेवश दुबई से लौट आए हैं। शुक्रवार सुबह वह मुंबई पहुंचे, वहां से फ्लाइट से गोरखपुर के लिए रवाना हुए हैं। बताया जा रहा है कि रामप्रवेश शाम करीब पांच बजे तक गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे। इसके बाद पैतृक गांव के लिए रवाना होंगे। ——— ये खबर भी पढ़ें स्कूल में 10वीं के छात्र की चाकू मारकर हत्या:चंदौली में क्लासमेट चाकू लेकर पहुंचा, सीने पर वार किए, बाकी स्टूडेंट डरकर भागे यूपी के चंदौली में 10वीं के छात्र की शुक्रवार सुबह स्कूल में हत्या कर दी गई। वारदात को क्लासमेट ने अंजाम दिया। आरोपी छात्र कमर में चाकू छिपाकर क्लास पहुंचा। वहां उसने सीने पर चाकू से वार किए। अचानक हुए हमले में लवकुश यादव (17) संभल नहीं पाया। खून से लथपथ होकर वह वहीं गिर गया। पूरी खबर पढ़ें