उत्तराखंड के फेमस पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर 29 मई से लापता नोएडा निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के 13 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जब खोज अभियान किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका, तो परिवार ने उनकी सुरक्षित बरामदगी या ठोस जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी है। यह घोषणा परिवार की ओर से स्थानीय स्तर पर लगाए गए मिसिंग पोस्टरों में की गई है। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में अभिषेक की छोटी बहन आशु चौहान ने कहा कि परिवार को अब यह मामला केवल हादसा नहीं लग रहा। उन्हें स्थानीय गाइड और होमस्टे संचालक की भूमिका पर संदेह है, जिसके चलते उनके खिलाफ कपकोट थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। परिवार बोला- 10 लाख का इनाम सही, पोस्टरों में किया ऐलान
सोशल मीडिया पर 10 लाख रुपए के इनाम की खबर वायरल होने के बाद आशु चौहान ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि परिवार ने स्थानीय स्तर पर जो मिसिंग पोस्टर लगवाए हैं, उनमें इनाम की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा, “हां, यह सही है। हमने वहां जो पोस्टर लगवाए हैं, उनमें 10 लाख रुपए का इनाम रखा है। हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि अगर किसी के पास कोई जानकारी हो तो वह सामने आए।”
खोज अभियान अभी भी जारी, डीएसपी तक लगाए गए
आशु चौहान ने कहा कि कई लोगों को लग रहा है कि खोज अभियान बंद हो गया है, जबकि ऐसा नहीं है। उत्तराखंड पुलिस, बागेश्वर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य टीमें अभी भी लगातार तलाश कर रही हैं। उनके मुताबिक, “मीडिया में इसे उतना हाईलाइट नहीं किया जा रहा, लेकिन सर्च ऑपरेशन जारी है। बागेश्वर पुलिस लगातार अपडेट दे रही है। अब तो डीएसपी स्तर के अधिकारी को भी इस अभियान में लगाया गया है।” परिवार का कहना है कि प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। अकेले ट्रैक पर गए थे अभिषेक
परिवार के अनुसार 28 वर्षीय अभिषेक चौहान सोलो ट्रैकिंग के लिए गए थे। ट्रैक के दौरान उनके साथ सिर्फ स्थानीय गाइड था। आशु बताती हैं, “भैया अकेले गए थे। ट्रैक पर उनके साथ केवल लोकल गाइड था। परिवार का कोई सदस्य उनके साथ नहीं था।” यही वजह है कि अब परिवार गाइड की भूमिका को लेकर कई सवाल उठा रहा है। गाइड और होमस्टे संचालक पर दर्ज कराई शिकायत
परिवार का सबसे बड़ा संदेह स्थानीय गाइड और उस होमस्टे संचालक पर है जहां अभिषेक ठहरे थे। आशु चौहान ने बताया कि यदि यह सामान्य दुर्घटना होती तो इतने बड़े स्तर के सर्च ऑपरेशन के दौरान अब तक कुछ न कुछ सुराग मिल जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “हमने एफआईआर में गाइड और होमस्टे वाले के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। गाइड ने पिछले दिनों अपने बयान बदले हैं। इसी वजह से हमें उस पर शक हो रहा है।” परिवार का कहना है कि होमस्टे संचालक ने ही उस गाइड की सिफारिश की थी और अभिषेक को उसके साथ भेजा था। इसलिए दोनों की भूमिका की जांच जरूरी है। सर्च ऑपरेशन में मिली जैकेट, लेकिन नहीं मिला कोई बड़ा सुराग परिवार ने यह भी पुष्टि की कि खोज अभियान के शुरुआती दिनों में अभिषेक की एक जैकेट बरामद हुई थी। आशु ने कहा- सर्च ऑपरेशन शुरू होने के दो-तीन दिन बाद उनकी जैकेट मिली थी। लेकिन उसके अलावा ऐसा कोई सुराग नहीं मिला जिससे पता चल सके कि उनके साथ आखिर हुआ क्या। बीएसएफ इंस्पेक्टर के बेटे हैं अभिषेक
अभिषेक चौहान मूल रूप से नोएडा में रहते हैं और एलएंडटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार में उनके माता-पिता और तीन बहनें हैं। बड़ी बहन लंदन में रहती हैं और घटना के बाद भारत लौट आई हैं। छोटी बहन आशु चौहान परिवार की ओर से लगातार प्रशासन और मीडिया से संपर्क बनाए हुए हैं। उनके पिता रघुराज चौहान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में गांधीनगर में तैनात हैं। परिवार की तीन बड़ी मांगें
आशु चौहान ने बताया कि परिवार ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। परिवार का यह भी कहना है कि गाइड और होमस्टे संचालक के मोबाइल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंकिंग गतिविधियों की जांच की जानी चाहिए। परिवार को नहीं लगता कि यह सामान्य हादसा है
आशु चौहान का कहना है कि उनका भाई अनुभवी ट्रैकर था। उसने इससे पहले लद्दाख और बद्रीनाथ क्षेत्र के कई कठिन ट्रैक पूरे किए थे। उन्होंने कहा, “पिंडारी ट्रैक बहुत कठिन नहीं माना जाता। भैया इससे कहीं ज्यादा मुश्किल ट्रैक कर चुके थे। इसलिए हमें समझ नहीं आता कि इतने आसान ट्रैक पर कोई व्यक्ति अचानक कैसे गायब हो सकता है।” परिवार का मानना है कि केवल दुर्घटना की थ्योरी से मामले की पूरी व्याख्या नहीं होती। मां को बताया था मंदिर जा रहा हूं
परिवार के अनुसार अभिषेक ने ट्रैकिंग की पूरी जानकारी घर पर नहीं दी थी। आशु बताती हैं, “उन्होंने मां को बताया था कि वह वहां स्थित एक मंदिर जा रहे हैं। यह नहीं बताया था कि ट्रैकिंग पर जा रहे हैं। शायद इसलिए क्योंकि यह उनके लिए सामान्य बात थी और वह पहले भी कई ट्रैक कर चुके थे।” उन्होंने परिवार को यह जरूर बताया था कि कुछ दिनों तक नेटवर्क नहीं मिलेगा और संपर्क नहीं हो पाएगा। ‘हमें पूरा विश्वास है कि भाई सुरक्षित है’
घटना के बाद परिवार बेहद तनाव में है, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी है। आशु कहती हैं, “हम फौजी परिवार से आते हैं। हमने अपने पिता को बहुत कठिन परिस्थितियों में काम करते देखा है। इसलिए हम टूटने की कोशिश नहीं कर रहे। हमें पूरा विश्वास है कि हमारा भाई जहां भी है, सुरक्षित है और अगर सही तरीके से जांच हुई तो वह मिल जाएगा।” उन्होंने कहा कि उनके पिता खुद कई दिनों तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों के साथ पहाड़ों में खोज अभियान में शामिल रहे। परिवार को अपहरण की आशंका
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार अब इस मामले को संभावित अपहरण के एंगल से भी देख रहा है। आशु चौहान ने कहा, “इतने दिनों तक स्थानीय लोगों से बात करने और पूरे घटनाक्रम को समझने के बाद हमें नहीं लगता कि यह सिर्फ गुमशुदगी या दुर्घटना का मामला है। हमें कहीं न कहीं अपहरण की आशंका लगती है।” हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक ऐसी किसी आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। परिवार ने मीडिया से अपील की है कि मामले को लगातार प्रमुखता से उठाया जाए ताकि जांच की गति बनी रहे। आशु चौहान ने कहा, “प्रशासन हमारी मदद कर रहा है, लेकिन हम चाहते हैं कि यह मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य के अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंचे। इससे जांच को और मजबूती मिल सकती है।” परिवार को उम्मीद है कि 10 लाख रुपए के इनाम की घोषणा के बाद कोई न कोई अहम सूचना सामने आएगी और अभिषेक चौहान की गुमशुदगी का रहस्य जल्द सुलझ सकेगा। —————– ये खबर भी पढ़ें…. बबीता गुमशुदगी मामला: 11 दिन, 6 एजेंसीज का महासर्च अभियान:भाई बोला- हमें किडनैपिंग का शक, CBI जांच हो; दोस्तों और स्थानीय युवाओं पर संदेह उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता नैनीताल की ट्रेकर बबीता पांडे (24) को गुम हुए आज 11 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके बारे में कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। (पढ़ें पूरी खबर)
13 दिन से गायब इंजीनियर, परिवार बोला- यह साजिश:गाइड पर जताया संदेह, खोजने वाले को 10 लाख के इनाम का ऐलान
