9 आधारों पर रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत रद्द:ट्विशा की बॉडी पर 6 चोटें, व्हाट्सएप चैट्स, CCTV से बदला केस; फैसले के 17 घंटे बाद अरेस्ट

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भोपाल की एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सास रिटायर जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने के मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में कई ऐसे तथ्य शामिल किए हैं, जिनकी वजह से कोर्ट को जांच प्रभावित होने की आशंका थी। जस्टिस देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के गंभीर तथ्यों, गवाहों के बयान और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को ध्यान में रखे बिना जमानत दे दी थी। कोर्ट ने यह भी माना कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और आरोपी पक्ष इसे प्रभावित कर सकता है। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्य, गवाहों के बयान, चोटों की प्रकृति, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और जांच की स्थिति को देखते हुए 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत टिक नहीं सकती। इसके बाद सत्र न्यायालय भोपाल का आदेश रद्द कर दिया गया। अग्रिम जमानत रद्द होने का फैसला बुधवार की रात 1 बजे जारी हुआ। इसके 9 घंटे बाद ही सीबीआई की टीम कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर पहुंच गई। हाईकोर्ट का फैसला आने के 17 घंटे बाद गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। अब जानते हैं हाईकोर्ट ने किन आधारों पर जमानत रद्द की 1. ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी की हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी में मौजूद तथ्यों और गवाहों के बयान पर पर्याप्त विचार नहीं किया। ट्रायल कोर्ट ने मुख्य रूप से बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर भरोसा किया और यह निष्कर्ष निकाल लिया कि मृतका की शिकायत केवल पति के खिलाफ थी, जबकि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य कुछ और संकेत देते हैं। 2. पोस्टमार्टम में मिलीं छह चोटें बनीं बड़ा आधार हाईकोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को बेहद महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि ट्विशा की मौत फांसी से हुई, लेकिन शरीर पर छह अन्य एंटीमॉर्टम चोटें भी थीं। इनमें चार चोटें बाएं हाथ पर, एक उंगली पर, एक सिर पर पाई गई। एम्स की क्वेरी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने इस पहलू की गंभीरता को नजरअंदाज किया। 3. व्हाट्सएप चैट्स ने बदली केस की दिशा मृतका के पिता की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में व्हाट्सएप चैट्स रखीं। इन चैट्स में ट्विशा ने कथित तौर पर अपने परिवार को बताया था कि पति और ससुराल वाले उसे “ड्रग्स एडिक्ट” समझते थे। उसे रोने तक नहीं दिया जाता था। पति गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक करता था। गर्भपात के बाद ही घर में रखने की बात कही जाती थी। इसलिए वह मायके वापस जाना चाहती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि व्हाट्सएप चैट्स को केवल पति के खिलाफ आरोप मानना गलत था। रिकॉर्ड से प्रथमदृष्टया सास की भूमिका भी सामने आती है। 4. गर्भपात को लेकर गंभीर टिप्पणी अदालत ने माना कि यह निर्विवाद तथ्य है कि ट्विशा गर्भवती हुई थीं और दो महीने के भीतर गर्भ समाप्त हो गया था। अभियोजन का आरोप था कि पति और सास ने उसके चरित्र पर शक कर गर्भपात का दबाव बनाया। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मृतका के परिवार के अनुसार, आरोपी पक्ष कहता था कि बच्चा किसी और का है और गर्भपात के बाद ही ट्विशा को घर में रहने दिया जाएगा। 5. जांच में असहयोग के आरोप को भी हाईकोर्ट ने स्वीकारा हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी आरोपी जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुईं। रिकॉर्ड के अनुसार, 13 और 14 मई को नोटिस जारी हुए, जमानत के बाद 20, 21 और 23 मई को भी नोटिस दिए गए, लेकिन गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के सामने उपस्थित नहीं हुईं। कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी के साथ असहयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 6. CCTV फुटेज से छेड़छाड़ का आरोप मामले में पहली बार कोर्ट के समक्ष यह आरोप डिटेल से रखा गया कि आरोपी पक्ष ने CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की। सीबीआई ने कहा कि पुलिस ने 13 मई को DVR जब्त कर लिया था, इसके बावजूद आरोपी पक्ष के पास घटना का फुटेज मौजूद था। सोशल मीडिया पर चुनिंदा क्लिप लीक की गईं, ऐसा कथित रूप से साक्ष्य प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया। 7. पोस्टमार्टम के दौरान दो रिश्तेदारों की मौजूदगी पर सवाल सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि आरोपी की बहन डॉ. राजबाला सिंह भदौरिया और डॉ. यशवीर जेके पोस्टमार्टम के समय मौजूद थे। दोनों भोपाल के वरिष्ठ डॉक्टर बताए गए। ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर बना रहस्य, प्रभावशाली आरोपियों की संभावित संलिप्तता और चल रही जांच के दौरान सहयोग नहीं करना यह दर्शाता है कि मामला अभी शुरुआती स्टेज में है। इसलिए गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की जरूरत पड़ेगी। 8. ट्विशा के खाते में पैसे भेजते थे, यह दहेज की मांग को खारिज नहीं करता महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शादी में दहेज और महंगे उपहार दिए गए थे, इसके बावजूद आरोपी पक्ष कहता था कि दहेज उनके स्तर का नहीं था। ट्विशा के शेयर अपने नाम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया जा रहा था। ट्रायल कोर्ट ने इस आधार पर राहत दी थी कि आरोपी पक्ष मृतका के खाते में पैसे भेजता था, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि इससे दहेज मांग न होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। 9. रिटायर जज होने पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं और उन्होंने साइबर क्राइम, साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट का प्रशिक्षण लिया हुआ है। आरोप लगाया गया कि इसी विशेषज्ञता का उपयोग कथित रूप से अपराध स्थल को प्रभावित करने में किया गया। हालांकि हाईकोर्ट ने इस पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया, लेकिन जांच के दौरान इसे गंभीर परिस्थिति माना। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अग्रिम जमानत असाधारण राहत है, गंभीर मामलों में अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए। यदि ट्रायल कोर्ट महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी करे तो उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।