हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने लिंग अनुपात सुधारने में खराब प्रदर्शन को लेकर अब पांच और बड़े डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे पहले विभाग चार डॉक्टरों को सस्पेंड भी कर चुका है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल को पत्र भेजकर इन डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत कार्रवाई करने का फैसला लिया है। डॉक्टरों पर ये लगे आरोप विभाग का आरोप है कि इन अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, योजनाओं के सही क्रियान्वयन और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं को बनाए रखने में लापरवाही बरती। खास तौर पर अपने-अपने क्षेत्रों में लिंग अनुपात सुधारने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। जिन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है, उनमें फरीदाबाद के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा, सोनीपत सिविल अस्पताल की पीएमओ डॉ. गिन्नी लांबा, रेवाड़ी सिविल अस्पताल के पीएमओ डॉ. सुरेंद्र यादव, झज्जर सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. गुरजीत और बल्लभगढ़ उप-मंडल सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. टीसी गिडवाल शामिल हैं। जबरन रिटायरमेंट-बर्खास्तगी हो सकती है नियम-7 के तहत बड़ी सजा दी जा सकती है। इसमें वेतन वृद्धि रोकना, पदोन्नति पर रोक, पद घटाना, जबरन रिटायरमेंट, नौकरी से हटाना या बर्खास्तगी तक शामिल है। एसीएस हेल्थ ने डीजीएचएस को निर्देश दिए हैं कि विभागीय वकील से जांच करवाकर 25 मई तक इन डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट का मसौदा तैयार किया जाए।
कार्रवाई से पहले ACS ने की कान्फ्रेंसिंग सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद की गई है, जिसकी अध्यक्षता डॉ. सुमिता मिश्रा ने की थी। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग सोनीपत, यमुनानगर, रोहतक और नारनौल के चार डॉक्टरों को भी खराब प्रदर्शन और लिंग अनुपात सुधारने में विफल रहने के आरोप में निलंबित कर चुका है। इस मामले पर हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने कहा कि एसोसिएशन अभी पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है, इसलिए फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
