हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में हनुमान-चालीसा पाठ हुआ:मां वाग्देवी की पूजा हुई, श्रद्धालु बोले- सालों बाद बिना रोक-टोक दर्शन हो रहे

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को राजा भोज के समय का वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दे दिया है। फैसले के बाद शनिवार सुबह श्रद्धालुओं और अलग-अलग समितियों के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल में भोजशाला पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना की। लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है। इस आदेश में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय अवधि के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। ASI के वकील अविरल विकास खरे ने कानूनी पहलू स्पष्ट किए… देखिए आज की 4 तस्वीरें… पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया। श्रद्धालु बोले- भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।” मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर था, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगा। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है। ये खबरें भी पढ़ें… 1. राजा भोज से हाईकोर्ट तक…भोजशाला, 100 साल का विवाद ‘मेरे जीते जी कोर्ट का फैसला आया है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भोजशाला मंदिर है, यह साबित करने के लिए मैंने और मेरे साथियों ने बहुत संघर्ष किया है।’ यह कहते हुए 95 साल के विमल गोधा की आंखें चमक जाती हैं। गोधा उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर साबित करने के लिए संघर्ष किया। पढ़ें पूरी खबर… 2. MP हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। पढ़ें पूरी खबर…