एसडीएम बोलीं- बिल्डर रोज पूछता था क्या सेवा करूं मैडम:रिश्वतकांड में कैसे फंसीं IPS छोड़कर एसडीएम बनी पूजा, अब IAS के लिए सिलेक्ट

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नरसिंहपुर के तेंदूखेड़ा एसडीएम दफ्तर में 30 हजार रुपए की रिश्वत की आंच अब सीधे एसडीएम पूजा सोनी तक पहुंच गई है। हाल ही में उनका UPSC 2025 में सिलेक्शन हुआ है, ऐसे में मामला अब प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। 14 मई को उनके स्टेनो सौरभ यादव को आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (EOW) ने तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर वह यह कहते सुनाई दिया कि 30 हजार में 5 हजार उसके और 25 हजार ‘एसडीएम मैडम’ के हैं। बताया जा रहा है कि ट्रैप से पहले शिकायतकर्ता ने एसडीएम पूजा सोनी से पूछा था- ‘मैडम आपकी क्या सेवा करें?’ इस पर उन्होंने सीधे कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन बाबू के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- ‘जितनी श्रद्धा है, आप कर दीजिए।’ इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी के पास बताई जा रही है। कैसे रिश्तखोरी के आरोपों से पूजा घिरी हैं और अब उनकी मौजूदा नौकरी के अलावा आगामी आईएएस के पद पर नियुक्ति का क्या होगा? इस रिपोर्ट में पढ़िए… रिश्वतखोरी के केस में पूजा सोनी का आरोपों से बाहर आना बेहद मुश्किल है। EOW के अफसरों का कहना है कि शुरुआती जांच में आवाज की रिकॉर्डिंग और अन्य तथ्यों से एसडीएम पूजा सोनी की भूमिका के पुख्ता सबूत मिले हैं। फिलहाल एफआईआर स्टेनो सौरभ यादव के खिलाफ दर्ज हुई है, लेकिन एसडीएम पूजा सोनी और चपरासी सुनील कुमार के खिलाफ भी जांच जारी है। ‘काम पहले ही हो चुका था, फिर रिश्वत की जरूरत क्यों?’
EOW कार्रवाई के बाद एसडीएम पूजा सोनी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि रिश्वत उनके बाबू ने ली, उन्होंने नहीं। पूजा सोनी ने कहा, ‘जब मेरा किसी तरह का लेन-देन ही नहीं हुआ तो मुझे आरोपी कैसे बनाया जा सकता है?’ उन्होंने बताया कि जिस काम को लेकर रिश्वत की बात हो रही है, उसकी NOC 12 मई को ही जारी हो चुकी थी। ‘27 अप्रैल को केस शुरू हुआ था और 12 मई को काम पूरा हो गया। जब काम हो चुका था तो 14 मई को षड्यंत्र करने की क्या जरूरत थी?’ ‘बिल्डर पूछता था- मैडम आपकी क्या सेवा करें?’
एसडीएम के मुताबिक शिकायतकर्ता संजय राय लगातार उनसे पूछता था- ‘मैडम आपकी क्या सेवा करें?’ लेकिन उन्होंने हर बार मना किया। बाद में जब उसने बाबू के लिए पूछा तो उन्होंने कहा- ‘वो तुम देख लो।’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति काम होने के बाद खुशी में चाय-पानी करा दे तो उसमें मैं दखल नहीं देती। अगर बाबू मुझे बताता कि 30 हजार रुपए की डिमांड हो रही है तो मैं उसी समय मना कर देती।’ पूजा सोनी ने यह भी दावा किया कि EOW के सामने बाबू ने स्वीकार किया है कि इस मामले में उसकी और एसडीएम की कोई बातचीत नहीं हुई थी। ‘एक रुपया खर्च साबित हो जाए तो नौकरी छोड़ दूंगी’
एसडीएम ने चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर किसी पक्षकार ने कोर्ट के किसी मामले में यह कह दिया कि उसने एक रुपया भी खर्च किया है तो मैं नौकरी छोड़ दूंगी।’ पन्ना जिले के देवेन्द्रनगर की रहने वाली पूजा सोनी साधारण परिवार से हैं। उनके पिता महेश सोनी किसान हैं, जबकि मां बर्तनों की दुकान संभालती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पारिवारिक संस्कार ऐसे नहीं हैं कि हम ऐसे गलत काम करें। क्या है पूरा मामला…
तेंदुखेड़ा के बिल्डर संजय राय ने EOW जबलपुर से शिकायत की थी कि कॉलोनी निर्माण के नक्शे के लिए स्थल निरीक्षण का उन्होंने आवेदन दिया था, लेकिन जानबूझकर देरी की जा रही थी। आरोप है कि एसडीएम ऑफिस के स्टेनो सौरभ यादव ने 30 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत के बाद ही नक्शा मंजूर करने की बात कही गई। उसके लिए वह रोज चक्कर काट रहा था। क्या IAS बनने में मुश्किल होगी…
इस सवाल पर रिटायर्ड IAS वीणा घाणेकर का कहना है कि पहले EOW जांच पूरी करेगी। यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है तो एजेंसी चार्जशीट दाखिल कर सकती है, जिसके लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद सरकार चाहे तो विभागीय जांच भी शुरू कर सकती है। हालांकि फिलहाल उनके IAS बनने पर तत्काल कोई कानूनी रोक नहीं है। कानून क्या कहता है…
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत कोई लोक सेवक अपने पद का इस्तेमाल कर काम करने, रोकने या प्रभावित करने के बदले ‘अनुचित लाभ’ मांगता, लेता या लेने की सहमति देता है तो यह अपराध माना जाता है। इसमें केवल नकद रिश्वत ही नहीं, बल्कि महंगे गिफ्ट, संपत्ति, विदेश यात्रा, नौकरी या रिश्तेदार को फायदा पहुंचाना भी शामिल है। फाइल आगे बढ़ाने, टेंडर दिलाने, जांच प्रभावित करने या लाइसेंस जारी करने के बदले लाभ मांगना भी अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जांच एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक कोर्ट रिश्वत के मामलों में मुख्य रूप से तीन बातें देखता है- नीयत, डिमांड और स्वीकार करना। इनमें डिमांड और नीयत का साबित होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।