प्रदेश में कर्मचारियों के तबादले पर बैन हटाने का फैसला अगले सोमवार को होगा। मुख्यमंत्री ने तबादले पर बैन हटाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को अगली कैबिनेट में प्रस्ताव लाने को कहा है। इस बीच जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा है कि जो तबादला नीति आए उसमें स्वैच्छिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों की लिमिट न रखी जाए ताकि जो लोग तबादला कराना चाहते हैं वे करा सकें। कई अन्य मंत्रियों ने मंत्री शाह की बात का समर्थन किया है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इस पर विचार करेंगे। साथ ही अगली बैठक में तबादला नीति लाने के लिए कहा गया। सोमवार को मोहन कैबिनेट की बैठक में अनौपचारिक संवाद के दौरान तबादला नीति को लेकर चर्चा में यह बातें आई हैं। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान सिर्फ इतना ही कहा है कि जब नीति जारी हो जाएगी तो जानकारी देंगे। पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान भी तबादला नीति को लेकर बैठक में अनौपचारिक चर्चा हुई थी। तब मंत्रियों ने कहा था कि प्रशासकीय और स्वैच्छिक आधार पर तबादले को न जोड़ा जाए क्योंकि ऐसे में कोटा फिक्स हो जाता है और विधायकों की नाराजगी का सामना मंत्रियों को करना पड़ता है। पीएम मोदी की अपील पर अमल करें लोग कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि सीएम ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक साल तक गोल्ड न खरीदने और पेट्रोल डीजल की खपत कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने पर जोर दें। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश जाने से बचें ताकि पीएम मोदी की अपील को सफल बनाया जा सके। हालांकि जब मंत्री काश्यप से मंत्रियों के काफिले में शामिल होने वाले वाहनों को लेकर मीडिया ने सवाल किया तो वे सटीक जवाब न दे सके। राज्य मंत्री स्वेच्छानुदान में 25 हजार रुपए दे सकेंगे मंत्री काश्यप ने बताया कि सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के लिए स्वेच्छानुदान के रूप में एक साल में एक व्यक्ति को दी जाने वाली राशि 40 हजार रुपए कर दी थी लेकिन राज्यमंत्रियों के लिए यह राशि नहीं बढ़ाई गई थी। अभी तक राज्यमंत्रियों को एक व्यक्ति को एक साल में 16 हजार रुपए देने की पात्रता थी जिसे बढ़ाकर अब 25 हजार रुपए कर दिया गया है। यानी एक व्यक्ति की राज्यमंत्री सालभर में एक बार 25 हजार रुपए स्वेच्छानुदान के रूप में दे सकेंगे। डामर के रेट में डिफरेंस बढ़ा सकेंगे मंत्री काश्यप ने बताया कि वैश्विक संकट के चलते बिटुमिन यानी डामर के रेट बढ़े हैं। ऐसे में प्रदेश में बारिश के पहले मरम्मत और निर्माण के दायरे में आने वाली सड़कों के लिए डामर की दिक्कत हो रही है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने तय किया है कि वैश्विक संकट के चलते बढ़े दामों के बाद पहले से तय बिटुमिन के रेट के अंतर की राशि बढ़ाई जा सकेगी। इसके लिए सरकार ने दस करोड़ तक की सड़क परियोजनाओं के मामले में इस डिफरेंस राशि को मंजूरी देने का फैसला किया है। विभाग के अफसरों की मानें तो हर जिले में औसत दस सड़कों का निर्माण दस करोड़ से कम लागत वाली सड़कों में शामिल है। इसलिए ऐसे सड़कों की संख्या पांच सौ से अधिक ही होने का अनुमान है। लोक निर्माण विभाग की ओर से शहरी एवं नगरीय मार्गों के नव निर्माण, उन्नयन और सड़कों के सुदृढ़ीकरण संबंधी योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि तक जारी रखने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। 29540 करोड़ की योजनाओं को जारी रखने का फैसला मंत्री काश्यप ने कहा कि कैबिनेट बैठक में वित्त, जल संसाधन, लोक निर्माण, विधि, स्वास्थ्य एवं सामाजिक न्याय सहित कई विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर निर्णय लिया गया। इस बैठक में लोक वित्त पोषित योजनाओं और परियोजनाओं के लिए 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक निरंतरता की स्वीकृति देने संबंधी प्रस्ताव प्रमुख हैं। इसके तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक और कम लागत वाली विभिन्न योजनाओं को जारी रखने पर विचार किया गया है और कुल 29540 करोड़ रुपए की अलग अलग विभागों की योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया गया है। कैबिनेट में इन मुद्दों को भी दी गई मंजूरी जल संसाधन विभाग की ओर से खुमानसिंह शिवाजी जलाशय (ठिकरिया तालाब) सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। 163 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में 6500 किसानों को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों के खिलाफ पेंशन नियमों के अंतर्गत विभागीय जांच से जुड़े मामलों को स्वीकृति दी गई। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय परिसर में मल्टीलेवल वाहन पार्किंग और बार ऑफिस निर्माण परियोजना को सूचकांक गणना से मुक्त रखने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को निरंतर जारी रखने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से बुधनी में नवीन चिकित्सा महाविद्यालय, संबद्ध अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज एवं पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। पहले इसकी लागत 714 करोड़ रुपए थी जो अब 763 करोड़ तक पहुंच गई है। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
अगली मोहन कैबिनेट में आएगी तबादला नीति:मंत्री शाह ने कहा- स्वैच्छिक स्थानांतरण में लिमिट तय न हो, सीएम बोले- विचार करेंगे
