पूर्व डिप्टी CM-CIA इंचार्ज विवाद, हाईकोर्ट में सुनवाई आज:हिसार SP जवाब दाखिल कर चुके; लिखा- दुष्यंत चौटाला के आरोप झूठे

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हरियाणा के हिसार में सब्जी मंडी पुल पर CIA इंचार्ज पवन कुमार से हुए विवाद के मामले में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। इससे पहले की डेट पर कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान हिसार एसपी की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया था। अगली सुनवाई के लिए 7 मई की डेट तय की गई थी। दुष्यंत चौटाला ने 23 अप्रैल को याचिका दायर की थी। इसमें हिसार पुलिस पर FIR दर्ज करने समेत कई आरोप लगाए हैं। हिसार SP ने कहा- दुष्यंत के आरोप जांच में झूठे मिले

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान हिसार के SP सिद्धांत जैन ने हलफनामा दायर किया है। जिसमें कहा-दुष्यंत चौटाला की शिकायत पर एक SIT का गठन किया गया था। इस SIT का इंचार्ज डीएसपी कमलजीत को बनाया गया। डीएसपी की जांच की जांच में चौटाला के आरोप झूठे व निराधार पाए गए हैं, इसलिए दुष्यंत चौटाला की याचिका खारिज की जाए। यहां पढ़िए पूर्व डिप्टी CM की पिटीशन में क्या… 1. जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग हाईकोर्ट में दायर याचिका में याची दुष्यंत ने मामले में आरोपियों के खिलाफ ना केवल FIR दर्ज कराने की मांग की, बल्कि जांच को हरियाणा पुलिस से हटाकर किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे, सीबीआई, चंडीगढ़ या पंजाब पुलिस को सौंपने का अनुरोध भी किया है। हिसार के पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले में कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते दुष्यंत चौटाला हाईकोर्ट पहुंचे हैं। 2. जान से मारने की धमकी देने का आरोप दुष्यंत चौटाला की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 17 अप्रैल को हिसार में उनके काफिले को एक सफेद बोलेरो वाहन ने रोक लिया। इसमें सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में मौजूद पुलिस अधिकारी, जिनमें- इंस्पेक्टर पवन कुमार प्रमुख रूप से शामिल है, ने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को धमकाया। याची दुष्यंत ने कोर्ट को बताया कि वे वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत संरक्षित हैं। इसके बावजूद ऐसी घटना होना बेहद गंभीर है। याचिका के अनुसार उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों ने भी घटना की पुष्टि करते हुए अलग-अलग शिकायतें दी हैं, जिनमें जान से मारने की धमकी तक का जिक्र है। 3. झूठे मुकदमे दर्ज करने की साजिश याचिका के अनुसार हरियाणा पुलिस ने घटना के बाद निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय याची के परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। विशेषकर 7 अप्रैल की एक घटना को आधार बनाकर दर्ज FIR को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया गया है। दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट के समक्ष यह भी दलील दी कि घटना के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की गई है। 4. साक्ष्य प्रभावित करने की आशंका याचिका के अनुसार मामले को दबाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका जताई गई है। साथ ही कोर्ट से सीसीटीवी फुटेज समेत सभी संबंधित रिकॉर्ड संरक्षित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। 2 प्वाइंट में पढ़िए पूरा विवाद 1. विवाद की जड़ (GJU घटनाक्रम): 15 अप्रैल 2026 को जेजेपी के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के नेतृत्व में छात्र संगठन यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन अनुमति न मिलने पर हंगामा हुआ। यूनिवर्सिटी प्रशासन का आरोप है कि छात्रों ने VC ऑफिस के गेट को तोड़ने का प्रयास किया और तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया। 2. जेजेपी के आरोप (पुलिस कार्रवाई पर सवाल): पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बदले की भावना से कार्रवाई की और उनके कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की। जेजेपी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रात में घरों में घुसकर छापेमारी की और महिलाओं के साथ गलत व्यवहार किया। दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि CIA इंचार्ज ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और बंदूक तानी।