पुलिस के सामने शिवसेना उपाध्यक्ष की गर्लफ्रेंड का मर्डर:एक लाख रुपए की सुपारी पर बीच सड़क पर दिनदहाड़े गाड़ी से कुचल कर भागा

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मध्य प्रदेश की क्राइम फाइल्स में इस बार ऐसी कहानी जो कोई हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसी साजिश थी जो दिनदहाड़े सड़क पर रची गई। सबसे बड़ी बात यह कि साजिश पुलिस के सामने अंजाम तक पहुंची। उज्जैन का यह हाई प्रोफाइल केस एक युवा नेता, उसकी गर्लफ्रेंड और एक रहस्यमयी ‘एक्सीडेंट’ से जुड़ा था, जिसने जांच एजेंसियों को लंबे समय तक उलझाए रखा। आखिर क्या था पूरा मामला? पढ़िए क्राइम फाइल्स के पहले हिस्से में… 15 नवंबर 2019: दोपहर का वह खौफनाक मंजर करीब 3 बजे उज्जैन के चिंतामणि रिंग रोड पर रोज जैसा ट्रैफिक था। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। दुकानों के सामने हलचल थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही सेकंड में यह सड़क एक ‘क्राइम सीन’ में बदलने वाली है। टोल नाके की तरफ से एक ऑटो आकर रुका। उसमें से एक लंबे कद की 30 वर्षीय युवती उतरी। थोड़ी घबराई हुई। हाथ में पर्स…जैसे किसी जल्दी में हो। वह कुछ कदम ही आगे बढ़ी थी…तभी पीछे से एक सफेद टाटा मैजिक ने तेज हॉर्न बजाया। एएसआई ने वाहन का पीछा किया टक्कर के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। लोग दौड़े। भीड़ जुटी। पास ही सर्विलांस वाहन में बैठे एएसआई संजय यादव ने यह सब देखा। संजय ने तुरंत गाड़ी स्टार्ट की और टक्कर मारने वाले वाहन का पीछा किया, लेकिन वह गाड़ी गलत साइड से भागते हुए चंद सेकंड में गायब हो गई। करीब 200-300 मीटर तक पीछा करने के बाद भी वह हाथ नहीं आई। भीड़ से आवाज आई- “अरे, ये तो स्वाति है” इधर, सड़क पर घायल युवती जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी, तभी भीड़ से एक युवक दौड़ता हुआ आया। उसे देखते ही सन्न रह गया। उसके मुंह से बस इतना निकला- ’अरे, ये तो स्वाति है!’ भीड़ में खड़े सब लोग उसकी ओर देखने लगे। अस्पताल की दौड़… लेकिन देर हो चुकी थी स्वाति की सांसें चल रही थीं। हालत गंभीर थी। सुखविंदर ने लोगों की मदद से उसे गाड़ी में डाला। तुरंत सीएचएल अपोलो सेंटर पहुंचाया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहली नजर में मामला एक सामान्य सड़क हादसा लगा। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने औपचारिकता के तहत आरोपी वाहन की तलाश शुरू कर दी। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह केस जल्द ही करवट लेने वाला है। एएसआई के बयान ने बदला एंगल एएसआई संजय यादव का बयान सामने आया। उन्होंने बताया कि युवती मोबाइल पर बात करते हुए जा रही थी, तभी पीछे से आई मैजिक ने जानबूझकर उसे टक्कर मारी। गाड़ी रोड से नीचे उतर गई। सीधा उसे निशाना बनाकर टक्कर मारी गई थी। यादव के इस बयान ने पूरे केस की दिशा बदल दी। सरफराज से वाहिद तक… फिर खुला राज 20 नवंबर को पुलिस सरफराज के घर पहुंची। वहां से पता चला कि गाड़ी वाहिद खान नाम का व्यक्ति चला रहा था। जब पुलिस वाहिद तक पहुंची तो वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन पकड़ लिया गया। शुरुआत में वाहिद टाल मटोल करता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो वह टूट गया। उसने जो बताया, उसने सबको हिला दिया। यह हादसा नहीं, ‘सुपारी किलिंग’ थी वाहिद ने कबूल किया कि उसने जानबूझकर स्वाति पर गाड़ी चढ़ाई। स्वाति से उसकी कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं थी। इसके लिए उसे एक लाख रुपए मिले थे। कल क्राइम फाइल्स पार्ट 2 में पढ़िए