लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यह समझाया कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। दरअसल, चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। कांग्रेस ने कहा कि ये बिल महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि यह चोर दरवाजे से परिसीमन के लिए हैं। शाह ने बताया- 850 का आंकड़ा कहां से आया शाह ने कहा, ‘मैं समझाता हूं। मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी 543 सदस्य हैं। इसमें 50% वृद्धि की जाएगी और जब 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, तो सभी 543 सीटें ऐसी हो जाएंगी जहां महिलाएं भी चुनाव लड़ सकें। इसी तरह 50% वृद्धि का विचार आया। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ तमिलनाडु की सीटें 39 से 59 हो जाएंगी दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जिसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। शाह बोले- परिसीमन कानून में कोई बदलाव नहीं शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग का कानून पूरी तरह मौजूदा कानून पर है। इसमें कोई बदलाव नहीं है। इसका चल रहे चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परिसीमन विधेयक के अनुसार: इन विधेयकों के जरिए संविधान के 7 अनुच्छेदों- 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334 (ए) में संशोधन किया जाएगा।
संसद में 4 विपक्षी नेताओं के बयान
शाह ने समझाया- कैसे लोकसभा की सीटें 850 होंगी:दक्षिण के 5 राज्यों की सीटें 129 से 195 हो जाएंगी; सबसे ज्यादा फायदा यूपी, महाराष्ट्र
