नारनौल की पलक ने छोड़ी 20 लाख पैकेज की नौकरी:जैन दीक्षा ग्रहण कर बनेंगी साध्वी; एक साल की होगी मौन साधना

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हरियाणा के नारनौल की पलक ने एक अलग राह चुनकर सबको चौंका दिया। पलक ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन धर्म की दीक्षा लेने का फैसला किया है। रविवार सुबह करीब 9 बजे वह अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों को अलविदा कहकर दिल्ली के लिए रवाना हो गई। 23 अप्रैल को वह जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी। दीक्षा के बाद पलक एक वर्ष तक मौन रहकर जैन धर्म के आगमों का गहन अध्ययन करेंगी। उनका कहना है कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर नियमों का पालन जरूरी है और यही मार्ग उन्होंने चुना है। श्वेतांबर स्थानक वासी जैन सभा के सचिव मुकेश जैन ने बताया कि पलक आज उनकी गुरुनी भाग्यप्रभा महाराज के पास चली गई। बेहद सख्त होते हैं साध्वी बनने के नियम पलक ने बताया कि जैन साध्वी बनने के नियम बेहद सख्त होते हैं। दीक्षा के दौरान केश लोचन किया जाता है और इसके बाद जीवनभर साल में दो बार होली और पर्युषण से पहले यह प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। इसके अलावा साध्वी नंगे पैर चलती हैं। पेड़ों की पत्तियां तक नहीं तोड़ सकतीं। स्वयं भोजन भी नहीं बनातीं। अनेक सख्त नियमों का पालन करना होता है। पढ़ाई में टॉपर, करियर भी छोड़ा पलक पढ़ाई में भी अव्वल रही हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से मैथ ऑनर्स में टॉपर रह चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने करीब 20 लाख रुपए सालाना पैकेज की नौकरी जॉइन की थी, लेकिन आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए उसे भी छोड़ दिया। माता-पिता की इच्छा पूरी की पलक के माता-पिता शुरू से ही चाहते थे कि उनकी बेटी आध्यात्म के मार्ग पर चले। पलक ने उनकी इस इच्छा को पूरा कर दिखाया। उनका यह फैसला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।