भोपाल में 58.8 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल, 3 माह का स्टॉक:एसोसिएशन बोला- MP में 5% पंप एडवांस की वजह से सूखे

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ईरान-इजराइल तनाव के बीच मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की खबरें सामने आई हैं। भोपाल में 2-3 पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई। हालांकि, प्रशासन ने पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही है। आगर मालवा में बुधवार सुबह से पेट्रोल पंप पर भीड़ लगना शुरू हो गई है। गुप्ता पेट्रोल पंप पर रात को रिजर्व कोटे के अलावा पेट्रोल खत्म हो गया था, जिसके बाद पंप बंद करना पड़ा। पंप संचालक नवीन गुप्ता ने बताया कि सुबह पेट्रोल का टैंकर आया है, जिसे खाली कराया जा रहा है। करीब 9 बजे के बाद पेट्रोल डीजल का वितरण शुरू किया जाएगा। पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर्याप्त है। भोपाल में ढाई से तीन महीने का स्टॉक मौजूद भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, शहर में 58.79 लाख किलोलीटर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक है, जो ढाई से तीन महीने तक के लिए पर्याप्त है। मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ओनर एसोसिएशन के अनुसार, करीब 5 प्रतिशत पंपों पर एडवांस राशि की समस्या के कारण अस्थायी कमी है। कुल मिलाकर ईंधन की कमी नहीं है। भोपाल के भौंरी स्थित इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो से शहर के 192 पंपों को रोजाना 12 लाख लीटर डीजल और 9 लाख लीटर पेट्रोल की सप्लाई की जा रही है। इधर, भोपाल कलेक्टर ने की अपील, किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। भोपाल में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल डीजल और घरेलू गैस उपलब्ध है। देखिए तस्वीरें अफवाहों से पंपों पर बढ़ी भीड़ इंदौर, उज्जैन, नीमच, देवास, झाबुआ और आगर-मालवा में अफवाहों के चलते लोग पेट्रोल भरवाने पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे कई जगह भीड़ बढ़ गई और कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इंदौर जिला प्रशासन के अनुसार शहर में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता है। डिपो से नियमित रूप से सप्लाई जारी है। ईंधन खत्म होने की खबर सिर्फ अफवाह इधर, पेट्रोल पंप ओनर एसोसिशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि पंप सूखने या ईंधन खत्म होने की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। एमपी में कहीं भी संकट नहीं है। दरअसल, सभी कंपनियों के नए नियम आए हैं कि ईंधन लेने से पहले एडवांस रुपए जमा करना पड़ेंगे। इस वजह से पंप संचालक पहले तो ओवर ड्यू कम कर रहे हैं। वहीं, उन्हें एडवांस भी देना है। इस वजह से कुछ पंप ऐसे हैं, जहां फंड की वजह से दिक्कतें हैं। यह 4 से 5 प्रतिशत है। प्रदेश में कुल 4200 पंप हैं। जहां सलाना 1200 टन पेट्रोल और 1600 टन डीजल की खपत होती है।