हिसार में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगनदीप मित्तल की कोर्ट ने संगठित अपराध के एक मामले में आरोपी सज्जन उर्फ काला को नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 के तहत किसी पर केस दर्ज करने के लिए केवल पुराने मुकदमों का होना काफी नहीं है। बल्कि यह साबित करना जरूरी है कि वह अपराध किसी क्राइम सिंडिकेट के सदस्य के रूप में किया गया है। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस संयुक्त अपराध के उदाहरण के ऐसी गंभीर धारा लगाना उचित नहीं है। कोर्ट ने पाया कि जांच पूरी हो चुकी है और सह-आरोपी पहले ही जमानत पर हैं। ऐसे में समानता के आधार पर सज्जन उर्फ काला को 50 हजार रुपए के मुचलके और एक जमानती पर जमानत दे दी गई। सज्जान उर्फ काला विनोद काला गैंग का सदस्य रह चुका है। यह था पूरा मामला नारनौंद थाना पुलिस ने 14 नवंबर 2025 को गुप्त सूचना के आधार पर विनोद उर्फ काणा और उसके कथित गैंग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का दावा था कि जेल से छूटने के बाद उसने गैंग बनाकर रंगदारी, फायरिंग और दहशत फैलाने का काम शुरू किया। इस केस में सज्जन उर्फ काला को भी आरोपी बनाया गया और 19 नवंबर 2025 को उसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस विनोद काणा गैंग से कनेक्शन साबित नहीं कर पाई सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि गैंग के साथ अपराध का सबूत नहीं है। पुलिस ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाई जिससे पता चले कि सज्जन ने विनोद काणा के गैंग के साथ मिलकर कोई साझा अपराध किया हो। अदालत ने पाया कि आरोपी पर 2011 से 2025 के बीच 18 केस दर्ज हैं, जिनमें से वह कई में बरी हो चुका है। कोर्ट ने कहा कि पुराने केसों को तब तक ‘कंटिन्यूइंग अनलॉफुल एक्टिविटी’ नहीं माना जा सकता जब तक वे गिरोह के सदस्य के रूप में न किए गए हों। पुलिस ने हत्या से जुड़ी गंभीर धारा लगाई थी, जबकि इस मामले में किसी की मृत्यु का कोई जिक्र नहीं था। खुद सरकारी वकील भी इस धारा की प्रासंगिकता पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। बचाव पक्ष ने रखी ये दलीलें बचाव पक्ष के वकील जेएस राठी ने अदालत में कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और उस पर गलत तरीके से संगठित अपराध की धारा लगाई गई है। वकील ने तर्क दिया कि 18 पुराने मामलों को आधार बनाकर धारा 111 लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि उनमें से कई में आरोपी बरी हो चुका है और कुछ में सजा पूरी कर चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं है। जिसमें आरोपी ने कथित गैंग के साथ मिलकर अपराध किया हो। साथ ही FIR के समय आरोपी पहले से जेल में था और उससे कोई हथियार बरामद नहीं हुआ, जिससे पुलिस का केस कमजोर होता है।
हिसार में सज्जन काला को मिली जमानत:गैंग से कनेक्शन नहीं साबित; कोर्ट ने कहा- पुराने केस होने से गिरोह का सदस्य नहीं
