रेलवे के JDCE एग्जाम पैटर्न में बदलाव:अब एक परीक्षा होगी; असिस्टेंट लोको पायलट पद के नियम भी बदले, हरियाणा पर 5 असर

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रेलवे में पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (JDCE) का पैटर्न पूरी तरह बदल दिया गया है। रेलवे बोर्ड ने परीक्षा संरचना और पाठ्यक्रम में संशोधन करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियम लागू होने के बाद अब परीक्षा पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है। रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर अजय गोयल द्वारा जारी आदेश के अनुसार तकनीशियन, जूनियर इंजीनियर (JE) और पैरामेडिकल सहित ग्रुप ‘C’ व नॉन-ग्रुप ‘C’ पदों के लिए अब केवल एक चरण की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की सीधी भर्ती के दूसरे चरण के स्तर के समान होगी, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक सख्त और पारदर्शी बनेगी। असिस्टेंट लोको पायलट पद के नियम भी बदले सबसे अहम बदलाव असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) और अन्य तकनीकी पदों के लिए भी किया गया है। अब इन पदों के लिए स्पष्ट और सख्त परीक्षा ढांचा तय कर दिया गया है। परीक्षा 100 अंकों की होगी, जिसमें 100 प्रश्न पूछे जाएंगे और अभ्यर्थियों को 120 मिनट का समय मिलेगा। हर गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक की नेगेटिव मार्किंग लागू होगी, जिससे लापरवाही से उत्तर देने पर नुकसान हो सकता है।
प्रश्न पत्र में ये आएंगे सवाल प्रश्न पत्र में गणित, सामान्य बुद्धिमत्ता, बेसिक साइंस, इंजीनियरिंग और ट्रेड-विशिष्ट विषयों से लगभग समान अनुपात में प्रश्न शामिल किए जाएंगे। इससे उम्मीदवारों को अब हर विषय पर मजबूत पकड़ बनानी होगी। अब एक चरण की परीक्षा में ही मेरिट तय होगी। नेगेटिव मार्किंग से गलती की गुंजाइश कम होगी। हरियाणा के 5 जिलों में बड़े रेलवे सेंटर रेलवे की जीडीसीई भर्ती का नया पैटर्न लागू होने से हरियाणा के अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, रोहतक और हिसार जैसे बड़े रेलवे केंद्रों पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अब एक ही चरण की कड़ी परीक्षा से प्रमोशन तय होगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ तैयारी का दबाव भी ज्यादा महसूस होगा। हरियाणा पर संभावित 5 बड़े असर 1. प्रमोशन की प्रक्रिया तेज होगी: पहले कई चरणों में होने वाली परीक्षा अब एक ही चरण में पूरी होगी, जिससे अंबाला और आसपास के डिवीजनों में लंबे समय से अटकी पदोन्नतियां तेजी से हो सकती हैं। 2. कर्मचारियों पर तैयारी का दबाव बढ़ेगा: एक ही परीक्षा में मेरिट तय होने से कर्मचारियों को अब गणित, रीजनिंग और तकनीकी विषयों पर ज्यादा गहराई से तैयारी करनी पड़ेगी। 3. प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, चयन मुश्किल होगा: हरियाणा के बड़े रेलवे स्टेशनों और वर्कशॉप्स में कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है, इसलिए सीमित पदों के लिए मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो जाएगा। 4. युवा कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है: जो कर्मचारी नई तकनीक और कंप्यूटर आधारित परीक्षा में सहज हैं, उन्हें इस नए पैटर्न से अपेक्षाकृत लाभ मिल सकता है। 5. ट्रेनिंग और कोचिंग की मांग बढ़ेगी: अंबाला और आसपास के क्षेत्रों में रेलवे परीक्षा की तैयारी कराने वाले संस्थानों और विभागीय ट्रेनिंग की मांग बढ़ने की संभावना है।