देश की सुरक्षा से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में सोनीपत रेलवे स्टेशन से चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म के पास हाई वोल्टेज पोल पर लगाए गए खुफिया कैमरे के जरिए संवेदनशील सूचनाएं बाहर भेजे जाने की आशंका ने पूरे तंत्र को अलर्ट कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें स्थानीय युवकों को लालच देकर इस्तेमाल किया गया। रेलवे सुरक्षा बल, गाजियाबाद पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका मकसद क्या था। गाजियाबाद से आरोपी लाकर कराई गई निशानदेही बुधवार दोपहर बाद गाजियाबाद पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की टीम भौवापुर निवासी आरोपी प्रवीण को निशानदेही के लिए सोनीपत लेकर पहुंची। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और आरोपी को रेलवे पुलिस चौकी से पैदल ही घटना स्थल तक ले जाया गया। आरपीएफ और गाजियाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी से मौके पर निशानदेही करवाई और उसी स्थान पर ले जाकर पूछताछ की गई, जहां कैमरा लगाया गया था। जहां काफी देर तक कैमरे और अन्य जानकारी पुलिस लेती रही। टेक्निकल एक्सपर्ट दो बार पोल पर चढ़ा और दूसरी बारी में कैमरा उतारा गया। इस दौरान आरोपी से पूछताछ के बाद उसका चेहरे को कपड़े से बांधकर वापिस रेलवे थाना लाया गया। पोल नंबर 42/27 पर लगा मिला खुफिया कैमरा
सोनीपत रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन के नजदीक हाई वोल्टेज तार के पोल नंबर 42/27 पर रविवार को संदिग्ध खुफिया कैमरा लगा हुआ मिला। यह कैमरा गाजियाबाद के रहने वाले आरोपी प्रवीण और उसके तीन साथियों ने 26 फरवरी को सोनीपत पहुंचकर लगाया था। लेकन सोनीपत रेलवे पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। अलर्ट के बाद ही पुलिस एक्टिव हुई।
18 दिनों तक सक्रिय रहा कैमरा
यह कैमरा करीब 18 दिनों तक लगातार सक्रिय रहा। माना जा रहा है कि इस कैमरे के जरिए लाइव फुटेज पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी जा रही थी, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
रविवार को सोनीपत की रेलवे सुरक्षा बल टीम ने अलर्ट के बाद अपने-अपने स्टेशनों पर चेकिंग अभियान चलाया। गश्त के दौरान यह खुफिया कैमरा मिला, जिसके बाद तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी गई और कैमरे को कपड़े से ढक दिया गया।
लालच देकर कराया गया काम, 10 हजार में हुई डील
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रवीण और उसके साथी एक मुस्लिम युवक के संपर्क में आए थे, जिसने उन्हें लालच दिया। एक कैमरा खरीदने से लेकर लगाने तक के लिए 10 हजार रुपये की डील तय हुई थी। गरीब परिवार से जुड़े युवक लालच में आ गए और पाकिस्तान से जुड़े व्यक्ति के कहने पर यह काम किया। चांदनी चौक से खरीदे गए सोलर आईपी कैमरे
आरोपियों ने दिल्ली के चांदनी चौक बाजार से सोलर बेस्ड आईपी कैमरे खरीदे थे। इसके बाद उन्होंने योजना के तहत सोनीपत में कैमरा इंस्टॉल किया।
गाजियाबाद पुलिस के अनुसार आरोपी प्रवीण और उसके तीन साथी दिल्ली से एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर सोनीपत पहुंचे थे। रात के अंधेरे में मौका देखकर पोल नंबर 42/27 पर कैमरा लगाया और 4 से 5 घंटे में काम पूरा कर टैक्सी के जरिए वापस दिल्ली लौट गए।
पेशे से आरओ पानी सप्लाई में काम करता है आरोपी
जानकारी के मुताबिक आरोपी प्रवीण आरओ पानी सप्लाई करने वाली गाड़ी पर काम करता है। माना जा रहा है कि वह और उसके साथी इस काम से करीब 10 दिन पहले ही पाकिस्तान से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में आए थे। पांचों प्लेटफार्म पर नजर रखने की थी क्षमता जांच में सामने आया है कि कैमरा बेहद संवेदनशील स्थान पर लगाया गया था, जहां से रेलवे स्टेशन के पांचों प्लेटफार्म की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार आरोपियों की योजना अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह के कैमरे लगाने की थी, लेकिन उससे पहले ही वे पकड़े गए।
कैमरा कब्जे में, लैब में होगी जांच
बुधवार को गाजियाबाद पुलिस और रेलवे पुलिस के अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कैमरे को कब्जे में लिया। अब इसे लैब में भेजकर जांच की जाएगी कि यह किस तकनीक से काम कर रहा था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये हाईटेक कैमरे ऐसी जगह लगाए जा रहे थे, जहां से रेल यातायात और माल ढुलाई की गतिविधियों की जानकारी मिल सके। हालांकि आरोपियों को कोई विशेष ट्रेनिंग दी गई थी या नहीं, इसकी जांच जारी है।
6 आरोपी गिरफ्तार, महिला भी शामिल
14 मार्च को गाजियाबाद पुलिस ने एक महिला समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें सुहेल मलिक उर्फ रोमियो, शाने करम उर्फ महक, प्रवीण, राज वाल्मीकि, शिव वाल्मीकि और रितिक गंगवार शामिल हैं।
एनआईए और खुफिया एजेंसियां भी जांच में जुटीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), इंटेलिजेंस ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी जांच में जुट गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी तरीके से दूसरे लोगों के नाम पर कई सिम कार्ड खरीदे थे, ताकि उनकी पहचान छिपी रहे और वे आसानी से संपर्क बनाए रख सकें। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसका एक्सेस किन लोगों के पास था। आरोपी से लगातार पूछताछ कर इन सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
चांदनी चौक से खरीदे कैमरे, सोनीपत में रातों-रात लगाए:18 दिन तक पहले लगाया था; 4 आरोपी दिल्ली से ट्रेन में सवार होकर आए थे
